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तालिबान के आने से अफगानी महिला फुटबॉल टीम के सपनों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा

अफगानिस्तान महिला फुटबॉल टीम ने खालिदा पोपल से मांगी मदद (AFP Image)

अफगानिस्तान महिला फुटबॉल टीम ने खालिदा पोपल से मांगी मदद (AFP Image)

Taliban In Afghanistan: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से अफगानिस्तान की महिला फुटबॉल टीम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. लड़कियों को डर है कि तालिबान देर-सवेर उन पर हमला जरूर करेगा. महिला खिलाड़ियों ने मदद की गुहार लगाई है.

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    Female Footballers In Afghanistans: अफगानिस्तान में अचानक आई तालिबानी हुकूमत से अफगानिस्तान की महिला फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. टीम की कई महिला खिलाड़ियों ने रोते-बिलखते हुए उन्हें अफगानिस्तान से बाहर निकालने की गुहार लगाई है. महिलाओं के प्रति तालिबान हुकूमत का कैसा खौफनाक व्यवहार है, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है. तालिबान लड़कियों की शिक्षा पर पाबंदी का हिमायती है. इसके अलावा बिना पूरा शरीर ढके बाहर निकलने पर पाबंदी लगा रखी है और महिलाओं का खेल में हिस्सा लेना तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं है. इस दर्दनाक मंजर से फुटबॉल टीम की खिलाड़ी सहमी हुई हैं. रो-रोकर उनका जीना मुहाल हो गया है. उन्हें डर है कि देर सवेर उनका तालिबान द्वारा कत्ल कर दिया जाएगा.

    तालिबान के कहर का डर सता रहा है इन लड़कियों को
    इन डरी-सहमी महिला खिलाड़ियों ने अफगानिस्तान फुटबॉल एसोसिएशन (Afghanistan Football Association) की डायरेक्टर खालिदा पोपल (Khalida Popal) को फोन कर किसी तरह से बचाने की गुहार लगाई है. पोपल ने इन खिलाड़ियों को हर हाल में अपनी जगह से निकलने की सलाह दी है. उन्होंने इन लड़कियों से कहा है कि किसी भी तरह से वे पड़ोसी से छिपकर अपने-अपने घर से निकल जाएं. उन्होंने आस-पास से अपने अतीत से जुड़े सबूतों को मिटा देने के लिए भी कहा है. पोपल ने सोशल मीडिया से सभी पोस्ट को डिलीट करने की भी सलाह दी है. पोपल की इस सलाह की वाजिब वजह है. दरअसल, पोपल ने कई बार नेशनल टीवी पर तालिबान का विरोध किया है और वह उसे अपना दुश्मन मानती हैं. तालिबान महिला खेल का सख्त विरोधी है. इसलिए उन्हें डर है कि जब देर-सवेर तालिबान को महिला फुटबॉल टीम के बारे में पता चलेगा तो वह इन सबका कत्ल कर देगा.

    सब खत्म होता नजर आ रहा है
    पोपल ने ही अफगानिस्तान की पहली महिला फुटबॉल टीम को खड़ा किया था. वह पहली महिला टीम का हिस्सा थीं लेकिन अब वह पूरी तरह से एसोसिएशन का हिस्सा बनकर अफगानिस्तान महिला टीम की मदद कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे इन लड़कियों की फिक्र है. मैंने इतने दिनों में महिला टीम को खड़ा करने के लिए जितनी मेहनत की है, सब बर्बाद होता नजर आ रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘मेरी पीढ़ी को यह भरोसा हो गया था कि देश आगे बढ़ रहा है और इसमें महिला-पुरुष की समान भागीदारी होगी. इसलिए मैंने फुटबॉल को महिला सशक्तिकरण के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था.’ आपको बता दें कि साल 2007 में पोपल अफगानिस्तान की पहली महिला फुटबॉल टीम का हिस्सा थीं. पोपल कहती हैं कि जर्सी पहनकर मुझे इतना गर्व हुआ कि मैं इसे बयां नहीं कर सकती. वह बहुत ही खूबसूरत समय था.

    देश छोड़कर जाना पड़ा था
    पोपल को अफगानिस्तान महिला टीम का हिस्सा होने का खामियाजा भी भुगतना पड़ा. उन्हें तालिबान को दुश्मन कहे जाने के कारण जान से मार देने की धमकी मिली. इसके बाद उन्हें डेनमार्क में बहुत दिनों तक शरण लेनी पड़ी. महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को अफगानिस्तान में न सिर्फ तालिबान बल्कि फुटबॉल प्रशासन के अधिकारियों से भी प्रताड़ित होना पड़ा. इसके बाद खालिदा पोपल फुटबॉल एसोसिएशन की डायरेक्टर बनीं और महिला टीम को पुनः प्रोत्साहित कर मुकाम तक पहुंचाया.

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