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डेंगू और जीका वायरस से है बचना तो करें इस स्किन क्रीम का इस्तेमाल


Updated: February 1, 2020, 11:32 AM IST
डेंगू और जीका वायरस से है बचना तो करें इस स्किन क्रीम का इस्तेमाल
डेंगू और जीका वायरस से बचाएगी ये स्किन क्रीम

शोधकर्ताओं ने स्किन क्रीम के प्रभाव को समझने के लिए दो अलग-अलग मॉडलों, मानव त्वचा के नमूने और चूहों का उपयोग किया.

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डेंगू और जीका वायरस से होने वाली खतरनाक बीमारियों से लड़ने के लिए शोधकर्ताओं ने एक नई स्किन क्रीम बनाई है. एक हालिया अध्ययन के मुताबिक 'इमिकिमॉड या अल्दारा' नामक इस क्रीम का उपयोग आमतौर पर गुप्तांग में होने वाले संक्रमण और त्वचा कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है. शोधकर्ता ने कहा कि हमारे परिणामों की सबसे खास बात यह है कि यह क्रीम केवल किसी विशेष वायरस को लक्षित नहीं करती बल्कि यह कई अलग-अलग वायरस के खिलाफ भी प्रभावी थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर हम इस रणनीति को एक उपचार के विकल्प के रूप में विकसित करें, तो हम इसका उपयोग कई बीमारियों से निपटने में कर सकते हैं जिनका निदान हम अभी तक नहीं ढूंढ पाएं हैं.

कीट जनित रोगों से लड़ने की क्षमता :
ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के शोधकर्ता क्लाइव मैककिमी और उनकी टीम ने बताया कि चिकित्सकीय रूप से स्वीकृत और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली इस त्वचा क्रीम में कीट जनित रोगों से दोबारा लड़ने की क्षमता है.

फोगिंग से कीड़े मकोड़े दूर भागते हैं
फोगिंग से कीड़े मकोड़े दूर भागते हैं


ऐसे किया गया शोध :
साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्षों को जानने के लिए, शोधकर्ताओं ने मच्छरों द्वारा फैलाए जाने वाले चार प्रकार के वायरस का अध्ययन किया और उन्होंने पाया कि मच्छर के काटने के एक घंटे के भीतर एक क्रीम लगाने से उनके मॉडल में संक्रमण दर कम हो गई.

संक्रमण को फैलने से रोकती है :शोधकर्ताओं ने स्किन क्रीम के प्रभाव को समझने के लिए दो अलग-अलग मॉडलों, मानव त्वचा के नमूने और चूहों का उपयोग किया. दोनों मामलों में उन्होंने पाया कि इस त्वचा क्रीम को लगाने से एक चेतावनी संकेत मिलता है जो त्वचा की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को तेजी से सक्रिय कर देती है. ये किसी भी संभावित संक्रमण के खतरों से लड़ता है.

जीका वायरस जानलेवा भी साबित हो सकता है .
जीका वायरस जानलेवा भी साबित हो सकता है .


मच्छरों के काटने से सैकड़ों वायरस फैलते हैं जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं. इनमें डेंगू, वेस्ट नाइल, जीका और चिकनगुनिया वायरस शामिल हैं, जिनके हाल के वर्षों में व्यापक प्रकोप देखने को मिले हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार, जब कोई मच्छर काटता है, तो शरीर पंचर होने वाली त्वचा के शारीरिक आघात को कम करने के लिए बहुत विशिष्ट तरीके से प्रतिक्रिया करता है. मच्छर के काटने से घाव भरने की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. हालांकि, त्वचा खुद को वायरल हमले के जवाब के लिए तैयार नहीं करती.

शोधकर्ता ने कहा कि हमारे परिणामों की सबसे खास बात यह है कि यह क्रीम केवल किसी विशेष वायरस को लक्षित नहीं करती बल्कि यह कई अलग-अलग वायरस के खिलाफ भी प्रभावी थी. शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर हम इस रणनीति को एक उपचार के विकल्प के रूप में विकसित करें, तो हम इसका उपयोग कई बीमारियों से निपटने में कर सकते हैं जिनका निदान हम अभी तक नहीं ढूंढ पाएं हैं.

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First published: January 30, 2020, 7:55 AM IST
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