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Sunday Special : Lockdown में खुला नशे से बाहर आने का रास्ता, कितने तैयार हैं हम ?

News18Hindi
Updated: April 5, 2020, 1:12 PM IST
Sunday Special : Lockdown में खुला नशे से बाहर आने का रास्ता, कितने तैयार हैं हम ?
धूम्रपान या नशा, रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर डालlता है.

लॉकडाउन में नशा करने वाले लोगों के मन बैचेन जरूर होंगे, लेकिन उन्हें संयम बरतने की आवश्यकता है. इस स्थिति में लोग कैसे नशे से छुटकारा पा सकते हैं आइए जानते हैं.

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कोरोना लॉकडाउन (Corona Lockdown) के कारण देश के सभी शॉपिंग मॉल, दुकानें और बाजार बंद हैं. लॉकडाउन में लोग अपने-अपने घरों में ही रहे हैं और परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं. वहीं, ये मौका उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय से नशे से दूरी बनाने की चाह रख रहे थे. नशा चाहे बीड़ी-सिगरेट का हो, शराब या फिर हर वक्त मुंह में तंबाकू रखने का. लॉकडाउन के कारण शराब की दुकानों पर ताला लगा हुआ है. गली-कूचों की कुछ खास दुकानों पर बीड़ी-सिगरेट, गुटखा, तंबाकू जैसे उत्पाद मिल तो रहे हैं कि लेकिन दो से तीन गुणा ज्यादा भाव पर. लॉकडाउन में नशा करने वाले लोगों के मन बैचेन जरूर होंगे, लेकिन उन्हें संयम बरतने की आवश्यकता है. इस स्थिति में लोग कैसे नशे से छुटकारा पा सकते हैं आइए जानते हैं.

प्राइवेट अस्पताल की डॉक्टर आशिमा का कहना है, किसी भी नशे की आदात इतनी आसानी से खत्म नहीं होती है. नशे को छोड़ने के लिए अगर, सही मेडिकेशन न लिया जाए तो यह परेशानी का सबब बन सकती है. नशा छोड़ने की शुरुआत में आपको हमेशा क्रेविंग सी रहेगी. हो सकता है कुछ वक्त के लिए इंसान की समझने की क्षमता कम हो जाए.

शुरुआत में हो सकती है ये परेशानियां



डॉक्टर आशिमा का कहना है कि जो लोग पूरी तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट के जरिए नशे को नहीं छोड़ते हैं उन्हीं शुरुआत में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. जैसेः नींद न आना, झुंझलाहट, बिना बात गुस्सा. इसके साथ ही कुछ गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं. नशा छोड़ने की शुरुआत में डायट पर भी इफेक्ट पड़ सकता है.



मन को करना होगा मजबूत

वहीं, एक निजी अस्पताल के डॉक्टर आर.के बंसल का कहना है कि उनके पास जितने लोग उनके पास आते हैं उनमें से 90 फीसदी नशे को अलविदा कहना ही नहीं चाहते हैं. आर.के बंसल का कहना है लॉकडाउन के बीच जिन लोगों ने 7 से 8 दिन बिना नशे के बिता लिए अब उन्हें इसकी आदत से छुटकारा मिल सकता है. नशा छोड़ना इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है. जो इंसान अगर, एक बार ये सोच ले कि उसे नशा छोड़ना है तो वो हर हालात में इससे छुटकारा पा सकता है.

इन टिप्स को कर सकते हैं फॉलो

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों को मौजूदा हालातों के बीच नशे की लत से छुटकारा पाना चाहते हैं वो खुद को जितना ज्यादा हो सके परिवार के साथ या अन्य कामों में बिजी रखें. पर्याप्त मात्रा में खाना खाएं और भरपूर नींद लें. घर या दोस्त लोग नशे के शिकार लोगों को मोटिवेट कर सकते हैं कि उन्होंने लॉकडाउन में नशे को अलविदा कह दिया तो आगे भी न करके इससे मुक्ति पा सकते हैं.

ई-काउसलिंग का ले सकते हैं सहारा

जिन लोगों को लॉकडाउन के दौरान नशे को अलविदा कहना है और वह किसी डॉक्टर से सलाह नहीं ले पा रहे हैं. ऐसे में वो ई-काउसलिंग का ऑप्शन चूज कर सकते हैं. वर्तमान में कई ऐसे अस्पताल हैं जो चैट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नशे को कैसे अलविदा कहा जाए इसके लिए सलाह दे रहे हैं.

समझें नशे के नुकसान

- नशा करने से शरीर को कई तरह के नुकसान होते हैं. मादक पदार्थ इंसान के शरीर के कई हिस्सों जैसे ही दिमाग और किडनी पर गंभीर असर डालते हैं.

- नशा करने वाला व्‍यक्‍ति हमेशा चिढ़ा हुआ और मानसिक तौर पर परेशान रहता है.

- नशा करने वाला व्‍यक्‍ति सदैव अपने ख्‍यालों में ही रहता है. ऐसे लोगों को अपने आसपास की चीजों से बहुत कम मतलब होता है.

- नशा करने वाला व्‍यक्‍ति आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक सभी से कमजोर होता है.

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक शराब, अवैध ड्रग्स सहित ऐसे तमाम नुकसानदेह, खतरनाक उत्तेजना पैदा करने वाले (साइकोएक्टिव) पदार्थों का लगातार सेवन.

- साइकोएक्टिव पदार्थ हमारे केंद्रीय नर्वस सिस्टम पर ही हमला बोलते हैं और एक तय समय में इंसान के दिमाग के कामकाज के तरीके बदल जाते हैं.

- नशा करने से शरीर के लीवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

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First published: April 5, 2020, 12:59 PM IST
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