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स्वाद का सफ़रनामा: मसाला, माउथ फ्रेशनर में उपयोग होने वाली इलायची में हैं औषधीय गुण, हजारों साल पुराना है इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा.

स्वाद का सफ़रनामा.

Swad Ka Safarnama: लगभग सभी घरों में इलायची की मसाले के तौर पर उपयोग किया जाता है. माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इसका काफी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

इलायची से अनेक आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जा रही हैं.
हरी इलायची को अदरक परिवार का माना जाता है.
इलायची का सेवन दांतों के लिए बेहद फायदेमंद होता है.

Swad Ka Safarnama: भारत में ‘कौन है ऐसा, जो इलायची को न जाने.’ देश की रसोई के अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों में भी इलायची का उपयोग हजारों वर्षों से चला आ रहा है. माउथ फ्रेशनर (मुखशुद्धि) और पकवानों को सुगंधित करने के लिए तो इसका उपयोग किया ही जाता है, बल्कि इसे एक अच्छी औषधि भी माना गया है जो वात-पित्त को रोकने के अलावा, श्वास समस्या व अन्य समस्याओं में लाभ पहुंचाती है. इसका उत्पत्ति क्षेत्र हजारों वर्ष पूर्व दक्षिण भारत माना गया है.

मसालों की रानी है हरी इलायची

मसाला प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले व भारत की एग्मार्क लेब के संस्थापक निदेशक जीवन सिंह प्रुथी ने अपनी पुस्तक ‘Spcices And Condiments’ में हरी इलायची को ‘मसालों की रानी’ बताया है. उनका कहना है कि केसर, वेनिला के बाद हरी इलायची विश्व का सबसे महंगा मसाला है. दूसरी ओर वेद-पुराणों में तो धार्मिक कार्यों के रूप में इसका वर्णन किया गया है, साथ ही भारतीय तीज-त्योहारों में भी यह काम आती है तो खीर और हलवे जैसे मिष्ठान्न का स्वाद इसी से उभरता है. विवाह और अन्य आयोजनों में मेहमानों का इलायची या लौंग-इलायची के पान से स्वागत करना शुभ माना जाता है.

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इलायची से अनेक आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जा रही हैं.

प्राचीन युग में हरी इलायची एक ऐसा पदार्था था, जिसे राजा-रजवाड़े अपनी राजनीतिक यात्राओं के दौरान अन्य राजाओं को सम्मान के तौर पर भेंट किया करते थे. हरी इलायची का अदरक परिवार का माना जाता है. विशेष बात यह है कि इत्र और सुगंधित तेलों के निर्माण में यह एक मुख्य घटक रही है. कभी वह समय भी था जब भारत की हरी इलायची पूरी दुनिया में भेजी जाती थी, लेकिन अब मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला की तोतिया हरे रंग की खूबसूरत इलायची से भारत को कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है.

दक्षिण भारत से निकलकर पूरी दुनिया में खुशबू बिखेरी

हरी इलायची का उत्पत्ति स्थल दक्षिण भारत माना गया है. इसका उपयोग करीब 4 हजार वर्ष से किया जा रहा है. प्राचीन भारतीय ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इसके गुणों का वर्णन तो है ही कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्रम्’ में इसे ‘दक्षिण पश्चिम पहाड़ों में पेरियार नदी के तट पर पाया जाने वाला हरा मोती’ कहा है. भारतीय इलायची के औषधिय गुणों का उल्लेख यूनानी विद्वान व आधुनिक चिकित्सा के जनक हिप्पोक्रेट्स (ईसा पूर्व 460 शती) के लेखन में भी मिलता है. उन्होंने इलायची को पाचन के लिए बेहद उपयोगी बताया है. प्राचीन समयकाल में शक्तिशाली रोमन लोग भी भारतीय इलायची का उपयोग अपने व्यंजनों और उपचार के लिए करते थे.

विश्वकोष Britanica के अनुसार ज्यादातर इलायची की खेती भारत, श्रीलंका और ग्वाटेमाला में की जाती है. माना यह भी जाता है कि हरी इलायची भारतीय उपमहाद्वीप और इंडोनेशिया की मूल निवासी हैं. मिस्र के पिरामिड युग भी इसका उपयोग किया जा रहा था. वहां एक औषधीय घटक के अलावा ममीकरण प्रक्रिया के लिए प्रयोग किए जाने वाले तेलों में भी इसके तेल का उपयोग किया गया. हरी इलायची भारत से चलकर अरब के रास्ते रोमन और यूनानियों तक पहुंची.

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श्वास और मुंह के लिए काफी लाभकारी है

हरी इलायची भी भारत के उन प्राचीन मसालों में से एक है, जिसके औषधिय गुणों के चलते प्राचीन ऋषि-मुनियों व आयुर्वेदाचार्यों ने इसे रसोई में पहुंचा दिया. भारत के सभी प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में हरी इलायची को पाचनवर्धक, रुचिवर्धक तो माना ही है, साथ ही इसे शीतल, तीक्ष्ण, मुख को शुद्ध करनेवाली, पित्त व वात को रोकने वाली, श्वास, खांसी, क्षयरोग, पथरी, खुजली और हृदयरोग में भी लाभकारी माना है. इलायची से अनेक आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाई जा रही हैं. आयुर्वेद यह भी कहता है कि इलायची फेफड़ों में रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और अस्थमा को ठीक करने में मदद करती है. कम मात्रा में ली गई इलायची श्वसन संबंधी एलर्जी के इलाज में कारगर है. यह शरीर को गर्म रखती है और खांसी, जुकाम और सिरदर्द का भी निवारण करती है.

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संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी है हरी इलायची

जाने-माने आयुर्वेदाचार्य और सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रमुख आरपी पराशर के अनुसार हरी इलायची फाइटोकेमिकल्स (कीटाणुओं, फंगस से बचाव वाला तत्व) से भरपूर मानी जाती है, इसलिए दांत व मसूड़ों के संक्रमण, गले की समस्याओं, पाचन विकारों के इलाज में यह लाभकारी है. इलायची में एक घटक मेथनॉलिक (प्रतिरोधी) अर्क भी होता है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे अम्लता, पेट फूलना, अपच और पेट दर्द को कम करने में मदद करती है. यह ब्लड प्रेशर को भी नॉर्मल बनाए रखती है. इलायची एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक है जो सांसों की दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारने में भूमिका अदा करती है.

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इलायची को खाने से ब्रीथिंग संबंधी समस्या आ रही है तो इसका सेवन न करें.

इसे चबाने से दांत चमकदार रहते हैं और उनमें सड़न का खतरा कम हो जाता है. इसमें एक गुण यह भी है कि यह किडनी के माध्यम से शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर उसे यूरिन सिस्टम से बाहर निकालने में प्रभावी मददगार है. यानी यह शरीर को डिटॉक्सीफाई भी करती है. वैसे यह पाया गया है कि इलाचयी का लंबे समय से लगातार सेवन किया जाए तो स्किन में एलर्जी की संभावना बन सकती है. अगर इलायची को खाने से ब्रीथिंग संबंधी समस्या आ रही है तो इसका सेवन न करें.

Tags: Food, Lifestyle

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