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    कोरोना के बढ़ते संक्रमण में इम्‍यून सिस्‍टम मजबूत बनाए रखेंगे ये योगासन

    योगाभ्‍यास करने से शरीर में एनर्जी का संचार होता है और बीमारियों से बचाव रहता है.
    योगाभ्‍यास करने से शरीर में एनर्जी का संचार होता है और बीमारियों से बचाव रहता है.

    आज के फेसबुक लाइव योगा सेशन (Live Yoga Session) में फुल बॉडी स्‍ट्रेंथ वाले योगाभ्‍यास सिखाए गए. इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए जहां हेल्दी डाइट (Healthy Diet) जरूरी है, वहीं नियमित तौर पर योगाभ्‍यास भी करना चाहिए.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 21, 2020, 10:17 AM IST
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    कोरोना (Corona) का प्रभाव एक बार फिर से बढ़ रहा है. ऐसे में किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी है कि शरीर की इम्यूनिटी (Immunity) मजबूत हो. इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए जहां हेल्दी डाइट (Healthy Diet) जरूरी है, वहीं नियमित तौर पर योगाभ्‍यास भी करना चाहिए. योगाभ्‍यास करने से शरीर में एनर्जी का संचार होता है और कई तरह की बीमारियों से बचाव रहता है. आज के फेसबुक लाइव योगा सेशन (Live Yoga Session) में हमने फुल बॉडी स्‍ट्रेंथ वाले योगाभ्‍यास किए. इसमें बताया गया कि बॉडी की क्षमता के अनुसार ही योगाभ्‍यास करें. इनसे शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम भी बेहतर रहता है. ऐसे में शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिन में एक घंटा योग जरूर करें. योग करने के दैरान सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें. ये आसन शरीर में स्फूर्ति लाता है. योग करने से पहले कुछ सूक्ष्म आसन भी जरूर करें जिससे कि शरीर योग के लिए तैयार हो जाए.

    चक्रासन
    इस आसन को करते समय हथेलियों को नीचे स्पर्श करते समय जल्दबाजी न करें. चक्रासन करने के कई लाभ होते हैं. इस आसन के अभ्यास से पेट की गड़बड़ियां दूर होती हैं. साथ ही कमर पतली और लचकदार बनती है. इस आसन से बांहों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं. टांगें, घुटने चुस्त होते हैं. जांघें और पिण्डलियां भी मजबूत बनती हैं. इसके अलावा इसे करने से बांहों का ऊपरी भाग भी सशक्त होता है. पेट की चर्बी कम होती है.


    शशकासन


    शशक का का अर्थ होता है खरगोश. इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं. इस आसन को कई तरीके से किया जाता है. सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें. कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें. फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें. फिर माथा भी भूमि पर टिका दें. कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर फिर से वज्रासन की स्थिति में आ जाएं.

    शशकासन के फायदे
    हृदय रोगियों के लिए यह आसन लाभदायक है. यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करके आंत, यकृत, अग्न्याशय व गुर्दों को बल प्रदान करता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन जैसे मानसिक रोग भी दूर हो जाते हैं.

    ये भी पढ़ें- शरीर को लचीला और मजबूत बनाएं रखेंगे ये योगासन

    चतुरंग दंडासन
    चतुरंग दंडासन के अनके शारीरिक लाभ होते हैं. इससे जहां शरीर की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं, वहीं इससे हाथों की कलाइयां मजबूत होती हैं. ऐसे में इसे अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें.

    चतुरंग दंडासन के फायदे
    यह आसन हाथ और कलाइयों को मजबूत बनाता है
    इसे करने से शरीर की मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है
    चतुरंग दंडासन से शरीर में स्थिरता आती है और लचीलापन बना रहता है

    चक्रासन
    इस आसन को करते समय हथेलियों को नीचे स्पर्श करते समय जल्दबाजी न करें. चक्रासन करने के कई लाभ होते हैं. इस आसन के अभ्यास से पेट की गड़बड़ियां दूर होती हैं. साथ ही कमर पतली और लचकदार बनती है. इस आसन से बांहों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं. टांगें, घुटने चुस्त होते हैं. जांघें और पिण्डलियां भी मजबूत बनती हैं. इसके अलावा इसे करने से बांहों का ऊपरी भाग भी सशक्त होता है. पेट की चर्बी कम होती है.

    सेतुबंध आसन
    इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं. इसके बाद अपने घुटनों को मोड़ें. अब गहरी सांस लेते हुए अपनी कमर को उठाएं. इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें. इस आसन को करने के दौरान धीरे धीरे सांस लें, सांस छोड़ते रहें. फिर सांस को छोड़ते हुए जमीन पर आ जाएं. आप इसे कम से कम पांच बार कर सकते हैं.

    अनुलोम विलोम प्राणायाम
    सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

    इसे भी पढ़ें- कंधे को मजबूत बनाएंगे ये योगासन, पीठ और कमर दर्द भी होगा दूर

    अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
    फेफड़े मजबूत होते हैं
    बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
    वजन कम करने में मददगार
    पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
    तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
    गठिया के लिए भी फायदेमंद
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