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स्वाद का सफ़रनामा: फाइबर से भरपूर रतालू कोलेस्ट्रॉल करता है कंट्रोल, गुणों से भरपूर इस कंद का जानें इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा.

स्वाद का सफ़रनामा.

Swad Ka Safarnama: स्वाद का सफ़रनामा में हम आज बात कर रहे हैं रतालू की. कंदमूल के अंतर्गत आने वाला रतालू गुणों से भरपूर ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

नाइजीरिया दुनिया का सबसे बड़ा रतालू उत्पादक देश है.
दुनियाभर में रतालू की 250 से अधिक प्रजातियां मिलती हैं.
श्वसन तंत्र को मजबूत करने में भी मददगार होता है रतालू.

Swad Ka Safarnama: रतालू (Yam) कंदमूल है और भोजन के लिए अनुकूल है. यह गुणों से भरपूर है. इसका सेवन श्वसन प्रणाली (Respiratory System) को दुरुस्त रखता है साथ ही ब्लड प्रेशर के साथ साथ हृदय की गति को भी कंट्रोल में रखता है. यह हजारों वर्ष पुराना कंद है और माना जाता है कि मानव-सभ्यता के उदय से ही यह मनुष्य को भोजन के रूप में उपलब्ध है. भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसकी विशेषताएं अंकित की गई हैं.

शकरकंद व जिमीकंद से अलग हैं इसके गुण

रतालू के एक अलग प्रकार का कंद है और यह शकरकंद (Sweet Potato) और जिमीकंद (Elephant foot) से अलग है. इसे सब्जी के रूप में तो प्रयोग में लाया जा सकता है, साथ ही इसे उबालकर भी खाया जाता है. यह फीका होता है और सफेद, बैंगनी व लाल रंग के गूदे से भरा होता है. ग्रामीण अंचलों में यह प्रिय भोजन माना जाता है. उसका कारण यह है कि इसे बिना किसी सुविधा के छह माह तक भंडारण किया जा सकता है. ‘VEGETABLES’ पुस्तक के लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी के अनुसार रतालू की 250 से अधिक प्रजातियां हैं और यह कार्बोहाइड्रेट का समृद्ध भंडार है.

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नाइजीरिया दुनिया का सबसे बड़ा रतालू उत्पादक देश है

पश्चिम अफ्रीका में यह आय के प्रमुख स्रोतों में से एक है. वहां हर वर्ष इसकी फसल का उत्सव मनाया जाता है. अफ्रीकी संस्कृति में रतालू को आमतौर पर उबला या भूनकर खाया जाता है. वहां इसे अक्सर उबालकर एक चिपचिपे पेस्ट या आटे में मैश किया जाता है. नाइजीरिया दुनिया का सबसे बड़ा रतालू उत्पादक देश है, वहां इस कंद का दुनिया के उत्पादन का 70% से अधिक हिस्सा पैदा होता है. भारत में इसे सबसे अधिक उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में उगाया जाता है.

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तीन महाद्वीपों में एक साथ पैदा हुआ यह कंद

माना जाता है कि मानव सभ्यता के उदय से ही रतालू भोजन के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है. इसकी उत्पत्ति अलग अलग तीन महाद्वीपों अफ्रीका, एशिया व अमेरिका में हुई. मनुष्य ने करीब 10 हजार वर्ष पूर्व इसे भोजन के लिए उगाना शुरू कर दिया था. पश्चिमी अफ्रीका में तो इसका इतिहास और भी प्राचीन है. भारत सहित साउथ एशिया में करीब 2000 ईसा पूर्व इसकी खेती शुरू कर दी गई थी. ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में अन्य कंद के साथ रतालू का भी वर्णन है. इसे त्रिदोषनाशक बताया गया है और कहा गया है कि लोग का यह प्रिय भोजन है, क्योंकि यह रुचिकर होता है. यह पेट का सिस्टम ठीक बनाए रखता है.

कुछ आयुर्वेद के विशेषज्ञ इसे औषधि भी मानते हैं. उनका कहना है कि इसका उपयोग करने से कई बीमारियों में राहत मिलती है. रतालू का पूरी दुनिया में चलन धीरे-धीरे आगे बढ़ा, लेकिन जहां भी पहुंचा वहां इसे स्वादिष्ट आहार के रूप में मंजूर कर लिया गया है. आजकल पूरी दुनिया में इसकी विभिन्न प्रकार की मसालेदार डिशेज बनाई जाती है और स्मोक्ड, फ्राई, बेक, उबालने के साथ-साथ भूनकर व बारबेक्यू के तौर पर भी खाया जा सकता है. इसकी स्वीट डिशेज भी बनाई जाती है. और नॉनवेज के साथ भी परोसा जाता है.

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न्यूट्रिशन से भरपूर है रतालू

रतालू में पोषक तत्वों की भरमार है. आधुनिक विज्ञान के अनुसार करीब 100 ग्राम रतालू में कैलोरी 118, वसा, 0.2 ग्राम, पोटेशियम 816 मिलीग्राम, कार्बोहाइड्रेट 28 ग्राम, फाइबर करीब 4 ग्राम, प्रोटीन 1.5 ग्राम, विटामिन सी 28 प्रतिशत, विटामिन बी-6 की मात्रा 15 प्रतिशत, विटामिन ए 2 प्रतिशत, लोहा 2 प्रतिशत और मैगनीशियम 5 प्रतिशत पाया जाता है. इस कंद में पाए जाने वाले ये मिनरल्स व विटामिन्स इसे विशेष बनाते हैं.

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रतालू  कब्ज नहीं होने देता और इससे पाचन सिस्टम दुरुस्त रहता है.

इसका सेवन श्वसन प्रणाली को सुचारू बनाए रखता है, इसीलिए कहा जाता है कि अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले रतालू के चलते ही वहां के निवासी दौड़ने और शिकार करने में अव्वल माने जाते रहे हैं. यह खांसी और ब्रोन्कियल (फेफड़ों में समस्या ) में भी मददगार है. इसमें पाए जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है, जिससे हृदय की गति भी सामान्य बनी रहती है.

बेड कोलेस्ट्रॉल कम करता है रतालू

फूड एक्सपर्ट व होम शेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार रतालू विटामिन बी-6 का बेहतरीन स्रोत है, जो हमारे शरीर को होमोसिस्टीन को तोड़ता है. यह एक ऐसा पदार्थ जो रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकता है. होमोसिस्टीन की अधिकता दिल के दौरे का सबब बन सकती है. यह विटामिन पेट में होने वाली ऐंठन से भी बचाव करता है. रतालू में फाइबर भी उचित मात्रा में पाया जाता है, जो बेड कोलेस्ट्रॉल को पैदा होने से रोकता है, कब्ज नहीं होने देता. इससे पाचन सिस्टम दुरुस्त रहता है. यह मसल्स की मजबूती के लिए भी लाभकारी है. इसके नियमित सेवन से अल्जाइमर से बचाव होता है, क्योंकि यह प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफा करता है.
इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स शरीर में रेड ब्लड सेल्स की संख्या को सुरक्षित रखने और बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसका सेवन वजन को भी कंट्रोल कर सकता है. इसका अधिक सेवन का नुकसान यह है कि यह स्किन में रेशेज पैदा कर सकता है. इसमें ग्लूकोज भी खूब होता है, इसलिए शुगर से परेशान लोगों को इसका सीमित सेवन करना चाहिए.

Tags: Food, Lifestyle

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