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रोहिणी सेक्टर-2 में 'श्री गोपालजी' के यहां मिलेगा छोले-पालक-चावल का अनूठा स्वाद

यहां की छोले, चावल और पालक की तरी का स्वाद एकदम अलग है.

यहां की छोले, चावल और पालक की तरी का स्वाद एकदम अलग है.

Food Joints of Delhi: आप अगर छोले-चावल के साथ पालक की ग्रेवी को खाना पसंद करते हैं तो इसके लिए आपको रोहिणी सेक्टर 2 में श्री गोपालजी की दुकान पर आना होगा.

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    Food Joints of Delhi: (डॉ. रामेश्वर दयाल) राजधानी दिल्ली के खानपान में चावल की महिमा भी निराली है. किसी भी रेस्तरां या फूड आउटलेट पर जाएंगे तो वहां आपको राइस की दो-एक वैरायटी जरूर मिलेगी. दिल्ली के स्ट्रीट फूड्स (Delhi Street Foods) में छोले-चावल, कड़ी-चावल और राजमा-चावल की बहार है. यह तीन डिश आपको हर कहीं नजर आएंगी. आपको यह भी बताते चलें कि राजधानी में जहां भी कमर्शियल प्लेस जैसे राजेंद्र प्लेस, नेहरू प्लेस, नेताजी सुभाष प्लेस आदि में यह तीनों डिश आपको खूब दिखाई देगी. उसका कारण यह है कि इनके लिए बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता, दूसरे यह खाना पेट के लिए बहुत भारी भी नहीं माना जाता.

    जब हमने चावल की तारीफ कर दी है तो आप मान गए होंगे कि आज हम इससे जुड़ी किसी डिश से आपका परिचय कराने जा रहे हैं. जी हां, आज हम आपको चावल के साथ छोले व पालक की सब्जी का स्वाद चखवाते हैं. दिल्ली में ऐसे कम ही फूड ज्वाइंट्स होंगे, जहां इन तीनों का संगम आपको मिलेगा. इनका मिला-जुला स्वाद एक अलग ही संतुष्टि पहुंचाता है.

    छोले-चावल के साथ पालक की गाढ़ी तरी

    आउटर दिल्ली के रोहिणी इलाके की अवंतिका मार्केट खासी मशहूर है. उसके पास सेक्टर-2 के पॉकेट-7 में ‘श्री गोपालजी’ की आउटलेट है. इलाके में यह गोपालजी छोले-भटूरे के नाम से भी जानी जाती है. कोरोना
    प्रकोप से पहले यह रेस्तरां था, लेकिन आजकल यहां से पैकिंग कर ही खाना बेचा जाता है. इस आउटलेट पर शुरू से ही चार सामान बेचे जा रहे हैं. इनमें छोले-पालक-चावल तो मेन डिश है ही साथ में छोले-भटूरे के
    अलावा रायता व लस्सी भी काफी फेमस हैं.

    पहले छोले-पालक-चावल की बात करें. यह मिश्रण कुछ अलग ही स्वाद वाला है. उसका कारण है कि इन्हें बनाने के लिए मूंगफली के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. सालों से पुरानी दिल्ली के मसाले लाकर उन्हें कूटकर विशेष मसाले बनाए जाते हैं और उनसे ही इस डिश को तैयार किया जाता है. तरीका यही है कि चावलों के ऊपर छोले रखे जाते हैं. इसके अलावा पालक को खास तरीके से बनाया जाता है. उसे पीसा जाता है और फिर उसकी गाढ़ी तरी बनाई जाती है. इस तरी को भी चावलों में मिलाया जाता है.

    यह स्वादिष्ट डिश यहां 120 रुपये में मिलती है.

    इस डिश के साथ लच्छा प्याज व हरी तीखी चटनी और मिर्च के अचार के अलावा सीजनल अचार जैसे आम या गाजर को भी पेश किया जाता है. इन सबको मिलाकर जो स्वाद बनता है, वह मुंह को तो रसीला बनाता ही है, साथ ही मन को भी संतुष्ट करता है. विशेष बात यह है कि इनको बनाने में एक महिला का भी महत्वपूर्ण रोल है. उन्हीं के कहने पर पालक की तरी को इस डिश में मिलाया गया, जिससे अलग ही स्वाद बनकर उभरा. यह स्वादिष्ट डिश 120 रुपये में मिलती है.

    भटूरे में पनीर के अलावा सीक्रेट मसाला

    यहां के छोले-भटूरे भी कम लाजवाब नहीं है. इनके भटूरे की एक विशेषता यह है कि उनमें पनीर को तो भरा ही जाता है, साथ ही स्पेशल मसाला भी डाला जाता है. यह सीक्रेट मसाला भी खुद ही तैयार किया जाता है, जिससे भटूरे का स्वाद उभरता है. इन भटूरों को तलने के लिए भी मूंगफली के तेल का इस्तेमाल होता है. इस तेल की विशेषता यह है कि यह अन्य तेलों से महंगा तो है ही साथ ही जब इसमें भटूरे तले जाते हैं
    तो वह कुरकुरे से हो जाते हैं, लेकिन जब उनका कौर तोड़कर मुंह में डाला जाता है तो यह भटूरे जुबान में घुलते से महसूस होते हैं. छोले भी लाजवाब है. उनमें मुलतानी स्वाद का तड़का है. इसलिए भटूरों के साथ
    खाते हुए अलग ही मजा देते हैं. यह छोले बहुत तीखे नहीं होते. इनके साथ भी लच्छा प्याज, हरी चटनी, मिर्च व सीजनल अचार दिया जाता है. छोले-भटूरे की एक प्लेट की कीमत 100 रुपये है. इन दो चटपटी
    आइटमों के अलावा वहां 60 रुपये में मीठी लस्सी व 40 रुपये में मसालेदार रायता भी मिलता है. इनका स्वाद भी आपको कुछ अलग ही ताजगी देता नजर आएगा.

    इस तरह खानें में बढ़ा टेस्ट

    इलाके में यह दुकान वर्ष 1996 से है. दुकान के मुखिया हरगोपाल ग्रोवर हैं. इनका संबंध पाकिस्तान के मुलतान इलाके से है. जब उन्होंने दुकान शुरू की तो उनकी पत्नी प्रेरणा ग्रोवर ने उनकी खासी मदद की और कोशिश की उनका भोजन घर के स्वाद जैसा होना चाहिए. छोले-पालक और चावल के मिश्रण की सोच भी उन्हीं की थी. इसका परिणाम यह निकला कि काम चल निकला. आजकल इस आउटलेट को उनके बेटे हर्ष ग्रोवर भी देख रहे हैं. वह जूनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं.

    यह दुकान रोहिणी सेक्टर 2 में वर्ष 1996 से है.

    मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे. लेकिन मन वहां नहीं रमा और परिवार के काम में ही जुट गए. परिवार का कहना है हमारे बनाए विशेष मसाले, मूंगफली का तेल और घर के स्वाद वाला अपनापन ही उनके काम को आगे बढ़ा रहा है. कोई साप्ताहिक अवकाश नहीं है.

    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: रोहिणी पश्चिम

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