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    सूर्य नमस्‍कार से करें दिन की शुरुआत, रोगों से मुक्ति दिलाएंगे ये योगासन

    नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी का संचार होता है.
    नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी का संचार होता है.

    योग करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है, बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग सांसों और मन पर नियंत्रण पाने की क्रिया है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 22, 2020, 10:35 AM IST
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    आज रविवार के लाइव योगा सेशन (Live Yoga Session) में कई महत्‍वपूर्ण योगासन सिखाए गए. अब जबकि ठंड शुरू हो चुकी है. ऐसे में मार्जरी आसन का अभ्‍यास जरूरी बताया गया. ये कमर के दर्द में भी आराम पहुंचाता है. इसके अलावा कई सूक्ष्‍म व्‍यायाम भी सिखाए गए. इनमें पंजों को उठाते हुए स्प्रिंग की तरह अपने पैरों को चलाना भी शामिल है. इससे मसल्‍स मजबूत होती हैं और पैरों की नस चढ़ने जैसी समस्‍या भी नहीं होती. इसका निरंतर अभ्‍यास पैरों को मजबूती देता है. इसके अलावा व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें. नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी (Body Energy) का संचार तो होता है. साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है. योग से व्यक्तित्व का विकास होता है. इन व्यायाम को करने से शरीर का लचीलापन भी बढ़ता है और मोटापा घटता है.

    मार्जरी आसन
    मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.


    मार्जरी आसन के फायदे


    रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है
    पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है
    रक्त परिसंचरण में सुधार करती है
    पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है
    पेट को टोन करने में मदद करता है
    तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है
    मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है
    कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है.

    ग्रीवा शक्ति आसन
    सर्वाइकल स्‍पॉन्‍डिलाइटिस की समस्‍या है तो ग्रीवा शक्ति ग्रीवा शक्ति आसन से लाभ होगा. इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

    इसे भी पढ़ें - इन योगासनों के साथ करें दिन की शुरुआत

    सूर्य नमस्कार
    सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है. सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है. पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं.

    प्रणाम आसन
    इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.
    हस्ततुन्नासन: इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.

    हस्तपाद आसन
    इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.

    अश्व संचालन आसन
    इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.

    पर्वत आसन
    इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.

    अष्टांग नमस्कार
    इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.

    भुजंग आसन
    इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.

    शवासन
    मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

    सूर्य नमस्कार के फायदे
    सूर्य नमस्कार करने से स्ट्रेस दूर होता है, बॉडी डिटॉक्स होती है और मोटापा घटता है. जिन महिलाओं को मासिक धर्म की समस्या है यह उनके लिए काफी लाभकारी होता है. रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है.

    इसे भी पढ़ें - कंधे को मजबूत बनाएंगे ये योगासन, पीठ और कमर दर्द भी होगा दूर

    ये लोग सूर्य नमस्कार न करें
    गर्भवती महिलाएं सूर्य नमस्कार न करें
    उच्च रक्ताचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार ना करें.
    अगर आपको पीठ का दर्द रहता है तो सूर्य नमस्कार करने से पहले स्पेशलिस्ट की सलाह लें.
    महिलाएं पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार ना करें.
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