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बरेली में टीबी के खिलाफ युद्ध में सोशल मीडिया अभियान निभा रहा है अहम भूमिका


Updated: November 26, 2019, 2:42 PM IST
बरेली में टीबी के खिलाफ युद्ध में सोशल मीडिया अभियान निभा रहा है अहम भूमिका
इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एंड टीबी स्ट्रेटजी 2015 (End TB Strategy 2015) की आईसीटी मॉनिटरिंग (ICT Monitering) के तहत संचालित किया जा रहा है.

इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एंड टीबी स्ट्रेटजी 2015 (End TB Strategy 2015) की आईसीटी मॉनिटरिंग (ICT Monitering) के तहत संचालित किया जा रहा है.

  • Last Updated: November 26, 2019, 2:42 PM IST
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बरेली. उत्तर प्रदेश की रूहेलखंड युनिलवर्सिटी (Rohilkhand University Uttarpradesh) में एक अनोखा अभियान शुरू किया गया है. यहां की फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित वर्मा ने सोशल मीडिया (Social Media Campaign) के जरिए टीबी मरीजों (TB Patients) को गोद देने का अभियान चालाया है. इस अभियान के अंतर्गत अब तक 100 टीबी पीड़ित बच्चे गोद लिए जा चुके हैं. इस अभियान को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एंड टीबी स्ट्रेटजी 2015 (End TB Strategy 2015) की आईसीटी मॉनिटरिंग (ICT Monitering) के तहत संचालित किया जा रहा है.

बरेली में कुल 13 हजार टीबी के मरीज हैं. इनकी देखभाल के लिए अस्पताल में केवल 50 लोगों का स्टाफ है. इस हालात में हर मरीज की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग संभव हो पाना मुश्किल है. टीबी के मरीजों के लिए यह जरुरी है कि वो छह महीने तक लगातार बिना नागा दवा खाएं.

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रामक बीमारी होने के कारण कोई टीबी मरीजों के आसपास भी फटकने से डरता है. ऐसे में इनकी देखभाल एक बड़ी चुनौती बन गई है. मरीजों की मॉनीटरिंग के लिए वालिंटियर आसानी से नहीं मिलते.

इस कमी को दूर करने के लिए यहां जीरो टीबी एडॉप्ट पेशेंट्स अभियान शुरू किया गया. इस अभियान के तहत सोशल मीडिया के जरिए टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लेने की अपील की जाती है. अगर कोई बच्चे को गोद लेने में रुचि दिखाता है तो उसे बच्चे की पूरी जानकारी दी जाती है. यहां से बच्चे की जिम्मेदारी गोद लेने वाले की हो जाती है. उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चा समय पर अपनी दवाएं ले रहा है.

टीबी मरीज को गोद लेने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है. कोई यदि टीबी पीड़ित बच्चे को गोद लेना चाहता है तो उसे फेसबुक पेज पर बनें टैब को क्लिक करना होता है. क्लिक करते ही गूगल फार्म का एक लिंक उसके मोबाइल पर आ जाता है.

इस गूगल फॉर्म को सम्मिट करने के बाद गोद लेने वाले के पास मेल पर टीबी मरीज की आईडी भेजी जाती है. इस आईडी के जरिए वह टीबी पेशंट की काउंसलिंग करता है. यह काउंसलिंग एक तय प्रारूप में की जाती है.

इसके अलावा जो लोग टीबी के मरीज को पौष्टिक आहार भेजना चाहते हैं उनके घर अस्पताल से एक व्यक्ति जाता है. यह व्यक्ति पौष्टिक आहार लेकर टीबी मरीज के घर पहुंचा देता है.
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First published: November 26, 2019, 2:38 PM IST
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