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झगड़ा बहुत हुआ पर मिठास बरकरार, रसगुल्ला अब अंतरिक्ष तक पहुंचेगा

रसगुल्ला पूरे देश में उपलब्ध है. साथ ही कई अलग-अलग देशों में भी इसका आनंद लिया जा सकता है.
रसगुल्ला पूरे देश में उपलब्ध है. साथ ही कई अलग-अलग देशों में भी इसका आनंद लिया जा सकता है.

रसगुल्ला के फिलहाल दो प्रकार, पहला बंगाल रसोगुल्ला और दूसरा ओडिशा रसगुल्ला अलग-अलग "जीयोग्राफिकल इंडिकेशन" के साथ दर्ज हैं. छेने के गोले बनाए जाते हैं और फिर उन्हें चीनी के गरम घोल में डाल दिया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 16, 2021, 8:52 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

रसगुल्ले (Rasgulla) के 'मालिकाना हक' को लेकर भले ही कितना भी झगड़ा हुआ हो लेकिन जब यह प्लेट में आपके सामने आता है तो मिठास ही घोलता है. इस मिठाई को लेकर भले ही बंगाल और ओडिशा में रस्साकशी हुई हो लेकिन एक बात तय है कि यह भारत की मिठाई (Indian Sweet) है. इस तथ्य में कोई झगड़ा नहीं. रसगुल्ला के फिलहाल दो प्रकार, पहला बंगाल रसोगुल्ला और दूसरा ओडिशा रसगुल्ला अलग-अलग "जीयोग्राफिकल इंडिकेशन" के साथ दर्ज हैं. छेने के गोले बनाए जाते हैं और फिर उन्हें चीनी के गरम घोल में डाल दिया जाता है. रसगुल्ला जितना स्पंजी हो उतना ही मजा आता है. दो उंगलियों के बीच में उसे दबाकर स्वाद लिया जाता है.

ऐसे में अगर रसगुल्ले के इतिहास पर बात हो तो दो थ्योरी को देखना होगा...



ओडिशा का दावा
ओडिशा के इतिहासकारों का कहना है कि रसगुल्ला की शुरुआत पूरी से हुई थी. खीर मोहन एक मिठाई बनती थी और इतिहासकारों का कहना है कि उसी से आगे बढ़कर रसगुल्ला बनाया गया. जगन्नाथ मंदिर में भोग के तौर पर इसे पेश किया जाता है. स्थानीय इतिहासकारों का दावा है कि करीब 300 सालों से पूरी के मंदिर में रसगुल्ले का भोग लगता था. इसके साथ ही यह भी दावा किया जाता है कि रसगुल्ला ओडिशा के खानसामों के साथ बंगाल पहुंचा था.

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बंगाल का दावा
बंगाल का दावा सीधा-सीधा यह है कि सन 1868 में कोलकाता के रहने वाले दुकानदार नोबिन चंद्र दास ने रसगुल्ले की शुरुआत की थी. साथ ही एक और दावा भी चलता है कि दास से पहले भी रसगुल्ला बनता था लेकिन दास ने उसे लोकप्रिय कर दिया. साथ ही एक फूड इतिहासकार प्रनब रे का दावा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के बाहर सन 1866 में ही ब्रजा मोरिया ने रसगुल्ला बेचना शुरू कर दिया था. इसके साथ ही अन्य कई अलग-अलग तरह के दावे हैं. साथ ही यह भी कहा जाता है कि रसगुल्ले जैसी मिलती-जुलती कई मिठाइयां बंगाल के विभिन्न इलाकों में विभिन्न नामों से मशहूर थीं.

बहरहाल अब तो रसगुल्ला पूरे देश में उपलब्ध है. साथ ही कई अलग-अलग देशों में भी इसका आनंद लिया जा सकता है. हर बड़े-छोटे शहर में एक रसगुल्ले की दुकान तो मशहूर होती ही है. तो आप भी आज अपने पड़ोस वाली दुकान से रसगुल्ला खाकर आइए....और हां आपको जान कर यह अच्छा लगेगा कि रसगुल्ला अब स्पेस यानि अंतरिक्ष में भी पहुंचने वाला है. इंडियन स्पेस एजेंसी ISRO एक ऐसे रसगुल्ले की किस्म पर काम कर रहा है जिसे भारतीय एस्ट्रोनॉट अपने साथ अंतरिक्ष मिशन पर ले जा सकें और पृथ्वी से दूर इसका स्वाद ले सकें.
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