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स्वाद का सफ़रनामा: आंखों की रोशनी बेहतर कर डाइजेशन सुधारती है काली गाजर, जानें रोचक इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा (Swad ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा (Swad ka Safarnama).

Swad ka Safarnama: सर्दियों के मौसम में लाल गाजर का स्वाद तो सभी ने लिया होगा लेकिन क्या कभी काली गाजर का जायका लिया है ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

नवीं सदी में अफगानिस्तान में काली गाजर उगना शुरू हुई थी.
काली गाजर से बनी कांजी पेट का पाचन सिस्टम सुधार देती है.
नर्वस सिस्टम को भी फिट रखता है काली गाजर का सेवन.

Swad ka Safarnama: सर्दियां आते ही गाजर की भी बहार आ जाती है. कटे टमाटर, मूली के साथ इसका संगम स्वास्थ्य के लिए हितकारी है. अगर चाहें तो पूरी गाजर में चीरा लगा, उसमें चाट मसाला और नींबू छिड़कर खाने का मजा ही और है. अब जल्द ही काली गाजर भी नजर आने लगेगी. इसी गाजर से कांजी बनती है और ये भारत का विशेष पेय पदार्थ है. काली गाजर गुणों में भी शानदार है. यह अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) को दूर रखती है और शरीर का पाचन सिस्टम भी फिट बनाए रखती है. इस गाजर की विशेषता यह है कि शुगर रोगी इसे बेहिचक खा सकते हैं. सामान्य गाजर का इतिहास हजारों साल पुराना है. काली गाजर उसके बाद पैदा हुई है.

काली गाजर पेट के लिए शानदार

सामान्य गाजर से स्वादिष्ट सलाद बनता तो है ही, इसे सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. आलू-गाजर-मेथी की सब्जी तो पूरे भारत मे मशहूर है. वैसे तो काली गाजर को भी सलाद के रूप में खाया जा सकता है, लेकिन इसका स्वाद लाल गाजर से अलग हल्का सा कसैलापन भी लिए होता है. इसमें गजब रंग छूटता है. काटकर खाएंगे तो यह हाथ पर तो रंग छोड़ ही देगी, जुबान को भी काला कर देगी. लेकिन इस काली गाजर की बनी कांजी तो बेजोड़ है. अलग ही तरह का खट्टा व चरपरा स्वाद शायद ही किसी पेय पदार्थ में मिले.

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काली गाजर की कांजी पेट का पाचन सिस्टम सुधार देती है और कब्ज से राहत दिलाती है. Image-Canva

काली गाजर को काटकर उसे मर्तबान में पानी भरकर, साथ में पिसी राई, नमक, लाल मिर्च डालकर इसे कुछ दिन धूप में छोड़ दिया जाता है. उसके बाद जो काले रंग की कांजी बनती है, वह स्वाद में तो बेजोड़ है ही, साथ ही पेट के लिए भी लाभकारी है. यह कांजी पेट का पाचन सिस्टम सुधार देती है और कब्ज से राहत दिलाती है.

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लाल गाजर भारत की, काली गाजर अफगान से आई

अगर सामान्य गाजर की बात करें तो कहा जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व यह जंगलों में उगती थी. उसके बाद इसकी खेती शुरू हुई. गाजर की उत्पत्ति अलग-अलग स्थानों पर मानी जाती है. भारतीय-अमेरिकी वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी का मानना है कि इसकी उत्पत्ति का केंद्र सेंट्रल एशियाटिक सेंटर है, जिसमें उत्तर पश्चिमी भारत के अलावा ईरान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान आते हैं. दूसरी ओर लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘VEGETABLES’ में जानकारी दी है कि गाजर का मूल उत्पत्ति स्थल पंजाब व कश्मीर की पहाड़ियां हैं. जहां के कुछ इलाकों में आज भी इसकी जंगली नस्लें उगाई जाती हैं.

वैसे यह कन्फर्म है कि एक हजार ईसा पूर्व भारत में गाजर उगाई और खाई जा रही थी, उसका कारण है कि उस काल में लिखे आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में गाजर की विशेषताओं का वर्णन है. नांरगी गाजर कब काली हो गई, इसको लेकर कई दावे हैं. लेकिन अधिकतर फूड हिस्टोरियन मानते हैं कि नवीं सदी में अफगानिस्तान में काली गाजर उगना शुरू हुई थी.

इसका सेवन मोटापे को दूर रखता है

काली गाजर गुणों से भरपूर है. यह शरीर के लिए लाभदायक तो है ही, कई सामान्य बीमारियों से भी बचाव करती है. पोषक तत्वों की बात करें तो आधा कप कच्ची काली गाजर में कैलोरी 40, कुल फैट 0.2 ग्राम, सोडियम 69 मिलीग्राम, आयरन 0.30 मिलीग्राम, चीनी 4.7 ग्राम, कैल्शियम 33 मिलीग्राम, कार्बोहाइड्रेट 9.6 ग्राम, फाइबर 2.8 ग्राम, पोटेशियम 320 मिलीग्राम, प्रोटीन 0.9 ग्राम के अलावा कॉपर, विटामिन ए, विटामिन सी आदि पाए जाते हैं. जानी-मानी डायटिशियन डॉ. अनिता लांबा के अनुसार गाजर में पाए जाने वाले विशेष तत्व अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) को दूर रखते हैं. चूंकि इसमें घुलनशील फाइबर है, इसलिए इसे पाचन सिस्टम के लिए भी लाभकारी माना जाता है.

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काली गाजर पुरानी बीमारियों जैसे गठिया ओर जोड़ों के दर्द से आराम दिलाने में मददगार हैं. Image-Canva

यह ठोस होती है, लेकिन अंदर से मुलायम, इसलिए सामान्य मात्रा में खाए जाने पर पेट भरा-भरा सा कर देती हैं चूंकि इसमें न के बराबर फैट है, इसलिए यह मोटापा भी नहीं बढ़ने देती. काली गाजर में मौजूद कुछ सक्रिय तत्वों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं, साथ ही एंटीऑक्सिडेंट क्षमताएं भी होती हैं, जो पुरानी बीमारियों जैसे गठिया ओर जोड़ों के दर्द से आराम दिलाने में मददगार हैं.

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आंखों की रोशनी के लिए भी बेहतर मानी जाती है

डॉ. अनिता नागपाल के अनुसार गाजर लंबे समय से अपने बीटा-कैरोटीन (आंखों के लिए लाभकारी विटामिन) की आपूर्ति के लिए जानी जाती है. इसका सेवन आंखों की रोशनी को बेहतर बनए रखता है. यह मोतियाबिंद के विकास को भी धीमा कर सकता है. माना जाता है कि काली गाजर में कैंसर से बचाव के गुण हैं, लेकिन इस पर अभी शोध की जरूरत है. काली गाजर का रस सुबह एंटीऑक्सीडेंट को तुरंत बढ़ा देता है. यही एंटीऑक्सीडेंट ब्लड में थक्का बनने से रोकता है और प्लेटलेट को बढ़ाता है. यह बेड कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ने नहीं देता. यह सभी कारण हृदय के सिस्टम को लाभ पहुंचाते हैं. इसका सेवन नर्वस सिस्टम को भी फिट रखता है. काली गाजर के सेवन का कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन अधिक खाए जाने पर पेट फुला देती है. काली गाजर की कांजी का अधिक सेवन लूजमोशन की समस्या खड़ी कर सकता है.

Tags: Food, Lifestyle

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