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मौसम बदलने पर बढ़ जाती है साइनस की समस्या, जानें क्या है इसका आसान इलाज

News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 6:00 PM IST
मौसम बदलने पर बढ़ जाती है साइनस की समस्या, जानें क्या है इसका आसान इलाज
साइनस कोई गंभीर बीमारी नहीं है, मगर कुछ लोगों को साइनस से बहुत परेशानी होती है. साइनस के कारण काम में मन भी नहीं लगता है.

कभी-कभी शरीर मौसम के साथ सही से तालमेल नहीं बैठा पाता. ऐसे में साइनस एक आम समस्या है, जिसके लोग शिकार हो जाते हैं.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 6:00 PM IST
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मौसम में बदलाव होने पर अक्सर लोग जुकाम और बुखार का शिकार हो जाते हैं जो कि सामान्य है. मगर कई बार जुकाम-बुखार के साथ-साथ छींक, सिर दर्द और नाक बंद होने जैसी कई समस्याएं भी हो जाती हैं, जो कि साइनस या साइनोसाइटिस का संकेत हैं. कभी-कभी शरीर मौसम के साथ सही से तालमेल नहीं बैठा पाता. ऐसे में साइनस एक आम समस्या है, जिसके लोग शिकार हो जाते हैं. हालांकि साइनस कोई गंभीर बीमारी नहीं है, मगर कुछ लोगों को साइनस से बहुत परेशानी होती है. साइनस के कारण काम में मन भी नहीं लगता है. आइए आपको बताते हैं इस बीमारी से जुड़ी कुछ अहम बातें.

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साइनस क्या है?

नाक हमारे शरीर का एक अहम सेन्स ऑर्गन होता है. सांस लेने की प्रक्रिया नाक के माध्यम से ही होती है. साइनोसाइटिस नाक को प्रभावित करता है. वास्तव में साइनस हवा की एक थैली होती है जो नाक के चारों ओर फैली होती है. अंदर ली गई हवा इस थैली से गुजरकर फेफड़ों तक पहुंचती है. यह थैली हवा के प्रदूषित भाग को भीतर जाने से रोकती है और उसे बलगम या विकार के रूप में निकाल देती है. साइनस में जब म्यूक्स का मार्ग अवरूद्ध हो जाता है तब साइनोसाइटिस की स्थिति पैदा होती है. म्यूक्स में यह अवरोध इंफेक्शन तथा साइनस में सूजन आने के कारण होता है. साइनस अंदर ली गई हवा को नमी प्रदान करता है जिससे श्वास नली तथा फेफड़ों को भी नमी मिलती है, इसके प्रभावित होने से शुष्क वातावरण में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

साइनस का कारण

जब एक व्यक्ति को जुकाम तथा एलर्जी हो, तो साइनस ऊतक अधिक कफ बनाते हैं एवं सूज जाते हैं. साइनस का निकासी तंत्र अवरुद्ध हो जाता है एवं कफ इस साइनस में फंस सकता है. बैक्टीरिया एवं वायरस वहां विकसित हो सकते हैं तथा साइनोसाइटिस का कारण हो सकते हैं.

साइनस के लक्षण
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  • बच्चों को आमतौर से जुकाम जैसे लक्षण होते हैं, जिसमें भरी हुई या बहती नाक तथा मामूली बुखार शामिल हैं.

  • व्यस्कों में साइनोसाइटिस के अधिकतर लक्षण दिन के समय सूखी खांसी होना जो सर्दी के लक्षणों, बुखार, खराब पेट, दांत दर्द, कान में दर्द, या चेहरे के ढीलेपन के पहले 7 दिनों के बाद भी कम नहीं होते हैं.

  • साइनोसाइटिस होने पर धीरे−धीरे रोगी की आवाज में परिवर्तन आने लगता है. सिरदर्द या सिर में भारीपन भी करता है.

  • नाक व मुंह से ज्यादा बलगम भी आने लगता है और हल्का बुखार भी होता है.

  • रोगी को आंखों में तथा आंखों के पलकों के ऊपर तथा किनारों पर दर्द भी होता है.

  • साथ ही छींक आने पर पानी बहने तथा अंदरूनी सतह सूज जाने के कारण सांस लेना मुश्किल हो सकता है, जिस कारण रोगी को मुंह से सांस लेना पड़ सकता है.


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साइनस का इलाज

  • साइनोसाइटिस हो जाने पर मरीज को किसी विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श करना चाहिए.

  • डॉक्टरों के अनुसार एक्यूट साइनोसाइटिस से अस्थाई अवरोध हो तो एंटीबायोटिक तथा डीकन्जेस्टैंट से दूर हो जाता है.

  • बदलते मौसम के अनुसार खान−पान का ध्यान रखना चाहिए.

  • तापमान के अत्यधिक उतार−चढ़ाव से गले व नाक को बचाए रखें.

  • प्रदूषण, धूल तथा एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्वों से बचना चाहिए.

  • साल में एक बार किसी अच्छे नाक−कान व गला रोग विशेषज्ञ से जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि पनपने के स्तर पर ही रोग को पकड़ा जा सके.

  • अपने वातावरण को साफ रखें साथ ही जिनसे आपको साइनोसाइटिस होता हो, उन परिस्थितियों या एलर्जी के कारकों से बचने की कोशिश करें.


Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 7, 2019, 6:00 PM IST
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