World Hepatitis Day 2020: हेपेटाइटिस के बारे में ये 5 बातें आपको जाननी चाहिए

आज दुनिया में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मानाया जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में करीब 32 करोड़ 50 लाख लोग हेपेटाइटिस इंफेक्शन (Hepatitis infection) का शिकार हैं. इस बीमारी के साथ ही ये लोग जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं.

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    World Hepatitis Day 2020: आज 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे है. विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के आंकड़ों पर गौर करें तो दुनियाभर में करीब 32 करोड़ 50 लाख लोग हेपेटाइटिस इंफेक्शन का शिकार हैं और इसी के साथ जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं. हेपेटाइटिस एक ऐसा इन्फेक्शन है, जो शरीर के लिवर को प्रभावित करता है. लिवर इंसान के शरीर के अंदर मौजूद सबसे बड़ा अंग है. लिवर शरीर की विभिन्न क्रियाओं में मदद करता है, जैसे- खाना पचाने में, एनर्जी को जमा करके रखने में और शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को डीटॉक्स करने में. हेपेटाइटिस की समस्या होने पर लिवर में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और जलन की समस्या हो जाती है, जिस कारण लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने लगता है और यहां तक कि लिवर कैंसर का भी खतरा हो सकता है.

    28 जुलाई को हर साल दुनियाभर में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है और इस दिन का मकसद है हेपेटाइटिस बीमारी के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाना. इस मौके पर हम आपको हेपेटाइटिस बीमारी के बारे में वो 5 बातें बता रहे हैं जिसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए:

    1. हेपेटाइटिस के 5 संक्रामक प्रकार
    हेपेटाइटिस बीमारी के आमतौर पर 5 प्रकार या strain हैं जो इंसानों को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई. हेपेटाइटिस ए और ई दूषित खाना या पानी की वजह से होता है, जिसमें यह वायरस मौजूद हो. तो वहीं, हेपेटाइटिस बी, सी और डी संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों यानी बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क में आने पर होता है जैसे- खून, सीमन, लार आदि और इन्हें यौन संचारित यानी सेक्शुअली ट्रांसमिटेड बीमारी भी माना जाता है. अब तक वैज्ञानिकों ने सिर्फ हेपेटाइटिस ए और बी का टीका तैयार किया है. हेपेटाइटिस के पांचों स्ट्रेन में से हेपेटाइटिस सी सबसे ज्यादा खतरनाक और जानलेवा माना जाता है.

    2. हेपेटाइटिस के सभी प्रकार संक्रामक नहीं हैं
    हेपेटाइटिस बीमारी के दो प्रकार या स्ट्रेन ऐसे भी हैं जो गैर-संक्रामक हैं, इसका मतलब है कि यह एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता. इसके दो प्रकार हैं:

    अल्कोहोलिक हेपेटाइटिस: इस तरह का हेपेटाइटिस उन लोगों में होता है जो कई सालों तक लगातार बहुत ज्यादा मात्रा में शराब या अल्कोहल का सेवन करते हैं. इन लोगों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखते और उनमें अचानक ही जॉन्डिस और लिवर खराब होने की स्थिति देखने को मिलती है. इन लोगों को लिवर कैंसर होने का भी खतरा अधिक होता है.

    ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस: इस तरह के हेपेटाइटिस में शरीर की इम्यून कोशिकाएं इस तरह से लिवर पर हमला करना शुरू करती हैं कि वह बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है और काम करना बंद कर देता है. यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन बेहद खतरनाक भी.

    3. हेपेटाइटिस के जोखिम कारक
    ऐसे कई लोग हैं जिन्हें हेपेटाइटिस होने का खतरा अधिक होता है और इसलिए उन्हें नियमित रूप से अपनी जांच करवानी चाहिए:

    • स्वास्थ्यकर्मी जैसे- डॉक्टर, नर्स और लैब प्रफेशनल.

    • वैसे लोग जो हेपेटाइटिस प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करते हैं.

    • जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है.

    • वैसे लोग जो किसी तरह की दवा या ड्रग्स को इंजेक्शन के जरिए लेते हैं.

    • जिन लोगों को नियमित रूप से खून चढ़ाने की जरूरत होती है.

    • वैसे लोग जो नियमित रूप से रक्तदान करते हैं.

    • वैसे लोग जो हेपेटाइटिस के मरीजों के साथ यौन संबंध बनाते हों.

    • जिन लोगों को एचआईवी का इंफेक्शन हो.

    • वैसे बच्चे जिनकी मां हेपेटाइटिस से संक्रमित हो.

    • वैसे लोग जिन्होंने टैटू बनवाया हो या पियर्सिंग करवा रखी हो.


    4. हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षण
    आमतौर पर, हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीज में किसी तरह का कोई खास लक्षण नजर नहीं आता और तब तक वो अपना डायग्नोसिस भी करवाने नहीं जाते हैं जब तक उनका लिवर पूरी तरह से काम करना बंद नहीं कर देता (लिवर फेलियर). हालांकि कुछ लोगों में ये निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं:

    • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द

    • बहुत तेज बुखार

    • बीमार महसूस करना

    • थकान

    • भूख न लगना

    • पेट में दर्द

    • गहरे पीले रंग की पेशाब

    • त्वचा में खुजली

    • त्वचा और आंखों में पीलापन (पीलिया के संकेत)

    • जी मिचलाना और उल्टी आना

    • डायरिया


    बीमारी अगर बाद के स्टेज में पहुंच जाए तो मरीज में कई और गंभीर लक्षण भी नजर आ सकते हैं जैसे- पैर और टखने में सूजन, भ्रम या असमंजस की स्थिति और उल्टी या मल में खून आना।

    5. हेपेटाइटिस को होने से रोका जा सकता है
    वैसे तो अब तक सिर्फ हेपेटाइटिस ए और बी की के लिए ही टीकाकरण मौजूद है, बावजूद इसके आप छोटी-छोटी सावधानियां बरतकर हेपेटाइटिस के बाकी प्रकारों को भी होने से रोक सकते हैं:

    • कच्चा खाना बिलकुल न खाएं

    • बिना फिल्टर किया हुआ दूषित पानी बिलकुल न पिएं

    • अपना टूथब्रश, रेजर और हाइजीन से जुड़े दूसरे उत्पादों को किसी के भी साथ शेयर न करें

    • सुरक्षित सेक्स के लिए कॉन्डम और डेंटल डैम का इस्तेमाल करें


    अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हेपेटाइटिस क्या है, कारण, लक्षण, इलाज के बारे में पढ़ें।

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