प्यार के बारे में 10 मजेदार फैक्ट, जो आप नहीं जानते होंगे

प्यार में पड़ने में लगता है एक सेकंड का पांचवां हिस्सा Image Credit/ pexels-andre-furtado

प्यार में पड़ने में लगता है एक सेकंड का पांचवां हिस्सा Image Credit/ pexels-andre-furtado

प्यार इतना जटिल (Complicated ) और अवर्णनीय (Indescribable ) इसलिए है क्योंकि इसमें तीन भावनाएं (Emotions ) छुपी हुई हैं. ये हैं वासना, आकर्षण और लगाव. ये सभी भावनाएं मस्तिष्क में बनने वाले अलग-अलग हार्मोन की वजह से पैदा होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 8:14 AM IST
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प्यार एक ऐसा एहसास है जिसके बारे में लोग अलग-अलग तरह की भावनाओं को व्यक्त करते हैं. कवियों ने इस पर कविताएं लिखी हैं, तो गीतकारों ने न जाने कितने गीत लिख डाले हैं. लेकिन मनोवैज्ञानिक और मानव विज्ञानियों के विचार प्यार के बारे में कुछ अलग हैं. उनके अनुसार प्यार के सम्बन्ध में विज्ञान ये कहता है कि प्यार इतना जटिल (Complicated ) और अवर्णनीय (Indescribable ) इसलिए है क्योंकि इसमें तीन भावनाएं (Emotions ) छुपी हुई हैं. lifehack.org और theactivetimes.com में प्रकाशित खबर में, प्यार के बारे में उन फैक्ट्स के बारे में बताया गया है जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

तीन भावनाएं छुपी होती हैं प्यार में

प्यार को समझना इसलिए मुश्किल है क्योंकि इसमें तीन भावनाएं छुपी हुई हैं. फेमस जैविक मानवविज्ञानी हेलेन फिशर के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम के अनुसार, प्यार को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है और वो हैं वासना, आकर्षण और लगाव.  ये सभी भावनाएं मस्तिष्क में बनने वाले अलग-अलग हार्मोन की वजह से हैं. वासना प्यार में महसूस होने वाले आकर्षण और लगाव से अलग है. वासना के लिए सेक्स हार्मोन मेल में टेस्टोस्टेरोन और फीमेल में एस्ट्रोजन हार्मोन ज़िम्मेदार है. वहीं आकर्षण जुनून पर आधारित है जिसके लिए डोपामाइन और नॉरपेनेफ्रिन हार्मोन ज़िम्मेदार हैं. एक रोमांटिक रिश्ते के शुरुआती दिनों में ये हार्मोन रिलीज़ होता है. वहीं प्यार लगाव की थर्ड ग्रेड में आता है जिसके लिए हार्मोन ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन ज़िम्मेदार हैं. ये दीर्घकालिक संबंधों के दौरान रिलीज़ होता है जिसमें लगाव, दोस्ती, माता-पिता-शिशु के सम्बन्ध और पेट्स के प्रति प्यार महसूस होना भी शामिल है.

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 प्यार में पड़ने में लगता है एक सेकंड का सिर्फ पांचवां हिस्सा


किसी के साथ प्यार में पड़ने के एक सेकंड का सिर्फ पांचवां हिस्सा ही काफी होता है. ये हम नहीं कह रहे, जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस स्टडी में पाया गया कि प्यार में पड़ने के लिए केवल एक सेकंड का पांचवां हिस्सा लगता है.

प्यार में भूख और नींद होती है कम



आपने अक्सर महसूस किया होगा कि जब आप प्यार में होते हैं तो भूख का अहसास कम होता है और नींद भी कम आती है. दरअसल जब आप प्यार और आकर्षण के दौर में होते हैं तो आपकी बॉडी में डोपामाइन और नॉरपेनेफ्रिन हार्मोन ज्यादा मात्रा में रिलीज़ होते हैं. जिसके रिलीज़ होने पर आप ख़ुशी और उत्साह महसूस करते हैं जिससे भूख कम लगने और नींद न आने की स्थिति बनती है.

प्यार में होने पर खुद में होता है बदलाव

प्यार में पड़ने के बाद लोगों में अक्सर बदलाव देखने को मिलता है. उनकी पसंद-नापसंद बदल जाती है और वो खुद का ख्याल रखने लगते हैं. जर्नल ऑफ पर्सनेलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि प्यार में पड़ने के बाद अलग-अलग तरह के इंट्रेस्ट भी लोगों में बढ़ने लगते हैं.

प्यार  पेन किलर की तरह करता है काम

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि प्यार की बहुत गहरी इमोशनल फीलिंग्स को पेन किलर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. यानि आपके दर्द को उस इंसान का साथ काफी हद तक कम करने में मदद करता है जिससे आप प्यार करते हैं.

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 अंधा होता है प्यार


जब आप प्यार में होते हैं तो आप अच्छे-बुरे की समझ से कुछ दूर हो जाते हैं. रिचर्ड श्वार्ट्ज और जैकलीन ओलड्स जो हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर और और डॉक्टर हैं जो एक मैरिड कपल हैं और  प्रेम के विकास का काफी समय से अध्ययन कर रहे हैं उन्होंने एक अध्ययन में, 'प्यार अंधा होता है' के पीछे के विज्ञान को सामने रखा है. उनके अनुसार प्यार की फीलिंग आपके अंदर से डर या किसी भी तरह की निगेटिव फीलिंग को ख़त्म कर देती है क्योंकि ये आपकी उस नर्व को डिएक्टिवेट कर देती है जो इस तरह की फीलिंग के लिए ज़िम्मेदार होती है. इसलिए जब आप प्यार में पड़ना शुरू करते हैं, तो महत्वपूर्ण आकलन करने की आपकी क्षमता कम हो जाती है.

प्यार करता है बीमार

जब आप प्यार में होते हैं तो कभी-कभी आप खुद को तनाव में महसूस करते हैं जो आपको बीमार फील करवाता है. हालांकि यह साबित नहीं हुआ है कि प्यार शारीरिक रूप से बीमार बनाता है लेकिन हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मनोचिकित्सा के एसोसिएट प्रोफेसर रिचर्ड शवार्ट्ज के अनुसार, प्यार के दौरान कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है. कोर्टिसोल एक तनाव हार्मोन है जो आपकी इम्यूनिटी को कमज़ोर करता है जिससे बीमार होने की संभावना रहती है.

केयर और आभार से आता है रिश्तों में सुधार

हर कोई चाहता है कि उसकी देखभाल और सराहना की जाये साथ ही छोटी-छोटी चीज़ों के लिए आभार भी व्यक्त किया जाये. अध्ययनों में पाया गया है कि आभार वास्तव में रिश्तों को बेहतर बना सकता है. जिन जोड़ों ने अपने साथी का आभार व्यक्त करने के लिए समय लिया, उन्होंने अपने साथी के प्रति खुद को ज्यादा सकारात्मक महसूस किया साथ ही अपने रिश्ते को भी गंभीरता से लिया.

प्यार में पड़ने पर दिमाग के कई हिस्से करते हैं काम

जब आप किसी के साथ प्यार में पड़ते हैं तो दिमाग के कई हिस्से काम करते हैं. एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं की टीम ने खुलासा किया है कि मस्तिष्क के 12 क्षेत्र एक साथ उत्सर्जित करने वाले रसायनों को जारी करने के लिए काम करते हैं. रसायनों के डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन, एड्रेनालाईन और वैसोप्रेसिन हाई सेंसेशन को महसूस करते हैं.

दिल नहीं बल्कि दिमाग पड़ता है प्यार में

प्यार में दिल पड़ता है या दिमाग ये बात स्पष्ट नहीं हो सकी है लेकिन सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टेफ़नी ऑर्टगेट का मानना है कि यह काम दिमाग का है हालांकि इसमें दिल भी शामिल है. जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन में लिखा है.  प्यार में पड़ने पर  दिमाग के कुछ हिस्सों में सक्रियता दिल में उत्तेजना पैदा कर सकती है जैसे पेट में तितलियां. कुछ लक्षण जिन्हें हम दिल के एक्सप्रेशन के रूप में महसूस करते हैं, कभी-कभी मस्तिष्क से आ सकते हैं.
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