Teacher's day 2019: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से जुड़ीं कुछ खास बातें

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Updated: September 5, 2019, 7:30 AM IST
Teacher's day 2019: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन से जुड़ीं कुछ खास बातें
5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती होती है. उन्हीं की याद में हर साल इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती होती है. उन्हीं की याद में हर साल इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है.

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भारत में हर साल शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है. इस दिन छात्र अपने-अपने तरीके से शिक्षकों के प्रति प्यार और सम्मान जताते हैं. स्टूडेंट्स शिक्षकों को उपहार देते हैं. वहीं स्कूलों में शिक्षकों के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. जहां भारत में 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है वहीं अंतर्राष्ट्रीय टीचर्स डे का आयोजन 5 अक्टूबर को होता है.

5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती होती है. उन्हीं की याद में हर साल इस दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है. इसके पीछे की कहानी ये है कि एक बार उनके कुछ विद्यार्थी और दोस्तों ने उनके जन्मदिन को सेलिब्रेट करने का मन बनाया था. इस पर डॉ सर्वपल्ली ने कहा था कि मेरा जन्मदिन अलग से मनाने के बजाए अगर मेरा जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व महसूस होगा. उसके बाद से ही इन दिन को शिक्षक दिवस या टीचर्स डे के रूप में मनाया जाने लगा है. आइए जानते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन की कुछ अनकही बातों के बारे में-

दक्षिण भारत के तिरूतनी नाम के एक गांव में 1888 को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था. वह बचपन से ही मेधावी थे. उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. की उपाधि हासिल की और सन् 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हो गए.

डॉ. राधाकृष्णन ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शनशास्त्र से परिचित कराया. सारे विश्व में उनके लेखों की काफी प्रशंसा की गई.

शिकागो विश्वविद्यालय ने डॉ. राधाकृष्णन को तुलनात्मक धर्मशास्त्र पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था. वह भारतीय दर्शन शास्त्र परिषद्‍ के अध्यक्ष भी रहे थे. कई भारतीय विश्वविद्यालयों की तरह ही कोलंबो और लंदन विश्वविद्यालय ने भी अपनी-अपनी मानद उपाधियों से उन्हें सम्मानित किया था.

डॉ. राधाकृष्णन अपने राष्ट्रप्रेम के लिए विख्‍यात थे, फिर भी अंग्रेजी सरकार ने उन्हें सर की उपाधि से सम्मानित किया क्योंकि वह छल कपट से कोसों दूर रहते थे. उन्हें अपने ज्ञान पर बिल्कुल अहंकार नहीं था.

डॉ. राधाकृष्णन ने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. वह पेरिस में यूनेस्को नामक संस्था की कार्यसमि‍ति के अध्यक्ष भी बनाए गए. यह संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ का एक अंग है और
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पूरे संसार के लोगों की भलाई के लिए कार्य करती है.

सन् 1949 से सन् 1952 तक डॉ. राधाकृष्णन रूस की राजधानी मॉस्को में भारत के राजदूत के पद पर रहे. भारत रूस की मित्रता बढ़ाने में उनका भारी योगदान रहा था.

सन् 1952 में वह भारत के उपराष्ट्रपति बनाए गए. इस महान दार्शनिक, शिक्षाविद और लेखक को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश का सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न प्रदान किया था. 13 मई, 1962 को डॉ. राधाकृष्णन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बने. सन् 1967 तक राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने देश की अमूल्य सेवा की.

डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद और लेखक थे. वे जीवनभर अपने आपको शिक्षक मानते रहे. उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों के लिए समर्पित कर दिया.

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First published: September 4, 2019, 7:00 PM IST
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