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स्मार्टफोन बताएगा प्रेग्नेंट मां और बच्चे का हाल, होगी गर्भनाल की होगी निगरानी

स्मार्टफोन बताएगा प्रेग्नेंट मां और बच्चे का हाल, होगी गर्भनाल की होगी निगरानी

गर्भनाल के जरिए मां और बच्चे के बारे में तमाम नाजुक और जरूरी सूचनाएं मिल सकेंगी.

गर्भनाल के जरिए मां और बच्चे के बारे में तमाम नाजुक और जरूरी सूचनाएं मिल सकेंगी.

गर्भनाल मां और बच्चे की सेहत के बारे में बेहद जरूरी जानकारी देता है लेकिन इसकी जांच करने में लगने वाला समयऔर खर्च इतना ज्यादा है कि इसका इस्तेमाल नहीं हो पाता.

    अब स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर के जरिए बच्चे की गर्भनाल यानी प्लेसेंटा को स्कैन करके मां और उसके बच्चे की सेहत के बारे में पता लगाया जा सकेगा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसंधानकर्ताओं ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के जरिए एक डिजिटल टूल को तैयार किया है. इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भनाल के जरिए मां और बच्चे के बारे में तमाम नाजुक और जरूरी सूचनाएं मिल सकेंगी. इस संबंध में एक स्टडी अर्जेंटिना के ब्यूनस आयर्स में इंटरनैशनल फेडरेशन ऑफ प्लेसेंटा असोसिएशन की बैठक में पेश की गई.

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    मां और बच्चे की सही देखभाल
    न्यूट्रिशनल साइंसेज के अलीसन गरनैंड ने कहा कि जहां पर संसाधन कम हैं या किसी के पास स्मार्टफोन नहीं है, वहां के लिए हमारा लक्ष्य है कि कोई प्रशिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल फोटो खींचे, जिसका इस सॉफ्टवेयर के जरिए विश्लेषण किया जाए. इससे फौरन सूचना मिल जाएगी और उसके जरिए मां और बच्चे की सही देखभाल की जा सकेगी.

    प्रेग्नेंसी के दौरान अहम रोल प्ले करता है प्लेसेंटा
    दरअसल, प्लेसेंटा यानी गर्भनाल मां और बच्चे की सेहत के बारे में बेहद जरूरी जानकारी देता है लेकिन इसकी जांच करने में लगने वाला समय, विशेषज्ञता और खर्च इतना ज्यादा है कि इसका इस्तेमाल नहीं हो पाता. अलीसन गरनैंडड कहते हैं कि बच्चे और मां के लिए प्लेसेंटा ही प्रेग्नेंसी के दौरान सबकुछ करता है. बच्चे को ऑक्सीजन पहुंचाने से लेकर न्यूट्रिशन पहुंचाने तक का काम प्लेसेंटा ही करता है लेकिन दुनियाभर में करीब 95 प्रतिशत डिलिवरी में प्लेसेंटा से जुड़ा डेटा मिस हो जाता है और इसे इक्ट्ठा नहीं किया जाता.

    अभी तक नहीं मिला पेटेंट
    अभी तक इस तकनीक का पेटेंट नहीं मिला है. शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके तहत डिलिवरी के बाद गर्भनाल की हर साइड का आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के जरिए विश्लेषण किया जाता है. इसके बाद उन नाजुक सूचनाओं की रिपोर्ट तैयार की जाती है जो उस मां और बच्चे की सेहत पर असर डाल सकती है. इसके जरिए यह भी पता लगाया जाता है कि गर्भ में भ्रूण को पूरा ऑक्सीजन मिली या नहीं, कहीं इंफेक्शन या ब्लीडिंग का खतरा तो नहीं है.

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    गर्भनाल का परीक्षण किया जाएगा
    इस डिजिटल टूल को स्मार्टफोन या टैब में उचित सॉफ्टवेयर के जरिए कोई भी ऑपरेट कर सकेगा
    और मां और बच्चे की सेहत के बारे में जान सकेगा. शोधकर्ताओं द्वारा पेश किए गए इस हल में सभी गर्भनाल का परीक्षण किया जाएगा. इससे बार-बार पैथोलॉजिकल परीक्षण के लिए भेजे जाने वाले गर्भनाल का नंबर भी घटेगा. इससे मां और बच्चे की सेहत पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा.

    Tags: Health, Lifestyle

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