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स्वाद का सफ़रनामा: दिल को दुरुस्त रख उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी करता है सुपर फूड 'मखाना', जानें इसका इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा( Swad Ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा( Swad Ka Safarnama).

Swad Ka Safarnama: ड्राई फ्रूट्स मं शामिल मखाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. दिल के लिए भी मखाना को काफी लाभकारी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

मखाना दिल के रोगों से जुड़े जोखिम को कम कर देता है.
मखाना अब दुनिया में सुपरफूड के रूप में माना जाने लगा है.
मखाना पेट का पाचन सिस्टम बेहद दुरुस्त रखता है.

Swad Ka Safarnama: मखाना बहुत ही हल्का आहार है, लेकिन यह सुपर फूड कहलाता है. शरीर के लिए गजब गुणकारी है मखाना. यह डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है. भारत में मखाने का धार्मिक महत्व भी है. यह हजारों वर्ष पुराना आहार है और देश के अलावा कुछ अन्य देशों में भी उगाया जाता है.

मखाना बनाने की प्रक्रिया है रोचक

मखाना (Fox Seed/Lotus Seed) आखिर है क्या? इसे सब्जी बनाकर भी खाया जाता है. फलों की चाट में भी यह शोभा बढ़ाता है तो स्नैक्स के रूप में भी यह मशहूर है. विशेष बात यह है कि बादाम, काजू के साथ मिलकर यह ड्राईफ्रूट्स का रूप ले लेता है. इसकी असलियत की बात करें तो यह असल में बीज है, जिसे पानी में उगे पौधे में से निकालने के बाद उसे विशेष तरीके सुखाकर, भूनकर और आखिर में पीटकर मखाना प्राप्त किया जाता है. शायद ही ऐसा कोई आहार हो जो मखाना की तरह प्राप्त किया जाता है. अब इतनी मेहनत की गई है तो सीधी सी बात है कि इसकी ‘रंगत’ भी अलग ही होगी. भारतीय संदर्भ में देखें तो मखाना आहार तो है ही, इसकी अलग विशेषताएं भी हैं.

makhana, Lotus seeds

ग्रीक पौराणिक कथाओं में भी मखाने का जिक्र मिलता है. Image-Canva

योगगुरु व आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण के अनुसार मखाना संस्कृत के दो शब्द मख व अन्न से बना है. मख का अर्थ यज्ञ होता है. अर्थात यज्ञ में प्रयुक्त होने वाला अन्न. इसे देवताओं का भोजन कहा गया है. यह पूजा व हवन में भी यह काम आता है. इसे आर्गेनिक हर्बल भी कहते हैं, क्योंकि यह बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के उपयोग के उगाया जाता है. विशेष बात यह है कि ग्रीक पौराणिक कथाओं में भी इसका वर्णन किया गया है.

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भारतीय मखाने का है धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व

माना जाता है कि मखाने का उत्पत्ति केंद्र भारत है और हजारों वर्षो से आहार व धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यों में इसका उपयोग हो रहा है. ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में इसे शरीर के लिए मधुर व रक्तपित्त नाशक बताया गया है. यह शीतल है और कफ को रोकता है. आचार्य भावमिश्र (1500-1600) द्वारा रचित आयुर्वेद व बीज, बूटियों की विशेषता बताने वाले भावप्रकाश निघंटु में इसे पद्मबीजाभ एवं पानीय फल कहा गया है. ग्रंथ के अनुसार मखाना सुपाच्य व बलवर्धक है. ग्रंथ में इसके औषधिय गुणों की भी जानकारी दी गई है. इन्हीं विशेषताओं के चलते अमेरीकन हर्बल फूड प्रोडक्ट एसोसिएशन ने इसे क्लास वन फूड का दर्जा दिया है और कहा है कि यह अतिसार, ल्यूकोरिया, सीमेन की कमी आदि में उपयोगी है. इसमें एन्टी-ऑक्सीडेंट होने से यह श्वसन तंत्र के लिए लाभप्रद है.

भारत में जितना भी मखाना पैदा होता है, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार में ही होता है. अगर विश्व के संदर्भ में देखें तो भारत में इसकी भागीदारी करीब 85 प्रतिशत है. अब मखाने का उत्पादन कोरिया, जापान के अलावा चीन, मलेशिया, बांग्लादेश में भी होता है. भारत जिन देशों को मखाने का निर्यात करता है, उनमें अमेरिका, ब्रिटेन कनाडा आदि शामिल हैं.

विशेष गुणों के कारण सुपर फूड माना जाता है

मखाना अब दुनिया में सुपरफूड के रूप में माना जाने लगा है. अब इसने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पैठ बना ली है. आज मखाना अपने कई स्वास्थ्य लाभों, पोषण, वजन घटाने में सहायता और खाना पकाने के उपयोग के लिए प्रसिद्ध हो चुका है. बीबीसी के अनुसार 100 ग्राम मखाने से 350 किलो कैलोरी एनर्जी मिलती है. इसमें फैट यानी वसा नाम मात्र का होता है, 70-80 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 9.7 ग्राम प्रोटीन होता है जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद है, 7.6 ग्राम फाइबर, 60 मिलीग्राम कैल्शियम और 40- 50 मिलीग्राम पोटेशियम मिलता है, फास्फोरस 53 मिलीग्राम भी पाया जाता है.

makhana, Lotus Seeds

भारत में जितना भी मखाना पैदा होता है, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार में ही होता है. Image-Canva

फूड एक्सपर्ट मानते हैं कि इसके अलावा मखाने में मिनरल्स के रूप में लोहा, मैग्निशयम, सोडियम, विटामिन बी1 आदि भी मौजूद है. इन्हीं पोषण तत्वों का मिश्रण मखाना को सुपर फूड का दर्जा देता है. इसकी बड़ी विशेषता यह है कि मखाना पेट का पाचन सिस्टम बेहद दुरुस्त रखता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को मंद कर देता है. इसका सेवन यूरिन से जुड़े रोगों को दूर रखता है. एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि इसका सेवन शरीर की ‘पॉवर’ में इजाफा करने में मददगार है.

दिल की बीमारियों का जोखिम कम करता है

जाने-माने मसाला ब्रांड एमडीएच के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (इनकी 98 वर्ष में मृत्यु हुई थी) से एक बार पूछा गया था कि उनकी लंबी उम्र का राज क्या है, उनका कहना है कि वह हर रोज दूध में मखाना डालकर उसका सेवन करते हैं. फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार मखाना कमोबेश अधिकतर घरों में स्नैक्स के तौर पर अपनी जगह बना चुका है. इसकी खीर तो लाजवाब है. सब्जी में भी यह अलग ही रंगत पैदा कर देता है. इसका सेवन शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है, जिससे शरीर देर तक एर्नेजेटिक महसूस करता है. यह टेंशन भी कम कर देता है और दिमाग को भी चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने में भूमिका अदा करता है. इसमें पाए गए खनिज तत्व ब्लड में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य बनाए रखते हैं. इसमें पाया जाने वाला मैग्निशियम दिल के रोगों से जुड़े जोखिम को कम कर देता है. चूंकि इसमें फैट (वसा) न के बराबर होता है, इसलिए इसका सेवन मोटापे को बढ़ने नहीं देता.

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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है मखाना

सिम्मी बब्बर के अनुसार मखाना चमत्कारिक रूप से शरीर को अनिद्रा से बचाता है और श्वसन तंत्र को भी सामान्य बनाए रखता है. यह शुगर से परेशान लोगों को भी राहत पहुंचाता है. यह लूज मोशन से भी राहत दिलाता साथ ही भूख में भी सुधार करता है. इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार है. मखाने में मौजूद कैल्शियम गठिया में भी राहत देता है. इसमें विभिन्न एंटी-ऑक्सीडेंट भी मौजूद हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करते हैं. सामान्य तौर पर मखाने से कोई साइड इफेक्ट नहीं है. लेकिन अधिक मात्रा में खाए जाने पर यह पेट फुला देता है और कब्ज की परेशानी भी पैदा कर सकता है.

Tags: Food, Food Recipe, Lifestyle

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