बच्चे का पेरेंट्स के साथ सोना किसलिए है फायदेमंद, जानें

बच्चे का पेरेंट्स के साथ सोना सुरक्षित और फायदेमंद है-Image/shutterstock

कुछ पेरेंट्स बच्चे को आत्मनिर्भर (Self dependent) बनाने के लिए उसको अलग सुलाने की आदत डालने लगते हैं. लेकिन पेरेंट्स और बच्चे दोनों के लिए ज़रूरी है कि बच्चे को कुछ समय वो अपने पास ही सुलाएं. क्योंकि ये सुरक्षित (Safe) और फायदेमंद (Beneficial) है.

  • Share this:
    बच्चे के जीवन में आने के बाद पेरेंट्स की लाइफ में काफी बदलाव (Change) होता है. उनके मन में बच्चे से जुड़े कई सवाल आते हैं. इनमें से एक सवाल ये भी है कि आखिर बच्चे को अलग सुलाना सही रहेगा या साथ में. दरअसल बहुत सारे पेरेंट्स बच्चे को आत्मनिर्भर (Self dependent) बनाने की चाहत में शुरुआत से ही उसको अपने से अलग सुलाने की आदत डालने लगते हैं. उनको लगता है कि बाद में ऐसा करना शायद संभव न हो. लेकिन पेरेंट्स और बच्चे दोनों के लिए ज़रूरी है कि बच्चे को कुछ समय वो अपने पास ही सुलाएं. क्योंकि बच्चे का पेरेंट्स के साथ सोना केवल सही ही नहीं है बल्कि सुरक्षित और फायदेमंद (Beneficial) भी है. आइये जानते हैं बच्चे का पेरेंट्स के साथ सोना क्यों फायदेमंद है.

    सुरक्षा का एहसास रहता है

    पेरेंट्स के साथ सोने से बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. इससे उनके मन में सुरक्षा का अहसास बना रहता है. इससे उनको नींद अच्छी आती है और उसे किसी तरह का डर नहीं लगता है. साथ ही आपको भी बच्चे को देखने के लिए अलग जगह जाने की ज़रुरत नहीं होती. जिसकी वजह से बार-बार नींद डिस्टर्ब नहीं होती है और अच्छी नींद आती है. जो सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है. साथ ही बच्चे की ज़रुरत आसानी से समय पर पूरी होती है.

    ये भी पढ़ें: बच्चों के लिए खिलौने खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
     भावनात्मक लगाव बढ़ता है



    पेरेंट्स का लगाव तो बच्चे के साथ जन्म से पहले ही हो जाता है. लेकिन बच्चे में भावनात्मक लगाव की शुरुआत अपने पेरेंट्स के साथ सोने से भी होती है. इससे बच्चे का लगाव अपने पेरेंट्स के साथ बढ़ता जाता है जो बड़े होने पर स्पेशल बॉन्डिंग के तौर पर सामने आता है. बच्चा अगर छोटा है तो उसके रोने पर उसे चुप करवाना हो या प्यार-दुलार करना हो. उसकी डायपर बदलनी हो या दूध की ज़रुरत पूरी करनी हो. बच्चा किसी चीज के लिए परेशान नहीं होता है.

    बिहेवियर प्रॉब्लम नहीं होती

    जो बच्चे अपने पेरेंट्स के साथ सोते हैं उनमें बिहेवियर प्रॉब्लम नहीं होती है. वो ज्यादा खुश और संतुष्ट रहते हैं साथ ही उनके आत्मसम्मान में वृद्धि होती है. उनको बिना वजह किसी से डर नहीं लगता है साथ ही दूसरे बच्चे उन पर नाजायज़ दबाव नहीं बना पाते हैं.

    ये भी पढ़ें: बच्चों के कमरे में कभी न रखें ये चीजें, हो सकती हैं खतरनाक

    सही रूटीन बनता है

    अगर बच्चे को शुरुआत से ही अकेले सोने दिया जाये तो उसका रुटीन सेट नहीं हो पाता है. वो अपनी मर्ज़ी के अनुसार सोता-जागता और अन्य काम करने लगता है.लेकिन अगर बच्चा पेरेंट्स के साथ सोता है तो आपके अनुसार उसका हेल्दी रुटीन सेट हो जाता है. जो बच्चों की सेहत के लिए तो बेहतर होता ही है साथ ही उसमें अच्छी आदतों को डालने की शुरुआत हो जाती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
    Published by:Meenal Tingel
    First published: