भारत का सबसे पुराना 'इंस्टैंट फूड', आप भी जानें अपने 'सत्तू' की कहानी

सत्तू, भूने हुए चने और जौ से बनाया जाता है. इसे पानी, दूध या दही में घोल कर पी सकते हैं. Image-shutterstock.com

सत्तू, भूने हुए चने और जौ से बनाया जाता है. इसे पानी, दूध या दही में घोल कर पी सकते हैं. Image-shutterstock.com

सत्तू (Sattu) भारत का सबसे पुराना इंस्टैंट फूड (Instant Food) तो है ही लेकिन यह दावा भी किया जाता है कि दुनिया में सबसे पहले सत्तू का ही इस्तेमाल इंस्टैंट फूड के तौर पर किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 8:18 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

आजकल बात गर्मी और उससे बचने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले खाने-पीने की हो रही है. मेरी कोशिश होती है कि मैं ऐसे ही 'कूल ड्रिंक्स' की बात करूं जो पारंपरिक ढंग से भारतीय हो. ऐसा इसलिए क्योंकि मौसम के हिसाब से आपके शरीर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है स्पेटल फूड.

उत्तर प्रदेश और बिहार में तो स्टेपल फूड

भारत की बात की जाए तो यहां खाने पीने का सिलसिला बहुत ही पुराना है. हमारी पाक कला काफी समृद्ध रही है और देश में अलग-अलग तरह के क्षेत्र होने की वजह से कई तरह के कुजीन भी हैं. मैं आज जिस खाने की बात करने जा रहा हूं वह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में तो स्टेपल फूड है ही लेकिन अब अपनी खूबी की वजह से पूरे देश में मशहूर हो रहा है.
भारत का सबसे पुराना इंस्टैंट फूड

जी मैं बात कर रहा हूं सत्तू की. सत्तू भारत का सबसे पुराना इंस्टैंट फूड तो है ही लेकिन यह दावा भी किया जाता है कि दुनिया में सबसे पहले सत्तू का ही इस्तेमाल इंस्टैंट फूड के तौर पर किया गया है. बहरहाल जो भी हो एक बात तय है कि यह किसी सूपर फूड से कम नहीं और गर्मी के दिनों में तो यह आपके लिए रामबाण जैसा ही है.

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शिवाजी ने भी किया गुरिल्ला वॉर के दौरान सत्तू इस्तेमाल

इसकी खासियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वीर शिवाजी ने भी गुरिल्ला वॉर के दौरान अपनी सेना को सत्तू दिया था. आज भी हमारी सुरक्षा एजेंसियों के जवान जब लंबी गश्त पर होते हैं तो सत्तू जरूर इस्तेमाल में लाया जाता है. इसे बनाना काफी आसान होता है. पानी में सत्तू मिलाया, घोला और पी लिया. नमक आप पहले से ही सत्तू में डाल सकते हैं. इसके साथ ही इसका जूठा बर्तन भी आसानी से धोया जा सकता है.

भूने हुए चने और जौ से बनाया जाता है

मुख्य तौर पर सत्तू, भूने हुए चने और जौ से बनाया जाता है. इसे पानी, दूध या दही में घोल कर पी सकते हैं या फिर इसे गूंथ कर चटनी के साथ भी खाया जा सकता है. पहले यह ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खाया जाता था लेकिन अब धीरे-धीरे शहरों में भी इसकी खपत बढ़ी है. प्याज के छोटे टुकड़ों, नमक, भूना पीसा हुआ जीरा, पुदीना और नींबू के साथ चने के सत्तू का जायका काई गुना बढ़ जाता है.

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सत्तू के लाभ

- पेट साफ रखने में मददगार

- डिटॉक्स करने के लिए बेहतर

- भूख बढ़ाने में है मददगार

- वजन कम करने में भी लाभदायक

- गर्मी का असर कम करता है

- मधुमेह और बीपी के मरीजों के लिए लाभदायक
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