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स्वाद का सफ़रनामा: गुणों से भरपूर बेर दिल के लिए है फायदेमंद, हजारों साल पुराना है इस फल का इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

Swad Ka Safarnama: हर किसी ने अपनी जिंदगी में बेर का स्वाद कभी न कभी लिया होगा. छोटा सा दिखने वाला ये फल गुणों के मामले ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बेर का अर्क मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों के दर्द में राहत देता है.
दुनिया में बेर की कई किस्में हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही खाई जा रही हैं.
आयुर्वेद ने बेर को औषधि माना है और कई बीमारियों में उपयोग बताया है.

Swad Ka Safarnama: बेर फल देखने में तो छोटा है, लेकिन गुणों में किसी से कम नहीं है. यह एक पौष्टिक और स्वादिष्ट फल हैं, जिसकी कई किस्में हैं. इसका सेवन शरीर को रोगों से बचाता है और दिल की गतिविधियों को भी सुचारू बनाए रखता है. दुनिया में यह हजारों सालों से उग रहा है और भारत में इसकी एक विशेष पहचान है. ‘शबरी के बेर’ प्रकरण तो हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए है. आयुर्वेद ने बेर को औषधि भी माना है.

प्रेम और भक्ति का प्रतीक है ‘शबरी के बेर’

भारत में बेर (Indian Jujube) की एक अलग ही पहचान है. आज भी देश के किसी छोटे शहर या कस्बे के किसी स्कूल के बाहर का नजारा देखेंगे तो वहां रेहड़ी या छाबे (बड़ी टोकरी) पर किसी व्यक्ति को बेर, अमरख और शकरकंदी बेचते हुए जरूर पाएंगे. यह एक अजीब सा कॉम्बिनेशन है लेकिन सैंकड़ों वर्षो से नजर आ रहा है. इस बात की पूरी संभावना है कि प्राचीन समय में गुरुकुल के बाहर भी यही फल बिकते हों. बेर भगवान शिव का प्रिय फल है. फरवरी में जब शिवरात्रि का पर्व आता है तो शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले फलों में बेर अवश्य होता है. ‘शबरी के बेर’ का आख्यान तो भारत ही नहीं पूरे विश्व में जाना जाता है.

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भारत में बेर की कई किस्में हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही खाई जाती हैं. Image-Canva

वाल्मीकि की रामायण समेत भारत के कई धार्मिक ग्रंथों में इस प्रसंग का वर्णन है जब माता सीता को तलाशते हुए भगवान राम और लक्ष्मण को शबरी मिलती हैं और वह इस आशय से खुद चखकर बेर राम को खिलाती हैं कि वह खट्टे बेर न खा लें. इस प्रकरण को प्रेम और भक्ति का संगम माना गया है. इसका एक अर्थ यह भी है कि भारत में बेर हजारों वर्ष पूर्व पैदा हो गया था. आज भारत में बेर की कई किस्में हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही खाई जाती हैं.

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चीन में पैदा हुआ और पूरी दुनिया में फैला

दूसरी ओर फूड हिस्टोरियन की मानें तो बेर की उत्पत्ति करीब 4000 वर्ष पूर्व चीन में हुई थी. विश्वकोश ब्रिटेनिका (Britannica) के अनुसार अधिकांश आम बेर चीन के मूल निवासी हैं, जहां उनकी खेती 4,000 से अधिक वर्षों से की जाती रही है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि विज्ञानी प्रो़ रंजीत सिंह व प्रो़ एसके सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘Fruits’ में कहा गया है कि बेर का उत्पत्ति केंद्र चीन है. वैसे कहा यह भी जाता है कि चीन के समानांतर भारत में भी बेर उत्पन्न हो चुका था. कहा यह भी जाता है कि बेर अफगानिस्तान, मलेशिया, लेबनान, ईरान, क्वींसलैंड और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों का मूल निवासी है.

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बेर को आयुर्वेद ने औषधि माना है और कई बीमारियों में इसका उपयोग भी बताया गया है. Image-Canva

एक अन्य विश्वकोश The Encyclopedia of Fruit & Nuts के अनुसार बेर चीन से ईरान, आर्मेनिया, सीरिया और भूमध्यसागरीय भागों में लाए गए थे. अमेरिका में उनका आगमन बहुत बाद में 1837 में हुआ था. माना यह भी जाता है कि बेर की किस्मों को बेहतर बनाने के लिए चीन ने काफी मेहनत की है. पूरी दुनिया में बेर की कई किस्में हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही खाई जा रही हैं.

आयुर्वेद ने बेर को औषधि भी माना है

स्वाद में कुछ अलग और गुणों में खासा शानदार है बेर. विशेष बात यह है कि आयुर्वेद ने इस औषधि माना है और कई बीमारियों में इसका उपयोग भी बताया गया है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार पौष्टिक तत्वों की बात करें तो 50 ग्राम बेर में 140 कैलोरी, 36 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2 ग्राम प्रोटीन, 3 ग्राम फाइबर, 15 मिलीग्राम मैंगनीज, 109 मिलीग्राम विटामिन सी, 2.5 मिलीग्राम लोहा, 0.1 मिलीग्राम कॉपर, 34 मिलीग्राम फास्फोरस, 108 मिलीग्राम पोटेशियम के अलावा अन्य विटामिन्स व मिनरल्स पाए जाते हैं. इसमें कई एसिड भी होते हैं जो शरीर के लिए बेहद उपयोगी हैं.

फलों, सब्जियों व जड़ी-बूटियों पर वर्षों से रिसर्च कर रहे जाने-माने योग गुरु व आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण का कहना है कि बेर के गुणों के आधार पर आयुर्वेद में इसको कई तरह के बीमारियों के लिए औषधि के लिए प्रयोग किया जाता है. आयुर्वेद ग्रंथ चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता सहित कई निघंटुओं में इसका वर्णन है. बेर के फल के साथ इसकी पत्तियों को भी गुणकारी माना गया है. बालकृष्ण के अनुसार सिरदर्द, नकसीर, मुंह के छाले, दस्त, उल्टी, पाइल्स, जैसी कई बीमारियों में बेर और इसकी पत्तियां उपयोगी हैं. इसके अलावा बेर सांस संबंधी समस्या, खांसी, प्यास, जलन, नेत्ररोग, बुखार, सूजन, रक्तदोष, कब्ज तथा अपच में भी लाभकारी माना गया है.

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बेर दिल के लिए है गुणकारी

दूसरी ओर ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ चरकसंहिता में बेर को फल की श्रेणी में रखा गया है. इसे बदरम् कहा गया है. ग्रंथ के अनुसार बेर मधुर, स्निग्ध, पेट साफ करने वाला और वात-पित्त को जीतने वाला है. ग्रंथ में सूखे बेर को भी शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. सोनीपत स्थित सरकारी विश्वविद्यालय भगतफूल सिंह के आयुर्वेद विभाग की प्रमुख प्रो. वीना शर्मा के अनुसार बेर में कई गुण हैं और विटामिन्स व मिनरल्स भी. यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाता है. इसमें पाए जाने वाला विटामिन सी व हलका सा कषैला स्वाद दिल के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें पाए जाने वाला पोटेशियम शरीर की रक्त वाहिकाओं को आराम देता है और रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसमें भूख बढ़ाने के भी गुण पाए जाते हें. कब्ज के लिए भी बेर का सेवन लाभकारी है.

रक्त की विषाक्तता कम कर देता है बेर

बेर का अर्क भी खासा उपयोगी है. यह मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है. बेर के बीज के तेल में जलनरोधी गुण पाए गए है. आयुर्वेद का यह भी मानना है कि परंपरागत रूप से, बेर का उपयोग तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों का इलाज कर सकता है. इस फल का मन और शरीर पर शांत प्रभाव पड़ता है. इसमें फास्फोरस भी है जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में सहायक है. बेर में फाइबर होता है जो पाचन को नियंत्रित करने में मदद करता है. यह ब्लड में विषाक्तता को भी कम करने में मदद करता है. इसका सेवन मुंहासों और शरीर में होने वाले धब्बों को कम कर सकता है. सामान्य तौर पर बेर का सेवन कोई नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन इसे अधिक खाने से मुंह कषैला हो जाएगा, लूज मोशन की भी संभावना है. जिन लोगों का शुगर बहुत अधिक बढ़ा हुआ है, उन्हें बेर से परहेज करना चाहिए.

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