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sugarcane benefits and important facts of it in hindi rada

मिठास से भरा गन्ना अगर फल नहीं है तो क्या है? जानें इससे जुड़ी रोचक बातें

गन्ने का रस लिवर से संबंधित पीलिया बीमारी के लिए लाभकारी है, साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

गन्ने का रस लिवर से संबंधित पीलिया बीमारी के लिए लाभकारी है, साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ के ‘इक्षुवर्ग’ में गन्ने का बहुत ही विस्तार से वर्णन है. इसका रस, शक्तिवर्धक, शीतल, स्निग्ध परंतु कफवर्धक भी है. गन्ने का रस लिवर से संबंधित पीलिया बीमारी के लिए लाभकारी है, साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

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अगर हम कहें कि गन्ने की मिठास ऐतिहासिक नहीं बल्कि पौराणिक है, तो यह हवाई बात नहीं मानी जाएगी. जिस तरह मिठास का स्वाद हजारों साल पुराना है, वैसे ही गन्ने की मिठास भी सालों से अपनी ताजगी बिखेर रही है. गन्ने का रस गुणों से भरपूर है और पीलिया जैसी गंभीर बीमारी में इसका रस बेहद फायदेमंद है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा करता है. आपको बता दें कि गन्ना फल की श्रेणी में नहीं आता है. तो फिर क्या है गन्ना?

हिंदी के जाने-माने कवि बालकवि बैरागी ने ‘गन्ने मेरे भाई’ नामक कविता लिखी है. कविता में बताया गया है कि पिसने, टूटने के बाद भी गन्ना मिठास ही देता है. वह अपने इस गुण को छोड़ता नहीं है. मिठास का यही गुण गन्ने में हजारों सालों से कायम है और आज भी जारी है. गन्ने की उत्पत्ति कहां हुई और इसका विस्तार कैसे हुआ, उसको लेकर दो विचारधाराएं हैं, एक कहती है कि इसका जन्म विदेशी द्वीप में हुआ तो एक का कहना है कि इसका जन्म भारत में हुआ है.

गन्ने के जन्म को लेकर हैं ये मत
मोटे तौर पर खोजबीन बताती है कि गन्ने की खेती हजारों साल पहले दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में न्यू गिनी के द्वीप पर हुई. उसके बाद यहां से गन्ना करीब 2000 वर्ष बाद इंडोनेशिया, फिलीपींस और उत्तर भारत पहुंचा. चीन में गन्ना लगभग 800 ईसा पूर्व भारत से पहुंचा था. 1500 ईस्वी तक मैदानी क्षेत्रों में गन्ने की खेती बढ़ रही थी. इसके बाद इसकी खेती पेरू, ब्राजील, कोलम्बिया और वेनेजुएला में भी होने लगी. इतिहास की किताबें यह भी बताती हैं कि क्रिस्टोफर कोलंबस अमेरिका की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान कैरेबिया में गन्ना लाया था.

sugarcane

ईख (गन्ने) के बारे में सबसे पुराना लिखित संदर्भ अथर्ववेद (प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथ) में मिलता है

एक विचारधारा यह मानती है कि गन्ने का जन्म भारत में हुआ. ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी (अमेरिका) स्थित वनस्पति विज्ञान व प्लांट पैथोलोजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर सुषमा नैथानी के अनुसार अब तक ज्ञात स्रोतों में ईख (गन्ने) के बारे में सबसे पुराना लिखित संदर्भ अथर्ववेद (प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथ) में मिलता है, जहां हवन कुंड बनाने में इक्षु के उपयोग का उल्लेख है. उन्होंने बताया कि 500 ईसापूर्व यूनानी दार्शनिक हेरोडोटस ने भारत में मिलने वाली एक ऐसी घास का वर्णन किया है, जिसके डंठल के बीच शहद भरा रहता था और इस शहद को बनाने में मधुमक्खियों की आवश्यकता नहीं पड़ती.

गन्ने को लेकर मिथक भी हैं. यूनान के प्राचीन ग्रंथों मे इस बात का वर्णन है कि गन्ने को मरियन नामक संत ने आग की राख से पैदा किया. जापान में गन्ने को लेकर लोककथा है कि प्राचीन काल में थामसा नाम के एक भिक्षु को किसी बात पर एक विशाल वृक्ष पर क्रोध आ गया और उन्होंने उसे श्राप देकर दुबला-पतला बना दिया. बाद में यही वृक्ष गन्ने के रूप में परिवर्तित हो गया.

sugarcane

डॉ. नवेद सबिर के अनुसार गन्ना असल में घास (Grass) की प्रजाति में आता है.

घास प्रजाति है गन्ने का ताल्लुक
तो सवाल उठता है कि गन्ने की आखिर प्रजाति क्या है. सब्जी तो यह किसी भी हाल में नहीं है, लेकिन इसे फल भी नहीं माना जाता. तो फिर इसे किस श्रेणी में रखा जाए. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के चीफ साइंटिस्ट डॉ. नवेद सबिर के अनुसार गन्ना असल में घास (Grass) की प्रजाति में आता है. इसकी जाति में बदलाव व संशोधन करने के अथक प्रयास हुए हैं, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली है. अब गन्ना अधिकतर देशों में उगाया जाता है और दुनिया भर में पैदा होने वाली करीब 70 प्रतिशत चीनी को गन्ने से ही बनाया जाता है. बाकी चीनी चुकंदर व अन्य फलों से तैयार होती है.

भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ के ‘इक्षुवर्ग’ में गन्ने का बहुत ही विस्तार से वर्णन है और इसकी जातियों के अलावा यह भी बताया गया है कि इसके रस से क्या-क्या बनाया जा सकता है. ग्रंथ के अनुसार इसका रस, शक्तिवर्धक, शीतल, स्निग्ध परंतु कफवर्धक भी है. वैद्यराज विनीत वलंजु का कहना है कि गन्ने (रस) में कार्बोहाइड्रेट्स की भरपूर मात्रा होती है, इसलिए लंबे समय तक शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गन्ने का रस लिवर से संबंधित पीलिया बीमारी के लिए लाभकारी है, साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है. गन्ने के रस का नुकसान यह है कि अगर इसका अधिक सेवन किया जाए तो यह शुगर की मात्रा बढ़ा देता है. इसके ज्यादा सेवन से चक्कर, सिर दर्द की समस्या पैदा हो सकती है.

Tags: Food, Lifestyle

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