इन पंक्तियों को पढ़कर इस किताब को खरीदने से खुद को नहीं रोक पाएंगे

'अ थाउजेंड स्पेंडिड संस' तानाशाही और युद्ध भूमि में तब्दील हुए अफगानिस्तान में महिलाओं की तत्कालिक स्थिति पर आधारित कहानी है

Prerana Kumari | News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 5:03 PM IST
इन पंक्तियों को पढ़कर इस किताब को खरीदने से खुद को नहीं रोक पाएंगे
अ थाउजेंड स्पेंडिड संस तानाशाही और युद्ध भूमि में तब्दील हुए अफगानिस्तान में महिलाओं की तत्कालिक स्थिति पर आधारित कहानी है
Prerana Kumari | News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 5:03 PM IST
न ही आज महिला दिवस है और न ही ख़ालेद हुसैनी का जन्मदिन. इसके बावजूद हम उनकी बात करेंगे, क्योंकि हुसैनी की रचना किसी खास दिन पर याद किए जाने की मोहताज नहीं. हुसैनी हर रोज पढ़े जा सकते हैं, उनकी रचना हर काल में जीवंत रखी जा सकती है. हुसैनी की रचना भविष्य में इतिहास की वो धरोहर साबित होगी जिसे ढंग से संजो कर रख लेना चाहिए. इनके बारे में लिखने बैठो तो भावनाएं नियंत्रित नहीं हो पातीं, कीबोर्ड की गति खुद-ब-खुद तेज हो जाती है.

अफगानिस्तान में जन्में हुसैनी ने कुल 4 उपन्यास लिखे हैं. इन चारों उपन्यास का केंद्र अफगानिस्तान, युद्ध, अहिंसा, रेफ्यूजी, महिलाएं और बच्चे रहे हैं. हुसैनी एक उपन्यासकार के साथ ही साथ डॉक्टर भी हैं. विकिपीडिया के अनुसार अपनी पहली उपन्यास 'द काईट रनर' को लिखने के लिए हुसैनी डेढ़ साल तक हर सुबह चार बजे उठते थे. इसके बाद पूरे दिन अस्पताल में रोगियों को इलाज करते थे. 'द काईट रनर' दो अफगान लड़कों की कहानी है, जो बचपन के दोस्त हैं. लेकिन अफगान में चल रहे युद्ध की आपदाओं में अलग हो जाते हैं. इसके बाद उन दोनों की जिंदगी दो अलग-अलग मोड़ पर खड़ी हो जाती है. पूरी कहानी उनकी इस बदली हुई जिंदगी के ईर्द-गिर्द ही सिमटी हुई है.

वहीं 'अ थाउजेंड स्पेंडिड संस' तानाशाही और युद्ध भूमि में तब्दील हुए अफगानिस्तान में महिलाओं की तत्कालिक स्थिति पर आधारित कहानी है. इस उपन्यास की जितनी तारीफ की जाए कम है. एक प्रशंसक के रूप में यह दावा किया जा सकता है कि यह किताब आप एक बार पढ़नी शुरू कर दें तो आंखें उठाने का मन तक नहीं करता.



हमने यहां इस किताब की कुछ पंक्तियों को इकट्ठा किया है, जिसे पढ़ने के बाद आप यकीनन इसे खरीदकर पढ़ने को मजबूर हो जाएंगे-

'एक समाज के सफल होने की कोई संभावना नहीं, जबतक उसकी महिलाएं अशिक्षित रहेंगी'

 
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'शादी प्रतीक्षा कर सकती है, पढ़ाई नहीं'

 

'एक आदमी का दिल मां के गर्भ की तरह नहीं होता. यह कठोर होता है, कठोर. इससे खून नहीं निकलेगा ना ही यह खुद में खिंचाव करके तुम्हारे लिए जगह बनाएगा'

 

'तुम देखो, कुछ चीजें मैं तुम्हें सिखा सकता हूं. कुछ तुम किताबों से सीखते हो. लेकिन ऐसी कई चीजें हैं,जिसे तुम्हें खुद देखना और महसूस करना होगा.'

 

'एक महिला जो नदी के बीच में बिछी चट्टान की तरह होती है, जो बिना किसी शिकायत के धीरज धरती है, उसकी कुशलता पानी की लहरों से दूषित नहीं होती, बल्कि आकार लेती है.'

 

'कोई भी उसकी छत पर चमचमाते चंद्रमाओं को नहीं गिन सकता था, ना ही उन हजार शानदार सूर्यों को जो उसकी दीवारों के पीछे छिपते हैं'

 

हुसैनी बॉलीवुड के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं. एक दफ़े एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान में हिंसा और बॉलीवुड दोनों से ही आप बच नहीं सकते.
First published: July 21, 2019, 2:31 PM IST
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