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Street Food ज़ायकाः आफताब और राजेश हज़ारों साल पुराने तरीके से मिट्टी के बर्तन में पकाते हैं 'अहुना मटन'

मटन अहुना- मटन हांडी

मटन अहुना- मटन हांडी

मटन अहुना सबसे पहले बिहार के पश्चिमी चंपारण (बेतियाह) में बनाया गया था. ये बात तब की है जब खाना बनाने के लिए मिट्टी के ...अधिक पढ़ें

    Street Food ज़ायका में आज आपको मिलवाने जा रहे हैं उन दो दोस्तों से जो मटन को हांडी  में उसकी सबसे पहली ईजाद की रेसिपी से बनाते हैं. वक्त के साथ लोग बदले, चीजें बदली, लेकिन इन्होंने मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने की परंपरा नहीं बदली.

    मटन अहुना सबसे पहले बिहार के पश्चिमी चंपारण (बेतियाह) में बनाया गया था. ये बात तब की है जब खाना बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल होता था. उस समय अहुना नाम इसे क्यों दिया था, ये तो नहीं पता लेकिन आज ये मटन हांडी के नाम से मशहूर है. चंपारण के इस गोश्त की क्वॉलिटी पूरे भारत में सबसे अच्छी है.



    चंपारण जिला, भारत-नेपाल की सीमा पर है. यहां आज भी बड़े-बड़े जंगल हैं. अंग्रेजी राज में फिरंगी शिकार से लौटकर मटन पकाकर खाते थे. तब ही मटन अहुना रेसिपी का ईज़ाद हुआ. अंग्रेजों के जमाने में ही ये मशहूर थी. मटन अहुना के अलावा सबसे ज्यादा मटन सीक कबाब खाना पसंद करते थे.

    पुरानी परंपरा को वापस लाने की कोशिश
    आफताब और राजेश ने उसी परंपरा को वापस लाने की कोशिश की आज से आठ साल पहले 2010 में. उन्होंने चंपारण मीट हाउस नाम से पटना में दुकान शुरू की. जिसे नुरुल आफताब और पार्टनर राजेश चलाते हैं. ये दोनों ही चम्पारण से ही हैं. पटना चुनने की वजह यहां के लोगों को परंपरागत खाने की ओर वापस लाना था.



    अहुना मीट में मिलाए जाने वाले मसाले ओखल-मूस्ली में कूटकर तैयार किए जाते हैं. 2010 से तकरीबन 7 साल तक ऐसा ही चलता रहा. रेसिपी पसंद आई. करोबार आगे बढ़ा. 2017 में दूसरी दुकान बीएचयू, बनारस में खोली गई. फिर तीसरी रांची में और चौथी अगस्त 2018 में जनकपुरी, दिल्ली में. दिसंबर अंत तक एक दुकान नोएडा में खोलने की कोशिश है. एक प्लेट मटन का दाम 180 रुपये है. इसके साथ चार रोटी और हाफ प्लेट चावल परोसे जाते हैं.

    नुरुल आफताब का महीने की कमाई पर उनका कहना था, 2010 में जब दुकान शुरू हुई थी तो बस खर्चा-पानी निकलता था. अब ठीक-ठाक कमा लेते हैं और बचत भी कर पा रहे हैं. आगे कोशिश है बिहार की परंपरागत डिश को मशहूर कर लोगों को रोजगार दें.

    लोग क्यों करते हैं इन्हें पसंद
    वे कहते हैं अब अहुना मटन नाम से बहुत दुकानें खुल गई हैं.  सब दावा करते हैं वे असली अहुना मटन बनाते हैं. लेकिन, कहना गलत न होगा की उनके पास परिपक्व कारीगारों का जुगाड़ नहीं है. पटना और बाकी जगह मौजूद दुकान पर ऐसे करीगर काम कर रहे हैं जिनके बाप-दादा अहुना मटन बनाया करते थे. रेसिपी बनाने का उनके पास खास अनुभव है.



    नुरुल आफताब ने रेसिपी साझा की है...

    एक किलो मटन बनाने की विधि
    मटन बनाने के लिए मिट्टी के गोल बर्तन का इस्तेमाल किया जाता है. एक बर्तन में दो किलो मटन पकता है. रेसिपी एक किलो मटन की साझा की जा रही है.

    400 ग्राम बारीक कटा हुआ प्याज
    150 ग्राम सरसों का तेल
    3-4 साबुत लहसुन
    3-4 सूखी मिर्च साबुत
    थोड़ा-सा साबुत खड़ा गरम मसाला
    एक किलो मटन
    तरीबन 100 ग्राम दही
    स्वादानुसार नमक
    और खास विधि से घरेलू तैयार किया गया अहुना मसाला

    इन सभी चीजों में मटन को मैरीनेट किया जाता है. मिट्टी के बर्तन को धोकर सुखा लेते हैं. मटन को हांडी में पलटकर ढक्कन को आटे से बंद कर देते हैं. जिससे उसमें महक और स्वाद दोनों ही चीजें बनी रहें. लकड़ी का कोयला बनाकर धीमी आंच पर पकाते हैं. तकरीबन एक घंटा. इसके बाद परोसते हैं.

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    Tags: Eat healthy, Health Explainer, Health News, Healthy Foods, Lifestyle, Street Food

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