Street Food ज़ायका: आलू चाट थी 3 रुपए की- फ्रूट चाट 1 की, तब से चाट बेचते हैं CP वाले पप्पू

आज की कहानी है ‘पप्पू चाटवाला’ की, जो दिल्ली के कनॉट प्लेस में कस्तूरबा गांधी मार्ग पर 4 बाई 4 की दुकान लगाते हैं.

Khushboo Vishnoi | News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 2:27 PM IST
Street Food ज़ायका: आलू चाट थी 3 रुपए की- फ्रूट चाट 1 की, तब से चाट बेचते हैं CP वाले पप्पू
पप्पु चाट वाला
Khushboo Vishnoi | News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 2:27 PM IST
देसी घी में सुनहरे तले आलू में जान डालता है ऊपर से छिड़का चाट मसाला. और फिर बनती है आलू चाट. साथ में खट्टी-मीठी, हरी-लाल चटनी हो तो सोने पे सुहागा. इसी चाट के स्वाद को बरकरार रखे हुए है पप्पू चाट वाला.

Street Food ज़ायका  में आज की कहानी है पप्पू चाटवाले की, ये दिल्ली के कनॉट प्लेस में कस्तूरबा गांधी मार्ग पर 4 बाई 4 की दुकान लगाते हैं.

इन दुकान की कहानी शुरू हुई थी 1980 से. भगवान स्वरूप (स्व.) पटरी पर रेड़ी लगाया करते थे. तब परिवार पालने के लिए घर से निकल फ्रूट चाट बेचते थे. पप्पू तब 6-7 साल के थे. पढ़ते थे और दुकान पर पापा की भी मदद करते थे. चार साल बाद, 1984 में पप्पू के पिताजी का देहांत हुआ. वे लगभग 11 साल के थे. पढ़ाई-लिखाई छूटी. बड़े भइया, रामेश्वर गुप्ता के साथ काम करने लगे. पप्पू का जन्म, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था. लेकिन कारोबार दिल्ली में ही कर रहे हैं.

गर्मियों में केले और खीरे बेचते. मौसम के करवट लेने पर भुट्टे. शाम में अख़बार. अखबार का काम 12 महीने चलता था. दोनों भाई मिलकर काम करते. और परिवार का पेट पालते. दुकान पिताजी के सामने ही मिल गई थी. एक भाई पटरी पर, दूसरा दुकान पे बैठकर काम चला रहा था. तीन वक्त की रोटी खानी ही नसीब हो पाती थी. 10 साल तक (लगभग 1984) ऐसा चल.

कैसे आया चाट बेचने का ख़याल
शाम में एक दिन जब पप्पू अखबार बेचकर घर वापस गए तो मां ने आलू तलकर सामने रखे. कहा, आज घर में यही है. इसी से पेट भरना है. जो कि खाने में उन्हें मज़ेदार लगे. जिसके बाद उन्हें आलू चाट बेचने का ख्याल आया. कम चीजों और लागत में अच्छी चीज बन सकती है.

पप्पू को खाना परखने की आदत थी. बनाकर, पहले खुद चखते. फिर ‘दुपके’ से इसे दुकान पर बनाकर केवल पुराने ग्राहकों को परोसते. वे सभी अपने थे न, इसलिए. जब वे कहते उसे बढ़िया बताते, तब बेचते थे. करीब दो-ढाई महीने तक ऐसे ही चलता. मेहनत से, दिल से काम किया. धीरे धीरे आलू चाट का कारोबार चल निकला.
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आलू चाट की शुरुआती कीमत 3 रुपये थी
3 रुपये की आलू चाट से बेचना चालू किया. आज 40-50 रुपये की है. फ्रूट चाट 1 रुपये की थी. जो आज 40, 50 और 60 की है. पप्पू ने धीरे-धीरे आलू चाट में एक्सपेरिमेंट करने शुरू किए. घी में तलकर कभी मसाले मिलाकर बेचा. तो कभी हरी और लाल चटनी के साथ.



चाट की खासियत
पप्पू बताते हैं कि ये दो तरह की लाल चटनी बनाते हैं. एक खट्टी वाली और दूसरी मीठी वाली. ग्राहक की पसंद के अनुसार ही इसे आलू चाट में मिलाकर परोसते हैं. कई लोग इनकी चटपटी आलू चाट के दीवाने हैं. जिसमें तीखी हरी, हल्की मीठी लाल और पिसे हुए मसाले मिले होते हैं.

मीठी आलू चाट किसी भी तरह नुकसानदायक नहीं है. स्वाद में बहुत ही बढ़ीया रहे. किसी को गैस की परेशानी न हो. बुखार, जुकाम की समस्या में इनकी मीठी आलू चाट फायदा करती है. साल 2000 के अंदर इनका कारोबार जम चुका था. आलू चाट के लिए ये दूर-दूर तक मशहूर हो चुके थे.

ग्राहकों की पहली पसंद
पप्पू का कहना है कि उसी क्वॉलिटी के साथ. सेम चीज. वो आज भी परोस रहे हैं. जो 10 साल पहले बेचते थे. ‘शादी-बिया’ में ये गोलगप्पे, पापड़ी और टिक्की का भी काम करते हैं. ध्यान से, देखभाल कर, साफ-सुथरी चीजें अपने हाथों से तैयार करते हैं. कुछ भी कारीगरों से नहीं कराते. चाट के लिए मसाले और चटनी बनाते हैं. बाज़ार से साबुत मसाले लेकर आते हैं. उन्हें भूनते हैं. फिर मशीन में पीसते हैं.

30-35 साल पुराने ग्राहक आज भी उन्हीं के पास चाट खाने आ रहे हैं. पप्पू के लिए सबसे बड़ी बात विश्वास है. ‘पैसा कमाना बड़ी बात नहीं है विश्वास कमाना बहुत बड़ी बात है’. पप्पू कहते हैं कि जिस दिन पैसे पर ध्यान दिया. उस दिन वो स्वाद, न तो ग्राहक को खिला पाउंगा और नाम भी खराब होगा. क्वॉलिटी खत्म-सी हो जाएगी. थोड़ा-बहुत ही मार्जेन रहे उस हिसाब से काम करता हूं. खर्चा-पानी चल पाए बस इतना ही कमाता हूं.

इन्हें लोग ‘पप्पू गुप्ता’ के नाम से जानते हैं. 45 साल के हैं. 35 साल से ऊपर इन्हें इस कारोबार में हो चुके हैं.

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