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स्वाद का सफ़रनामा: फूलगोभी को भारी-भरकम फूल मानकर लोग करते थे रिजेक्ट, पढ़ें विदेशी सब्जी की खासियत

फूलगोभी भारत मूल की नहीं है, लेकिन इसके विदेशी रूट एक से ज्यादा माने जाते हैं.

फूलगोभी भारत मूल की नहीं है, लेकिन इसके विदेशी रूट एक से ज्यादा माने जाते हैं.

Swad Ka Safarnama: फूलगोभी बहुत गुणकारी सब्जी है, जो एंटिऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. आजकल फूलगोभी पूरे साल उपलब्ध रहती ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भारत में फूलगोभी का प्रवेश मात्र 200 वर्ष पुराना है.
फूलगोभी भारत मूल की नहीं है, लेकिन इसके विदेशी रूट एक से ज्यादा माने जाते हैं.
इसमें मौजूद फाइबर पाचन सिस्टम ठीक रखता है, मोटापा कम करता है.

Cauliflower History and Benefits: भारतीय लोगों के आहार में फूलगोभी का विशेष महत्व है. मसाला गोभी, आलू-गोभी-मटर की सब्जी तो स्वाद में लाजवाब है ही, गोभी और गोश्त का संगम भी नॉनवेज खाने वालों को खूब लुभाता है. फूलगोभी बहुत गुणकारी सब्जी है, जो एंटिऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. इसमें पाए जाने वाले विशेष तत्व शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की बाधकता को खत्म करते हैं और उनमें रक्त संचारण को सुचारू रखते हैं. हैरानी की बात यह है कि गोभी का भारत में प्रवेश बस ‘आज-कल’ जैसा ही है, लेकिन इसने भारतीय आहार में विशेष पहचान बना ली है.

भारी-भरकम फूल मानकर लोगों ने किया था रिजेक्ट

आजकल फूलगोभी पूरे साल उपलब्ध रहती है वरना कुछ साल पहले तक यह सर्दियों के सीजन में ही दिखाई देती थी. अब तो सफेद रंग के अलावा देश-विदेश में अन्य कलर जैसे नारंगी, बैंगनी, हरे और भूरे रंग की गोभी भी नजर आने लगी हैं. विशेष बात यह है कि इन गोभियों में पारंपरिक सफेद रंग की फूलगोभी से ज्यादा विटामिन्स व मिनरल्स मिल रहे हैं. वनस्पति विज्ञान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जब गोभी इस दुनिया में आई तो लोगों ने इसे अजीबो-गरीब भारी फूल मानते हुए रिजेक्ट कर दिया, लेकिन जब उनके जानवर बेहद रुचि से इसे संतुष्ट नजर आए तो लोगों ने भी इसका स्वाद चखा और वनों से निकालकर इसकी खेती शुरू कर दी. आज लोग इसके गुणों की बजाय स्वाद पर मोहित हैं. सूखी गोभी की मसालेदार सब्जी, गोभी मन्चूरियन, सूप में गोभी, नॉनवेज में गोभी, गोभी का अचार इसका स्वाद और बढ़ा रहा है.

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गोभियों में पारंपरिक सफेद रंग की फूलगोभी से ज्यादा विटामिन्स व मिनरल्स मिल रहे हैं.

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फूलगोभी की उत्पत्ति के एक से अधिक रूट

फूलगोभी भारत मूल की नहीं है, लेकिन इसके विदेशी रूट एक से ज्यादा माने जाते हैं. ‘VEGETABLES’ पुस्तक के लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी के अनुसार, जंगली गोभी सबसे पहले इंग्लैंड के समुद्री तटों के पास चट्टानों पर उगी, फिर ये उत्तर-पश्चिम फ्रांस में अपने आप उगती दिखाई दी. इसके जंगली फूलों को सबसे पहले साइप्रस वाले भूमध्यीय सागर इलाके में खेती के लिए उपयोग में लाया गया. वनस्पति विज्ञान से जुड़ी कुछ वेबसाइट भी मानती हैं कि इसका उत्त्पति स्थल साइप्रस व इटली का भूमध्यसागरीय क्षेत्र है और यह इलाका काफी लंबा-चौड़ा है. दूसरी ओर भारतीय अमेरिकी वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी के अनुसार, गोभी का एक उत्पत्ति स्थल मेडिटेरियन सेंटर है, जिसमें अल्जीरिया, क्रोएशिया, साइप्रस, मिस्र, इजरायल, इटली, लेबनान, मोरक्को, तुर्की आदि शामिल हैं. वह यह भी मानती हैं कि चीन और दक्षिण पूर्व एशिया गोभी का मूल उत्पत्ति केंद्र है.

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फूलगोभी भारत मूल की नहीं है, लेकिन इसके विदेशी रूट एक से ज्यादा माने जाते हैं.

200 साल पहले ही भारत में हुआ इसका प्रवेश

अपने मूल निवास से फूलगोभी का आगे का सफर धीमा रहा. माना जाता है कि पहली शताब्दी ईसा में पैदा हुई गोभी का प्रामाणिक वर्णन 12-13 शताब्दी में लिखी गई अरबी पुस्तकों में मिलता है. लगभग 1500 ईस्वी में यह पूरे यूरोप में खाई और उगाई जाने लगी. ऐसी जानकारी है कि 1900 के दशक तक यह अमेरिका में नहीं पहुंच पाई थी. भारत में फूलगोभी का प्रवेश मात्र 200 वर्ष पुराना है. असल में गुलामी के दौर में वर्ष 1822 में लंदन के क्यू गार्डन के वनस्पतिशास्त्री डॉ. जेमिसन भारत आए. उन्हें यूपी स्थित सहारनपुर के विशाल बगीचों के देखभाल की जिम्मेदारी मिली. वे अपने साथ कई बीज आदि लेकर आए थे. जब सर्दियों में उन्हें भारत का मौसम इंग्लैंड जैसा लगा तो उन्हें गोभी की खेती की और वह सफल हुए. उसके बाद गोभी ने भारत में पीछे मुड़कर नहीं देखा और पूरे देश की पसंदीदा सब्जियों में से एक हो गई.

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भारत में फूलगोभी का प्रवेश मात्र 200 वर्ष पुराना है.

बीमारियों से बचाए, विषाणुओं से करे रक्षा

यह विदेशी सब्जी स्वाद के साथ-साथ गुणों में शानदार है. डॉ. बिश्वजीत चौधरी के अनुसार, 100 ग्राम गोभी में नमी करीब 90 ग्राम, कैलोरी 30, वसा 0.4 ग्राम, सोडियम 53 मिग्रा, कार्बोहाइड्रेट 4 ग्राम, फाइबर 1.2 ग्राम, प्रोटीन 2.8 ग्राम, विटामिन सी 58 मिलीग्राम, मैग्नीशियम 16 मिग्रा, पोटैशियम 138 मिलीग्राम व अन्य तत्व शामिल हैं. इसमें वसा बहुत कम है, इसलिए यह केलोस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखती है. इसमें प्रोटीन भी कम है, कैलोरी की मात्रा भी अधिक नहीं है, इसलिए शरीर के लिए लाभकारी है. इसमें पाए जाने वाले विशेष पौषक तत्व एंटीऑक्सीडेंट से भरे हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाते हैं और विषाणुओं से शरीर की रक्षा करते हैं. इसका सेवन रक्त वाहिकाओं को सुचारू बनाए रखता है, जिससे शरीर में ब्लड का प्रवाह सामान्य रहता है. यह हृदय के लिए भी लाभकारी होती है.

ज्यादा खाने से हो सकते हैं नुकसान

आहार विशेषज्ञ व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार, फूलगोभी में विटामिन सी की मात्रा ठीक-ठाक है, इसलिए सर्दियों में यह कोलेजन (प्रोटीन का विशेष समूह) पैदा करती है, जो हड्डियों और जोड़ों के लिए बेहद लाभकारी है. इसके सेवन से मोटापा इसलिए नहीं बढ़ता, क्योंकि इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है. और तो और, इसमें पाया जाने वाला फाइबर पाचन सिस्टम ठीक रखता है और मोटापा कम कर सकता है. यह नर्वस सिस्टम को भी मजबूत रखती है और शरीर के अंदर मौजूद विषैले तत्वों को भी निकाल बाहर कर देती है. अगर आप इसके साथ रोटी, ब्रेड, राइस न भी खाएं तो भी यह आपका पेट भर देगी और संतुष्ट कर देगी. हालांकि, फूलगोभी का अधिक सेवन पेट फुला देता है. गोभी बनाते समय अधिक मसालों का उपयोग न करें वरना पेट व छाती में जलन हो सकती है. बनाते वक्त इसमें अदरक-लहसुन पर्याप्त मात्रा में डालें, ऐसा करने से पेट मे गैस नहीं बनेगी.

Tags: Food, Lifestyle

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