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शोध में आया सामने आखिर क्यों पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वेतन होता है कम

शोध में आया सामने आखिर क्यों पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वेतन होता है कम

यह अध्ययन पुनः इस विचार की जांच करता है कि महिलाएं अपनी सैलरी नेगोशिएशन में पिछड़ जाती हैं इसलिए उनकी सैलरी कम होती है. यानी महिलाओं के व्यवहार में दिक्कत है इसलिए उन्हें कम पैसे मिलते हैं

यह अध्ययन पुनः इस विचार की जांच करता है कि महिलाएं अपनी सैलरी नेगोशिएशन में पिछड़ जाती हैं इसलिए उनकी सैलरी कम होती है. यानी महिलाओं के व्यवहार में दिक्कत है इसलिए उन्हें कम पैसे मिलते हैं

यह अध्ययन पुनः इस विचार की जांच करता है कि महिलाएं अपनी सैलरी नेगोशिएशन में पिछड़ जाती हैं इसलिए उनकी सैलरी कम होती है. यानी महिलाओं के व्यवहार में दिक्कत है इसलिए उन्हें कम पैसे मिलते हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    भारत में जेंडर पे गैप पर लंबे समय से बहस चल रही है. इसके बारे में काफी कुछ लिखा और कहा जा रहा है. ये सच है कि समान रूप से योग्य और अनुभवी महिलाएं अपने पुरुष समकक्ष से कम कमाती हैं. इस पूरे बहस में एक तर्क ये दिया जाता है कि चूंकि महिलाएं सैलरी नेगोशिएशन अच्छा नहीं कर पातीं इसलिए उनकी सैलरी कम होती है. हालांकि, एक नए शोध में बताया गया है कि महिला और पुरुष दोनों समान दरों पर वृद्धि और पदोन्नति के लिए कहते हैं, लेकिन दुख की बात है कि एक महिला की दलीलों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर कर दिया जाता है.
    क्या कहती है स्टडी?

    ये स्टडी ‘औद्योगिक संबंध: ए जर्नल ऑफ इकोनॉमी एंड सोसाइटी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. इस विस्तृत अध्ययन का सारांश ये कहता है कि 'आमतौर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम कमाती हैं. इसके पीछे के कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं गया है. ऐसे में यह अध्ययन पुनः इस विचार की जांच करता है कि महिलाएं अपनी सैलरी नेगोशिएशन में पिछड़ जाती हैं इसलिए उनकी सैलरी कम होती है. यानी महिलाओं के व्यवहार में दिक्कत है इसलिए उन्हें कम पैसे मिलते हैं. इस अध्ययन में इसी विचार पर सवाल उठाया गया है. अध्ययन में जो बात सामने आई उसके अनुसार पुरुष और महिलाएं दोनों ही बराबरी से प्रोमोशन और सैलरी की मांग करते हैं, लेकिन महिलाओं की बातों को अनसुना कर दिया जाता है.

    तो आखिर महिलाओं को समान सैलरी क्यों नहीं मिलती?

    इस मुश्किल सवाल का जवाब देने के लिए कोई सर्व-समावेशी डेटा नहीं है, फिर भी एक कारण यह हो सकता है कि अधिकांश महिलाएँ ऐसी नौकरियों में होती हैं जहां वेतन वृद्धि की संभावना कम होती है. एक अन्य अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 120 मिलियन कामकाजी महिलाएँ (जो देश में लगभग 95 प्रतिशत महिला कर्मचारी हैं) असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं, जिनमें कृषि भी शामिल है, जहाँ वेतन वृद्धि या बेहतर वेतन के लिए बातचीत करना मुश्किल से ही संभव है.

    लोग इसके लिए सहमत हों या न हों, लेकिन जेंडर पे गैप का मसला काफी लंबे समय से चला आ रहा है. इसे खत्म करने के लिए निरंतर प्रयास और समय चाहिए. इस बदलाव को लाने के लिए कई क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जिसमें समावेशी और सम्मानजनक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना सूची में सबसे ऊपर है. कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भर्ती और पदोन्नति उचित है. अपने अनुभव और कौशल आदि के आधार पर वरिष्ठों और प्रबंधकों का चयन करें. कार्यस्थल में छोटे बदलावों को शामिल करके एक बड़ा अंतर बनाया जा सकता है.

    Tags: Lifestyle

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