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स्वाद का सफ़रनामा: दुनिया का सबसे पुराना ड्राई फ्रूट है पिस्ता, इस सूखे मेवे से जुड़ी हैं बेहद रोचक बातें

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा (Swad Ka Safarnama).

Swad Ka Safarnama: ड्राई फ्रूट्स में शामिल पिस्ता सेहत के लिए बेहद लाभदायक होता है. ये ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के साथ ही ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

पिस्ता गर्म या समशीतोष्ण जलवायु में शुष्क भूमि में उगाए जाते हैं.
पिस्ता कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में अच्छा होता है.
बाइबिल में अखरोट के साथ पिस्ता का भी वर्णन किया गया है.

Swad Ka Safarnama: पिस्ता एक शानदार ड्राई फ्रूट है और इसे फीका, नमकीन या मीठे रूप में खाएंगे तो भी स्वाद में बेजोड़ है. यह गुणों से भी भरपूर है और इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स व मिनरल्स ब्लड शुगर को तो कंट्रोल करते ही है, साथ ही बढ़ते वजन पर भी लगाम लगाते हैं. इसे दिल के लिए भी लाभकारी माना जाता है. हजारों वर्ष पुराना है इस सूखे मेवे का इतिहास.

पिस्ता की तासीर होती है गर्म

ऐसा माना जाता है कि ड्राई फ्रूट्स अधिकतर ठंडे प्रदेशों में पैदा होते हैं, लेकिन पिस्ता (Pistachio) ऐसा मेवा है जो गर्म क्षेत्रों में ज्यादा परवान चढ़ता है. वैसे यह ठंडे प्रदेशों में भी उग सकता है. इसकी तासीर गर्म मानी जाती है. पश्चिमी देशों के कुछ प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि जब आदम और हव्वा पृथ्वी पर आए तो अपने साथ जो वे खाद्य पदार्थ लाए थे, उसमें पिस्ता भी शामिल था. इसाईयों के धार्मिक ग्रंथ बाइबिल में अखरोट के साथ पिस्ता का भी वर्णन किया गया है.

pistachio

भारत में पिस्ता को मेवे के रूप में अधिक खाया जाता है. Image-Canva

माना जाता है कि प्राचीन समय में व्यापारी वर्ग अपने भोजन के रूप में पिस्ता का साथ रखता था, उसका कारण यह था कि भून लेने के बाद इसके गुणों में तो इजाफा हो ही जाता था, साथ ही यह लंबे समय तक सुरक्षित भी रहते थे. पिस्ता को सीधे तौर पर पेड़ से तोड़कर खाने का चलन नहीं है. इसे छिलके समेत तोड़कर सुखाया जाता है, फिर स्वादानुसार नमकीन या मीठे में भी बदल दिया जाता है. भारत में पिस्ता को मेवे के रूप में अधिक खाया जाता है, लेकिन विदेशों में इससे डेजर्ट, सॉस, कई प्रकार की मिठाइयां मक्खन के साथ विशेष सिरप भी बनाया जाता है.

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पिस्ता के उत्पत्ति स्थल पर नहीं है एक राय

कहा जाता है कि दुनिया में जितने भी ड्राई फ्रूट्स है, उनमें पिस्ता सबसे पुराना है. काजू परिवार का पिस्ता ईसा पूर्व करीब 7000 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर उगना शुरू हो चुका था. इसकी उत्पत्ति कहां हुई, उसको लेकर अलग-अलग मत हैं. विश्वकोश ब्रिटेनिका (Britannica) का कहना है कि पिस्ता गर्म या समशीतोष्ण जलवायु में शुष्क भूमि में उगाए जाते हैं. इसे ईरान मूल का माना जाता है. दूसरी ओर ‘नेचुरलिस हिस्टोरिया’ नाम से विश्वकोष लिखने वाले रोमन प्राकृतिक दार्शनिक, वैज्ञानिक व इतिहासकार प्लिनी द एल्डर (पहली शताब्दी) ने माना है कि पहली शताब्दी ईस्वी की शुरुआत में पिस्ता टिबेरियस के शासनकाल के दौरान सीरिया से इटली लाया गया था. इसके बाद, इसकी खेती अन्य भूमध्यसागरीय देशों में फैल गई.

वैसे भारतीय अमेरिकी वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने पिस्ता के दो मूल उत्पत्ति केंद्र माने हैं. एक, फर्टाइल क्रेसेंट, जिनमें तुर्की, इजरायल, सीरिया, जॉर्डन, लेबनान, ईरान, इराक, तुर्कमेनिस्तान आदि शामिल है पिस्ता का दूसरा उत्पत्ति केंद्र व सेंट्रल एशियाटिक सेंटर को मानती है, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं. भारत में पिस्ता के उत्पादन केंद्र कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब और कश्मीर हैं. अब तो यह राजस्थान में भी उगाया जाने लगा है.

‘चरकसंहिता’ में पिस्ता को बताया है बेहद गुणकारी

ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में पिस्ता (अभिषुक) का वर्णन है. इसका अर्थ यही है कि उस काल में भारत में इस ड्राईफ्रूट का सेवन किया जा रहा था. ग्रंथ में इसके गुणों की जानकारी दी गई है और बताया गया है कि यह स्निग्ध, मधुर, बलदायक, कफ-पित्त नाशक तो है ही, साथ में वजन भी घटाता है. पिस्ता में वजनकारी पोषक तत्व हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार 100 ग्राम पिस्ते में कैलोरी 562, कुल फैट 45 ग्राम, कोलेस्ट्रॉल 0 मिलीग्राम, सोडियम 1 मिलीग्राम, पोटेशियम 1,025 मिलीग्राम, कार्बोहाइड्रेट 28 ग्राम, फाइबर 10 ग्राम, प्रोटीन 20 ग्राम के अलावा विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी6 और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं.

pistachio

पिस्ता ब्लड शुगर को कंट्रोल कर वजन नहीं बढ़ते देता है. Image-Canva

फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट नीलांजना सिंह के अनुसार इन्हीं विटामिन्स व मिनरल्स के चलते यह सूखा मेवा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है, शरीर का वजन भी बढ़ने नहीं देता और दिल के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर भूख को कम बनाए रखता है और पाचन सिस्टम भी दुरुस्त बनाए रखता है.

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कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखता है पिस्ता

उन्होंने जानकारी दी कि पिस्ता कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में अच्छा होता है. साथ ही हृदय रोगों को रोकने में मदद करता है. यह विटामिन ई का एक समृद्ध स्रोत है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालता है. इसमें पाए जाने वाले विशेष तत्व विशेषकर विटामिन बी6 नर्वस सिस्टम को भी स्वस्थ बनाए रखता है. यह विटामिन ब्लड के रेड सेल्स को भी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, इसका लाभ यह रहता है कि शरीर में हीमोग्लोबिन लगातार संतुलित रहता है. इसके सेवन से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है. इसमें बायोटिन भी होता है जो बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में मदद करता है. यह त्वचा को मॉइश्चराइज़ कर पोषण देता है और उसकी लोच भी बढ़ाता है. पेड़ से टूटे पिस्ते को सीधे तौर पर नहीं खाना चाहिए. इससे पाचन सिस्टम गड़बड़ा सकता है. ज्यादा खा लिया तो यह लूज मोशन या कब्ज पैदा कर सकता है.

Tags: Food, Lifestyle

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