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दिवाली के बाद काम से लें कुछ दिनों की छुट्टी, कर आएं शांतिनिकेतन की सैर

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Updated: October 13, 2019, 6:07 PM IST
दिवाली के बाद काम से लें कुछ दिनों की छुट्टी, कर आएं शांतिनिकेतन की सैर
माघोत्‍सव, जॉयदेव मेला और वसंत उत्‍सव भी यहां के ऐतिहासिक आयोजन हैं.

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में हमेशा कोई न कोई कार्यक्रम चलता ही रहता है. यहां कई प्रकार के सेलिब्रेशन साल भर होते रहते हैं.

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  • Last Updated: October 13, 2019, 6:07 PM IST
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शांतिनिकेतन पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में बोलपुर के निकट एक छोटा शहर है जो कोलकाता से लगभग 180 किलोमीटर दूर है. इस शहर को प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार विजेता किवगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने बनाया था. महाकवि टैगोर ने यहां विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. यह शहर प्रत्येक वर्ष हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. शांति निकेतन एक पर्यटन आकर्षण केंद्र इसलिए भी है क्योंकि टैगोर ने अपनी कई साहित्यिक कृतियां यहां लिखीं थीं और यहां पर स्थित उनका घर ऐतिहासिक महत्व रखता है.

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विदेशी पर्यटकों के भ्रमण के लिए खास स्‍थल 

निकेतन का अर्थ होता है घर और शांति का अर्थ होता है ऐसा स्‍थान जहां शांत वातावरण हो और आसपास का माहौल आपको शहर की भीड़ से दूर कुछ पल सुकून प्रदान कर सके. कई विख्‍यात हस्तियां जैसे-इंदिरा गांधी, सत्‍यजीत रे, गायत्री देवी, नोबेल पुरस्‍कार विजेता अमर्त्‍य सेन और अबुल गानी खान, शांतिनिकेतन आ चुके हैं. यह स्‍थान देसी और विदेशी पर्यटकों के भ्रमण के लिए खास स्‍थल है. शांतिनिकेतन के दौरे पर आकर आप कट्टरपंथी कला, नृत्‍य और संस्‍कृति को एक साथ देख सकते हैं.

पौष उत्‍सव मनाया जाता है

शांतिनिकेतन में हमेशा कोई न कोई कार्यक्रम चलता ही रहता है. यहां कई प्रकार के सेलिब्रेशन साल भर होते रहते हैं. रविन्‍द्रनाथ टैगोर का जन्‍मदिन अप्रैल मध्‍य में मनाया जाता है. शांतिनिकेतन में हर साल, अगस्‍त/सितम्‍बर के महीने में मानसून के दिनों में पौधों को रोपने का काम किया जाता है जिसे वृक्षारोपण त्‍यौहार के नाम से जाना जाता है. शांतिनिकेतन में ब्रह्मा मंदिर की स्‍थापना के उपलक्ष्‍य में पौष उत्‍सव मनाया जाता है. यह उत्‍सव दिसम्‍बर से जनवरी के बीच में मनाया जाता है, इसमें लोकनृत्‍य, संगीत, कला और संस्‍कृति, खेल और कलाकृतियों को दिखाया जाता है.

बंगाली भोजन के लिए प्रसिद्ध
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इसके अलावा, माघोत्‍सव, जॉयदेव मेला और वसंत उत्‍सव भी यहां के ऐतिहासिक आयोजन हैं. शांतिनिकेतन, बंगाली भोजन के लिए भी प्रसिद्ध है, विशेषतौर पर मछलियों के विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को यहां सबसे ज्‍यादा पसंद किया जाता है. यहां का विश्‍वभारती कैम्‍पस काफी विशाल और सुंदर है. महर्षि देवेन्‍द्रनाथ, रविन्‍द्रनाथ टैगोर के पिता थे, जो हर दिन इसके कक्ष में प्रार्थना किया करते थे. यहां पर स्‍नातक की शिक्षा के दौरान, प्रत्‍येक छात्र को सप्‍तापारनी वृक्ष से पांच तनु दी जाती है. यहां के कला और शिल्‍प कॉलेज में मूर्तियां, भित्ति और भित्ति चित्र आदि को दर्शाया जाता है.

महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर उत्‍तरायण परिसर में रहते थे

यहां कई पुस्‍तकों का विशाल संग्रहालय भी है. पारंपरिक ब्रह्माचार्य आश्रम को पटना भवन के द्वारा फॉलो किया जाता है. यहां हर बुधवार को प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है. महाकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर यहां के उत्‍तरायण परिसर में रहते और काम करते थे. शांतिनिकेतन के पास में ही अन्‍य स्‍थल भी मौजूद है जैसे - कानकालीताला, जो एक पवित्र सतीपिठास है और यह स्‍थल बुधवार के अलावा शेष सभी दिनों में खुला रहता है. जॉयदेव-कुंडुली, यह लेखक गीता गोविंदा का जन्‍म स्‍थान है.

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नजदीकी रेलवे स्‍टेशन कोलकाता है

यहां एक मंदिर है नानुर, जो कि देवी भुसुली को समर्पित है. इसके अलावा, यहां बॉक्रेश्‍वर है जहां गर्म पानी का झरना मौजूद है. शांतिनिकेतन की यात्रा के दौरान तारापीठ, लावपुर, फुलारा, साईनाथ, नंदेश्‍वरी, नालहटी और मसनजोर में भी घूमने के लिए जाया जा सकता है. शांतिनिकेतन, रेल, सड़क और हवाई मार्ग के द्वारा भली प्रकार से जुड़ा हुआ है. यहां का नजदीकी रेलवे स्‍टेशन कोलकाता है. नवंबर से मार्च तक यहां घूमना सबसे बेहतर है.

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First published: October 13, 2019, 6:07 PM IST
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