होम /न्यूज /जीवन शैली /Street Food ज़ायकाः न पैमप्लेट न ऐड, जानें कैसे मशहूर हुआ DU वाला ‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’

Street Food ज़ायकाः न पैमप्लेट न ऐड, जानें कैसे मशहूर हुआ DU वाला ‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’

टॉम अंकल मैगी पॉइंट

टॉम अंकल मैगी पॉइंट

‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’ नॉर्थ कैंपस के स्टूडेंट का फेवरेट अड्डा है. ये नाम खालसा कॉलेज के ही स्टूडेंट्स ने उन्हें दिया था.

    दिल्ली विश्वविद्यालय घूमे हैं तो यहां के नॉर्थ कैंपस से भी रू-ब-रू होंगे. साफ-चौड़ी सड़कें. कॉलेजों की लाल-लाल दीवारें. हर कॉलेज की चार दीवारी से बाहर झांकते यहां के लंबे लंबे पेड़ ही इस इलाके की शान-ओ-शौकत नहीं बढ़ाते. कॉलेज के आस-पास खाने की छोटी-छोटी टपरी भी अपने स्वाद के लिए मशहूर हैं. ‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’ नॉर्थ कैंपस के स्टूडेंट का फेवरेट अड्डा है.

    मिलिए टॉम अंकल मैगी पॉइंट वाले अंकल से
    आज 2018 में जो अंकल मैगी बना रहे हैं, ये दुकान 1978 में सहारनपुर से आए उनके पिता स्व. रमेश कटारिया ने खालसा कॉलेज के सामने शुरू की थी. कटारिया का निक नेम टीटू था. जो बाद में टॉम अंकल बना. ये नाम खालसा कॉलेज के ही स्टूडेंट्स ने उन्हें दिया था.

    कॉलेज के सामने से शुरू हुई मैगी की दुकान को बिजनेस की शुरुआत कहना गलत न होगा. शुरुआत में इस दुकान पर शिकंजी, जल-जीरा और लाइम सोडा जैसी चीजें चलती थीं. मौसम की तब्दीली के मुताबिक, ठंडा बिकना कम हो जाता था. इसलिए खाने का काम शुरू किया. 1978 से यानी 12 साल बाद सन् 1990 तक काम जम चुका था. आलू टिक्की, ब्रेड पकौड़ा, समोसे भी खूब धड़ल्ले से बिकते थे. उस समय दुकान का नाम था, टॉम ब्रेड पकौड़ा शॉप.



    मैगी का काम शुरू हुआ 1995-96 में. वो भी इत्तेफाकन. एक दिन हुआ यूं कि खाने का कोई आइटम दुकान पर बचा नहीं था. सब बिक चुका था. शाम को स्टूडेंट्स आए और बोले अंकल कुछ खाने को चाहिए, बहुत तेज भूख लगी है. फटाफट दे दो. पापा ने कहा कि दो मिनट तो मैगी की टैग लाइन है, इतने समय में मैगी ही मिलेगी.

    तब दुकान पर पहली बार पापा ने मैगी बनाई. उसमें अपने मसाले मिलाए. उस एक ही बार की मैगी की स्वाद बच्चों की ज़बान पर ऐसा चढ़ा कि ये हमारे मेन्यू में शामिल हो गई. ऐसे हुई टॉम अंकल की मैगी की शुरुआत.

    मेन्यू में इत्तेफाकन शामिल हुई मैगी बच्चों को ऐसी भाई कि हमारी सारी दुकान पर सिर्फ मैगी बिकने लगी. शुरुआत में थोड़े दिन मैगी के साथ ही राजमा चावल और छोले कुल्चे भी बिके. इसकी वजह ये भी रही कि गर्मी के मौसम में कुछ घंटे के बाद राजमा चावल, छोले जैसी चीज़ें खराब हो जाया करती थीं. 2007 तक यही सिलसिला चला.

    फरवरी, 2008 में टॉम अंकल अलविदा कह गए. वे दुनिया से तो गए पर बच्चों की ज़बान से नहीं. उनके हाथ का स्वाद बच्चों की ज़बान पर चढ़ा रहा. 2007 में खालसा कॉलेज से टपरी हटाई और कमला नगर के करीब, मॉरिस चौक के पास खोली. जो आज ‘टॉम अंकल मैगी पॉइंट’ के नाम से जाना जाता है. खालसा कॉलेज के स्टूडेंट्स की वजह से मशहूर हुई मैगी धीरे-धीरे पूरे कैंपस में जानी जाने लगी.

    फिर धीरे धीरे मेन्यू में मैगी की ढेर सारी वैराइटी जोड़ी गईं. आज 54 तरह की मैगी बनाते हैं. चीज, बटर, वेजिटेबल, वाइट सॉस, रेड सॉस, चीज कॉर्न, पनीर मसाला मैगी इनमें शुमार हैं. ऑल इन वन मैगी को सबसे ज्यादा बच्चे खाते हैं. इसमें वेजिटेबल, पनीर, बटर, चीज, ऑरिगैनो सभी चीजें डालते हैं. हमारा बनाया स्पेशल मसाला मैगी का स्वाद बढ़ाता है.



    स्पेशल मसाला- अदरक और लहसुन का तड़का होता है. बाकी तीन और तरह के मसाले मिलाते हैं. कई सारे मसालों का मिश्रण होता है. बस समझिए एक तरह का चाट मसाला है.

    कैसे हुए फेमस
    ये पूछने पर मैगी पॉइंट के मालिक हंसकर कहते हैं, आपकी मेहरबानी है. आए दिन टीवी और न्यूजपेपर वाले आते हैं. ऐड और पब्लिसिटी के लिए कभी एक रुपया खर्च नहीं किया. न पैमप्लेट बंटवाए और न ऐड निकलवाए. स्वाद की वजह से लोग आए.

    मैगी रेसिपी
    मैगी को मैगी की तरह बनाते हैं. बस उसमें अपने मसाले डालते हैं. कोई ऑइल इस्तेमाल नहीं करते. किसी चीज को फ्राई भी नहीं करते. सिंपल-साधारण मैगी बनाते हैं. बस हमारे स्पेशल मसाले इसे अलग बनाते हैं.

    कैसे है ये खास
    हमारी मैगी, नेस्ले मैगी मसाले के स्वाद से बिल्कुल अलग है. ‘कसटमर’ को मैगी में कुछ अलग चाहिए तो हमारे पास आता है. मैगी के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं. जब मैगी के ऊपर चीज डालना शुरू किया. कोई सोचता नहीं था कि मैगी पर चीज भी डालकर खाया जा सकता है. अब वो ‘मोस्ट फेमस’ मैगी है.

    टॉम अंकल मैगी पॉइंट को फिलहाल संदीप कटारिया चलाते हैं. वे शुरू से ही स्कूल के बाद अपने पापा की दुकान पर आते थे. 12 साल की उम्र से वे ये काम देख रहे हैं. उन्होंने बी.ए. कॉरेसपॉन्डेंस से किया.

    महीने की कमाई
    संदीप कहते हैं, कोई फिक्स इनकम नहीं है. कभी 100 तो कभी 200 प्लेट बिकती हैं. स्टूडेंट्स पर निर्भर है. मैगी की कीमत 40 रुपये से लेकर 100 तक है. वे कहते हैं, बचत के साथ घर का खर्च आराम से चलता है.

    इसे भी पढ़ेंः
    नारियल पानी में आखिर ऐसा होता क्या है, जो देता है सैकड़ों फायदे
    मां नहीं बनने देती ये बीमारी, 17 करोड़ से ज्यादा औरतें हैं प्रभावित
    महिलाओं के साथ क्या होता है, जब पीरियड्स बंद हो जाते हैं?

    Health Explainer: थायरॉइड होने से पहले और बाद में, शरीर में होता क्या है?
    Health Explainer: बात उस बीमारी की जिसमें महिलाओं के दाढ़ी उग जाती हैं

    Tags: Eat healthy, Food diet, Food Recipe, Health Explainer, Health News, Healthy Foods, Maggi, Street Food, Weight Loss

    टॉप स्टोरीज
    अधिक पढ़ें