बच्चे के पैदा होने के पहले वर्ष में इन बातों का रखें खास ख्याल, ऐसे कराएं ब्रेस्टफीडिंग

बच्चे के पैदा होने के पहले वर्ष में इन बातों का रखें खास ख्याल, ऐसे कराएं ब्रेस्टफीडिंग
बच्चे के पैदा होने के 1 घंटे के अंदर ही बच्चे को मां का दूध देना शुरू कर दिया जाता है.

नवजात बच्चे के लिए मां का दूध (Breast Feeding) सबसे ज्यादा लाभदायक होता है लेकिन फिर भी मां को इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि बच्चे को कितनी भूख लग रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : November 27, 2020, 4:06 pm IST
  • Share this:

    नवजात बच्चे (Infant) के माता-पिता (Parents) को बच्चे की हर चीज का खास ध्यान रखना पड़ता और ये क्रम लगातार कई महीनों तक चलता है. जैसे उसका खाना, पीना और सोना हर एक छोटी चीज का ख्याल माता-पिता को रखना पड़ता है. नवजात बच्चे के लिए मां का दूध (Breast Feeding) सबसे ज्यादा लाभदायक होता है लेकिन फिर भी मां को इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि बच्चे को कितनी भूख लग रही है. वो कितनी देर तक दूध पीता है और बच्चा ठोस कब खाना शुरू करेगा. बच्चे की फीडिंग और उसके खान-पान को लेकर कुछ ऐसे ही टिप्स है, जो हम आपको बताने जा रहे हैं.

    उम्र के हिसाब से बढ़ती है बच्चे की खुराक
    नवजात बच्चों का पेट काफी छोटा होता है और मां को इस बात का ध्यान रखना होगा कि बच्चे को ज्यादा दूध न पिलाए. नवजात शिशु का पेट एक मार्बल के साइज के बराबर होता है और उसे 1 और आधे चम्मच तक ही दूध पीलाना चाहिए. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है वैसे ही उसका पेट बढ़ता है. अगर आप अपने बच्चे को बोतल से दूध पिला रही हैं तो आपको कितना दूध उसे देना है ये नापने में आसानी होगी.

    बच्चे को कितनी बार खिलाना चाहिए खाना
    छोटे बच्चों को भूख ज्यादा लगती है और इस बात का हर मां को ध्यान रखना चाहिए. अगर आप अपने बच्चे को अपना दूध पिला रही हैं तो आपको ये बात मालूम होनी चाहिए कि मां का दूध पीने वाले बच्चों को जल्दी-जल्दी और ज्यादा भूख लगती है. मां का दूध बच्चों के पेट में जल्दी पच जाता है और इस वजह से उन्हें जल्दी भूख लगती है. इसके अलावा अगर आप बच्चे को बोतल से दूध पिला रही हैं तो बच्चे को उतनी जल्दी भूख नहीं लगेगी।. इसलिए आपको बच्चे की भूख का खास ध्यान रखना पड़ेगा.



    ब्रेस्टफीड करने वाले बच्चों का रखें खास ध्यान
    बच्चे के पैदा होने के 1 घंटे के अंदर ही बच्चे को मां का दूध देना शुरू कर दिया जाता है और उसके साथ ही 1 दिन में बच्चे को 8 से 12 बार मां का दूध पिलाना चाहिए. हर मां को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे के पैदा होने से करीब 2 हफ्ते तक बच्चे को दिन में कई बार ब्रेस्टफीड कराना चाहिए. आपको इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा कि आपका बच्चा 4 घंटे तक भी बिना फीडिंग के न रहे. अगर आप ब्रेस्ट फीडिंग का अच्छे से ध्यान रखेंगी तो इससे आपका बच्चा अच्छे से ग्रो करेगा, साथ ही उसका वजन भी बढ़ेगा. ये कुछ प्वॉइंट्स है, जो आपकी मदद करेंगे कि आपको बच्चे को कितनी बार फीड कराना चाहिए-

    -1 से 3 महीने के बच्चे को 24 घंटे के अंदर 7 से 9 बार ब्रेस्ट फीड कराना चाहिए.

    -3 महीने के बच्चे को 24 घंटे के अंदर 6 से 8 बार दूध पिलाना चाहिए.

    -6 महीने के बच्चे को एक दिन में 6 बार दूध पिलाना चाहिए.

    -12 महीने के बच्चे को आपको एक दिन में 4 बार दूध पिलाना चाहिए.

    बोतल से दूध पीने वाले बच्चे का ऐसे रखें ख्याल
    ब्रेस्ट फीड वाले बच्चों से बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को कम भूख लगती है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि उन्हें दूध पिलाने में आप लंबे समय का अंतराल लें. यहां पर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों का एक शेड्यूल है, जिससे आपको ये जानने में मदद मिलेगी कि बच्चे को कितनी देर में दूध पिलाना होगा.

    -नवजात बच्चे को दिन में 2 से 3 घंटे आपको दूध पिलाना चाहिए.

    -2 महीने के बच्चे को एक दिन में 3 से 4 घंटे दूध देना चाहिए.

    -4 से 6 महीने के बच्चे को 4 से 5 घंटे दूध पिलाना चाहिए.

    -6 महीने से ज्यादा के बच्चे को दिन में 4 से 5 घंटे दूध पिलाना चाहिए.

    (ध्यान रहे कि पूरे दिन में घंटों की बात हो रही है, एक साथ 5 घंटे तक दूध नहीं पिलाना है)

    बच्चे को बार-बार लगने वाली भूख पर दें ध्यान
    आमतौर पर जब भी आपके बच्चे को भूख लगेगी तो आप उसे दूध पिलायेंगी लेकिन कुछ बच्चों को बार-बार भूख लगती है. इसका भी आपको खास ध्यान रखना पड़ेगा कि बच्चा भूखा न रहे. कुछ बच्चों का भूख लगने का एक तय समय होता है और वह दोपहर या शाम को दूध पीते हैं और फिर सो जाते हैं लेकिन कुछ बच्चों को बार-बार भूख लगती है, जिसे आप बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. करीब 6 महीने तक आपको बच्चे की भूख का खास ध्यान रखना पड़ेगा.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)