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स्वाद का सफ़रनामा: एनर्जी बूस्टर सिंघाड़ा खून को करता है साफ, आइए जानते हैं इससे जुड़ा रोचक इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा (Swad ka Safarnama).

स्वाद का सफ़रनामा (Swad ka Safarnama).

Swad Ka Safarnama: सिंघाड़ा पौष्टिकता से भरपूर फल है. हमारे यहां तो इसे उपवास में भी काफी खाया जाता है. एंटी ऑक्सीडेंट् ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

सिंघाड़े के गूदे को सुखाकर उसका पौष्टिक आटा तैयार किया जाता है.
भूख लगने पर सिंघाड़ा खाते हैं तो शरीर को एकदम एनर्जी मिलती है.
आयुर्वेद में सिघाड़े को जलीय फल कहा गया है और इसकी तासीर ठंडी है.

Swad Ka Safarnama: भारत में सर्दी अब धीरे-धीरे अपने जलवे दिखाने लगी है. इस दौरान सब्जी मंडी और बाजारों में सिंघाड़ा दिखाई देने लगा है. गहरे हरे और मटमैले रंग का यह फल गुणों में लाजवाब है. इसे खाइए, शरीर में एनर्जी का संचार होने लगेगा. सिंघाड़ा ब्लड की अशुद्धियों को भी दूर करने में मदद करता है. इसकी बड़ी विशेषता यह है कि यह एंटीऑक्सीडेंट से भी भरपूर है. सिंघाड़ा हरफनमौला फल है, कारण यह है कि इसकी उत्पत्ति एक साथ कई क्षेत्रों में हुई है.

कुछ राज्यों में समोसे को सिंघाड़ा कहते हैं

आज से कुछ साल पहले तक बाजारों में बिकने वाले सिंघाड़े (Water Chestnut) के साथ उसकी डंठल नहीं बेची जाती थी. दिल्ली में तो अब बिना डंठल के सिंघाड़ा बिकता हुआ नजर नहीं आता है. यह अलग बात है कि इसके अंदर का गूदा ही खाया जाता है, छिलके और फल किसी काम के नहीं होते हैं. रोचक बात यह है कि इसकी बनावट को देखते हुए देश के एकाध राज्यों में समोसे को भी सिंघाड़ा कहने का रिवाज है. सिंघाड़े की विशेषता यह है कि उबालकर खाने से इसका रस तो समाप्त हो जाता है लेकिन यह खाते वक्त यह मुंह में मक्खन जैसा स्वाद छोड़ता दिखाई देगा.

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व्रत के दौरान सिंघाड़े के आटे का काफी प्रयोग किया जाता है. Image-Canva

सिघांड़े की एक अन्य खास विशेषता यह है कि गूदे को सुखाकर उसका पौष्टिक आटा तैयार किया जा सकता है. यह व्रत-उपवास में बेहद काम आता है. यही एक ऐसा फल है जो तालाब के पानी में फैलने वाली लता में पैदा होता है. अजीब सा आकार है इसका. सिंघाड़े की तिकोनी बनावट में सींगों की तरह दो मुलायम कांटे होते हैं. लोग इसके रस और बहुत ही हल्के मीठे स्वाद के भी दीवाने हैं.

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कई देशों में उत्पत्ति हुई है इस जलीय फल की!

सिंघाड़े की उत्पत्ति ‘हरफनमौला’ है. इसको लेकर फूड एक्सपर्ट के अलग-अलग विचार हैं. लब्बोलुआब यह है कि सिंघाड़ा एक साथ कई देशों में पैदा हुआ. इसलिए इसे यूरेशिया मूल का कहा जाने लगा है. विश्वकोश ब्रिटेनिका के अनुसार सिंघाड़ा यूरोप, एशिया और अफ्रीका का मूल निवासी हैं और इसे अलग-अलग नामों से भी जाना जाता रहा है. इस फल की उत्पत्ति को लेकर एक प्रामाणिक जानकारी यह कहती है कि सिंघाड़ा यूरोप और एशिया के गर्म समशीतोष्ण क्षेत्रों और उष्णकटिबंधीय अफ्रीका का मूल निवासी है.

अफ्रीका में यह अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, सूडान, तंजानिया, युगांडा, अंगोला, मलावी, मोजाम्बिक, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, बोत्सवाना, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में पैदा हुआ. एशिया में यह तुर्की, जॉर्जिया, चीन, जापान, भारत और वियतनाम का मूल निवासी हैं. इसके अलावा जिन यूरोपीय देशों में इसकी उत्पत्ति मानी गई है, उनमें ऑस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, जर्मनी, हंगरी, पोलैंड, स्विट्जरलैंड, बेलारूस, यूक्रेन, अल्बानिया, बुल्गारिया, ग्रीस, इटली, रोमानिया, फ्रांस, स्पेन आदि देश शामिल हैं. एक विशेष बात यह है कि पूरे विश्व में इसकी जानकारी वर्ष 1850 से ही मिलती है. इससे पहले सिंघाड़े की उत्पत्ति को लेकर फूड हिस्ट्री मौन है. एक बात और भी है कि कुछ देशों में शुरुआती दौर में जहां यह पैदा हुआ, वहां अब यह उगना ही बंद हो गया है.

आयुर्वेद ने सिंघाड़े को त्रिदोष नाशक कहा है

स्वाद में तो सिंघाड़ा जुबान और मन को भाता ही है, साथ ही गुणों में शरीर के लिए लाभकारी है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने इसके पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया है कि 100 ग्राम सिंघाड़े में कैलोरी 97, वसा 0.1 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 4.8 ग्राम, फाइबर 1.4 ग्राम, शक्कर 0.1 ग्राम, प्रोटीन, 10 ग्राम, विटामिन बी 6 का स्तर 0.33 मिलीग्राम, पोटैशियम 584 मिलीग्राम, जिंक 0.33 मिलीग्राम, मैंगनीज 0.33 मिलीग्राम के अलावा कई अन्य विटामिन्स व मिनरल्स भी मौजूद होते हैं. सरकारी अधिकारी व आयुर्वेदाचार्य आरपी पराशर के अनुसार आयुर्वेद में इसे जलीय फल कहा गया है और यह मधुर, ठंडे तासीर का, पित्त और वात को कम करने वाला, कफ को हरने वाला, रूचि बढ़ाने वाला व सीमेन को गाढ़ा करने वाला माना जाता है. यह रक्तपित्त तथा मोटापा कम करने में सहायक है. इसे खाने से अतिसार या लूज मोशन में लाभ मिलता है.

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इसमें फैट नहीं है, लेकिन कई गुणों से है भरपूर

जानी-मानी डायटिशियन डॉ. अनिता लांबा के अनुसार सिंघाड़ा एनर्जी बूस्टर है. भूख लगने पर इसे खाएंगे तो ऐसा लगेगा कि शरीर को एकदम से ऊर्जा मिल गई है. पेट भरा-भरा सा लगेगा. इसीलिए यह मोटापे को भी कंट्रोल कर लेता है. इसका अन्य कारण यह भी है कि इसमें फैट न के बराबर होता है. इसमें जो तत्व है, वह शरीर में ब्लड की अशुद्धियों को दूर करने में मदद करते हैं. यह फल एंटीऑक्सीडेंट भी है. उसके चलते कई सामान्य बीमारियों में यह प्रतिरोधक क्षमता पैदा करने लग जाता है.

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दिल के लिए फायदेमंद सिंघाड़ा कब्ज की समस्या भी दूर करता है. Image-Canva

अपने इसी गुण के चलते यह फल कोशिकाओं को दुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है. चूंकि इसमें फैट न के बराबर है और प्रोटीन भी सामान्य है, इसलिए इसका सेवन हृदय के लिए अनुकूल है. दिल की धमनियां भी सुचारू रहती हैं. यही गुण ब्लड शुगर से परेशान लोगों को राहत दे सकता है. इसका सेवन पेट को मुलायम रखता है, जिसके चलते कब्ज की समस्या से बचा जा सकता है. इसमें पाया जाने वाला पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक है. उचित मात्रा में खाने से सिंघाड़े के कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन ज्यादा खा लेने से पेट दर्द की आशंका बन सकती है.

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