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Sunday Special: साल 2020 है लीप ईयर, फरवरी में क्यों जोड़ा जाता है एक्स्ट्रा दिन, यह न होता तो क्या होता?

Purnima Acharya | News18Hindi
Updated: February 16, 2020, 6:18 AM IST
Sunday Special: साल 2020 है लीप ईयर, फरवरी में क्यों जोड़ा जाता है एक्स्ट्रा दिन, यह न होता तो क्या होता?
पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन और लगभग 6 घंटे का समय लगता है. इस 6 घंटे के चलते प्रत्येक चार वर्ष में एक दिन अधिक हो जाता है.

लीप वर्ष का अतिरिक्त दिन यानी 29 फरवरी बहुत महत्त्वपूर्ण होता है. इस दिन की उत्पत्ति प्रकृति द्वारा सौर मंडल और उसके नियमों से होती है.

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  • Last Updated: February 16, 2020, 6:18 AM IST
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लीप वर्ष हर चार वर्ष के बाद आता है यानी कि हर 4 वर्ष बाद आने वाले वर्ष को लीप वर्ष या अधिवर्ष कहते हैं. इस वर्ष में 365 की जगह 366 दिन होते हैं. लीप ईयर में एक दिन अधिक होता है. दरअसल पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन और लगभग 6 घंटे का समय लगता है. इस 6 घंटे के चलते प्रत्येक चार वर्ष में एक दिन अधिक हो जाता है. परिणामस्वरूप प्रत्येक चार वर्ष बाद फरवरी महीने में एक दिन अतिरिक्त जोड़कर इसे संतुलित किया जाता है.

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पृथ्वी और सूर्य का कनेक्शन
लीप वर्ष का अतिरिक्त दिन यानी 29 फरवरी बहुत महत्त्वपूर्ण होता है. इस दिन की उत्पत्ति प्रकृति द्वारा सौर मंडल और उसके नियमों से होती है. यह धरती के सूर्य की परिक्रमा करने से जुड़ा हुआ है. आपको बता दें कि पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365.242 दिन लगते हैं यानी एक कैलेंडर वर्ष से एक चौथाई दिन अधिक.



इसी के चलते प्रत्येक चौथे वर्ष कैलेंडर में एक दिन अतिरिक्त जोड़ना पड़ता है. इस अतिरिक्त दिन वाले साल को लीप वर्ष या अधिवर्ष कहते हैं. ये अतिरिक्त दिन ग्रेगोरियन कैलेंडर में लीप वर्ष का 60वां दिन बनता है जिसे 29 फरवरी कहते हैं. यदि 29 फरवरी की व्यवस्था न हो तो हम प्रत्येक वर्ष प्रकृति के कैलेंडर से लगभग छह घंटे आगे निकल जाएंगे.

पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365.242 दिन लगते हैं यानी एक कैलेंडर वर्ष से एक चौथाई दिन अधिक.


इसे आसान भाषा में कह सकते हैं कि एक सदी में हम 24 दिन आगे निकल जाएंगे. अगर ऐसा हुआ होता तो मौसम को महीने से जोड़ कर रखना बहुत ही मुश्किल हो जाता. यदि इस लीप वर्ष की व्यवस्था को खत्म कर दिया जाए तो मई-जून की सड़ी हुई गर्मी की स्थिति 500 साल बाद दिसंबर महीने में होगी.

भारतीय सिद्धांत
लगभग 1500 वर्ष पूर्व भारत के ही गणित ज्योतिषाचार्य भास्कराचार्य ने ठीक-ठीक हिसाब लगा कर बताया था कि पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर एक बार घूमने में 365.258 दिन लगते हैं, जिसे एक वर्ष गिना जाता है. भारत के ही आर्यभट ने शून्य के सिद्धांत की स्थापना की थी जिसने संख्या प्रणाली को अतिरिक्त शक्ति प्रदान की जिसमें उस समय तक केवल 9 अंक ही थे.

जूलियन कैलेंडर में  कैसे हुआ लीप वर्ष
ईसा पूर्व 46 में जूलियस सीजर द्वारा लाए गए जूलियन कैलेंडर में लीप वर्ष की व्यवस्था की गई थी. उस दौर में कैलेंडर का अंतिम महीना फरवरी होता था. यह सबसे छोटा महीना भी था इसलिए अतिरिक्त दिन फरवरी महीने में ही जोड़ा गया था. जूलियस सीजर ने मौसम को महीने से मिलाने की पूरी कोशिश की. प्रयास में उसी साल यानी 46 बीसी में कुल 90 अतिरिक्त दिन जोड़े गए थे. इस वर्ष में कुल 445 दिन थे जिसे खुद सीजर ने भी 'भ्रम का अंतिम वर्ष' कहा था.

46 बीसी में पहला लीप वर्ष अपनाए जाने के बाद भी भ्रम बना रहा. इसके जूलियस सीज़र के एक अधिकारी की ग़लती के चलते प्रत्येक तीसरे साल को लीप वर्ष बनाया जाने लगा. इसे 36 साल बाद जूलियस के उत्तराधिकारी ऑगस्टस सीजर ने ठीक कर दिया. उसने तीन लीप वर्ष बिना किसी अतिरिक्त दिन को जोड़े गुजर जाने दिए. इसके बाद 8 एडी से दोबारा हर चौथे साल लीप वर्ष को नियमपूर्वक लागू किया गया.

वहीं जूलियन कैलेंडर को लागू किए जाने के बाद भी उसमें एक कमी रह गई थी जिसे लुइजि गिग्लियो ने दूर किया था. गिग्लियो ने 1580 के लगभग यह सिद्ध किया कि प्रकृति की घड़ी के साथ पूरी तरह ताल मिला कर चलने के लिए हर चौथे वर्ष एक दिन जोड़ने की व्यवस्था में कुछ अपवाद लगाने होंगे. उसने कहा कि कोई वर्ष जो 4 से विभाजित होता हो, उसमें फरवरी 29 दिन का होगा लेकिन अगर 4 से विभाजित साल 100 से भी विभाजित होता है तो उसमें फरवरी 28 दिन का ही होगा.

ईसा पूर्व 46 में जूलियस सीजर द्वारा लाए गए जूलियन कैलेंडर में लीप वर्ष की व्यवस्था की गई थी.


इसके ऊपर गिग्लियो ने ये भी कहा कि 4 और 100 से विभाजित होने वाला वर्ष यदि 400 से भी विभाजित होता है तो उसे लीप वर्ष माना जाए. आखिरकार वर्ष 1700, 1800 और 1900 को जहां सामान्य वर्ष माना गया, वहीं 2000 को लीप वर्ष माना गया.

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शताब्दी लीप वर्ष क्यों नहीं होती
शताब्दी साल लीप वर्ष नहीं होते क्योंकि हर चार साल में एक दिन जोड़कर हम सौ साल के काल में काफी ज्यादा जोड़ देते हैं. वास्तव में पृथ्वी सूर्य की प्रक्रिमा 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 45 सेकंड में पूरी करता है तो जब हर चार साल में एक दिन जोड़ा जाता है तब हम एक छोटे से अंतर से अधिक सही संशोधन करते हैं. इसलिए हर 100वें साल पर हम एक दिन साल में से हटा देते हैं. इसी कारण शताब्दी साल जैसे 1700, 1800, 1900, 2100 शताब्दी साल लीप साल नहीं माने जाते.

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First published: February 16, 2020, 6:18 AM IST
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