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ब्रेकअप की तकलीफ को बढ़ा देता है सोशल मीडिया


Updated: February 18, 2020, 9:29 AM IST
ब्रेकअप की तकलीफ को बढ़ा देता है सोशल मीडिया
ब्रेकअप की तकलीफ को बढ़ा देता है सोशल मीडिया

पत्रिका प्रोसिडिंग ऑफ द एसीएम ऑन ह्यूमन कंप्यूटर इंटरएक्शन में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने ऐसे लोगों को शामिल किया, जो रिश्ता टूटने के 18 महीनों के भीतर अपने पूर्व साथी से ऑनलाइन दोबारा आमना-सामना होने से परेशान थे.

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प्यार से खूबसूरत एहसास शायद दुनिया में कोई भी नहीं है. लेकिन यह भी सच है कि जब दिल टूटता है तो मन भी एकदम टूटा हुआ सा महसूस करता है. ऐसे नाजुक वक्त में न किसी काम में मन लगता है और न ही लोग लोग खुद को संभाल ली पाते हैं. डिजिटल युग में प्यार जैसा नाजुक और खूबसूरत रिश्ता जितना हाईटेक हुआ है उतना ही नाजुक और संजीदा भी हुआ है .सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्यार का एहसास जितनी तेजी से बढ़ता है उससे भी ज्यादा तेजी से इसमें दरार भी आती है. आजकल सोशल मीडिया पर मनमुटाव होना आम बात हो गई है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों के टूटने के अनुभव को बदतर बना देते हैं. जो लोग सोशल मीडिया पर अनफ्रेंड, अनफॉलो और ब्लॉक करने जैसे फीचर का इस्तेमाल करते हैं उन्हें इसके बावजूद ऑनलाइन अपने पूर्व साथी का सामना करना पड़ता है. इससे उनके ब्रेकअप का अनुभव और कड़वा हो जाता है.

ऑनलाइन पूर्व साथी का सामना परेशानी का सबब :
ब्रेकअप के बाद ज़्यादातर लोग अपने साथी से नजरें नहीं मिलाना चाहते हैं या उनसे रूबरू होने में कतराते हैं. पत्रिका प्रोसिडिंग ऑफ द एसीएम ऑन ह्यूमन कंप्यूटर इंटरएक्शन में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने ऐसे लोगों को शामिल किया, जो रिश्ता टूटने के 18 महीनों के भीतर अपने पूर्व साथी से ऑनलाइन दोबारा आमना-सामना होने से परेशान थे. इन लोगों का शोधकर्ताओं ने इंटरव्यू लिया.



सोशल मीडिया के पहले भी रिश्ता टूटना कष्टदायी होता था
सोशल मीडिया के पहले भी रिश्ता टूटना कष्टदायी होता था


बार-बार यादें करती हैं परेशान :
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के शोधकर्ता एंथॉनी पिंटर ने कहा, सोशल मीडिया के पहले भी रिश्ता टूटना काफी दिल दुखाने वाला होता था, लेकिन जब से लोगों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ा है तब से कई बार लोगों ने न चाहते हुए भी कई बार ऑनलाइन मीडिया फेसबुक, इन्स्टाग्राम या whatsapp पर लोगों को अपने पुराने साथी का कोई स्टेटस या उससे जुड़ी कोई याद दिख ही जाती है.

फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों के टूटने के अनुभव को बदतर बना देते हैं.
फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों के टूटने के अनुभव को बदतर बना देते हैं.


जिससे वो न चाहते हुए भी पुराने साथी की यादों में डूब जाते हैं और यही उनकी परेशानी का सबब बनती हैं. जबकि पुराने जमाने में ऐसा कोई माध्यम ही नहीं था जब कि लोग अपने साथी से दोबारा कनेक्ट हो पाते. इसलिए तब रिश्ते टूटने का एहसास बाद में इतना दर्द नहीं देता था.

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First published: February 18, 2020, 9:20 AM IST
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