Home /News /lifestyle /

ये हैं राजू भैया...सुबह स्वीपर, दोपहर में टीचर

ये हैं राजू भैया...सुबह स्वीपर, दोपहर में टीचर

स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चे पढ़ाई न छोड़ दें इसलिए राजू भैया ने उठा ली चॉक. वे सुबह झाड़ू लगाते हैं और दोपहर में बच्चों को पढ़ाते हैं.

    ये है दिवानमुड़ा का मिडिल स्कूल. 11 साल पहले शुरू हुए स्कूल की दीवारों का पलस्तर जगह-जगह से झड़ने लगा है. हर बारिश काई बनकर अपनी छाप छोड़ जाती है. नंगी दीवारों पर एजुकेशनल पोस्टर नहीं, पंचांग लटके हैं. गांव के किसी भी स्कूल से ये अलग नहीं, जहां सैकड़ों बच्चों पर इक्का-दुक्का टीचर होते हैं. कहानी का दूसरा पहलू कनेर के फूल जितना ताजा और चमकदार है. शिक्षकों की कमी के कारण यहां स्कूल का स्वीपर बच्चों को पढ़ा रहा है. सबसे पहले स्कूल पहुंचकर सफाई करता है और फिर बच्चों के आते ही उन्हें पढ़ाने में जुट जाता है.



    पढ़िए, hindi.news18.com की सफाईकर्मी राजूराम यादव से बातचीत, जो साथ ही गुरुजी का रोल भी निभा रहे हैं ताकि किसी बच्चे की पढ़ाई फेल होने के कारण न छुड़ा दी जाए.

    12वीं जमात तक पढ़ा हूं. स्कूल में सफाई का काम करते तीन साल हुए. पहले यहां दो टीचर होते थे, एक का ट्रांसफर हो गया. छह से आठ तक के बच्चे हैं. अकेला टीचर उन्हें कितना संभाले. सबको एक क्लासरूम में बिठा नहीं सकते. अलग बैठकर बच्चे हो-हल्ला करते. इससे दूसरे बच्चे भी पढ़ नहीं पाते थे. मैं सब देखता और मन मसोसता रहता. रोज आता, स्कूल की सफाई करता और ज्यादा से ज्यादा बच्चों को चुप करा दिया करता.



    गांव के लोग बच्चों और खासकर लड़कियों को मुश्किल से ही स्कूल भेजते हैं. खेती-किसानी के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं आते हैं. मिड डे मील और जो थोड़ी बहुत जागरुकता के कारण बच्चे स्कूल आ जाते हैं, फेल हो जाने पर वो भी बंद हो जाता है. पास न होने पर पढ़ाई छुड़वा देना गांव-खेड़े में आम बात है. ऐसे ही सोचते-सोचते एक दिन मैं इतना परेशान हो गया कि सोचा, क्यों न खुद पढ़ाकर देखूं.

    इतना तो पढ़ा-लिखा हूं कि किताब पढ़-पढ़के समझ सकूं और बच्चों को पढ़ा सकूं. एक बच्चे से उसकी किताबें मांगीं, पढ़कर देखा. तीन विषय आसान लगे. लगा कि मैं अच्छे से पढ़ा सकूंगा. मैंने एकलौते टीचर से बात की. वे पहले-पहल झिझके. स्वीपर कैसे पढ़ा सकेगा! नियमों की बात भी थी लेकिन फिर उन्हें भी लगा कि बच्चे पढ़ाई छोड़ दें, उससे बेहतर एक कोशिश की जाए.



    पढ़ाने से पहली रात मुझे नींद नहीं आई. बार-बार किताबें देखता. सुबह जल्दी स्कूल गया और सफाई के बाद बच्चों का इंतजार करने लगा. मुझे घबराहट हो रही थी मानो मेरे स्कूल का पहला दिन हो. क्लास में बोर्ड के सामने खड़ा हुआ. इस बार मेरी भूमिका उन्हें चुप कराने वाले राजू भैया की नहीं, राजू सर की थी. पढ़ाना शुरू किया तो क्लास पूरी होने पर ही रुका. बच्चों को मेरा डबल रोल पसंद आया. तब से मैं 6वीं से 8वीं तक के बच्चों को संस्कृत, हिंदी और सामाजिक विज्ञान पढ़ा रहा हूं.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर