इस तरह करें प्रीमेच्योर बच्चों की देखभाल, अपनाएं ये खास टिप्स

मां अपना दूध बोतल में कर उन्हें साफ चम्मच से पिलाएं. इससे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास होगा साथ ही उनकी इम्यूनिटी भी बढ़ेगी. शिशु को बाजार का दूध बिल्कुल न पिलाएं.

कमजोर (Weak) होने के कारण प्रीमेच्योर शिशुओं (Premature Babies) को मां का दूध (Milk) पीने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इन बच्चों को सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है.

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जिन बच्चों (Child) का जन्म 37 हफ्तों से पहले होता है उन्हें प्रीमेच्योर बेबी (Premature Baby) कहा जाता है. ऐसे शिशु पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं और वह शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर हो जाते हैं. आमतौर पर एक स्वस्थ बच्चे का जन्म 9 महीने में होता हैं. हर साल 15 करोड़ प्रीमेच्योर बेबी का जन्म होता है. इन बच्चों को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है. आइए जानते हैं कैसे आप प्रीमिच्योर शिशु की देखभाल कर सकते हैं.

मां का दूध है जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार, कमजोर होने के कारण प्रीमेच्योर शिशुओं को मां का दूध पीने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इन बच्चों को सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है. लेकिन उनको मां का दूध ही पिलाना जरूरी होता है. इसलिए मां अपना दूध बोतल में कर उन्हें साफ चम्मच से पिलाएं. इससे शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास होगा साथ ही उनकी इम्यूनिटी भी बढ़ेगी. शिशु को बाजार का दूध बिल्कुल न पिलाएं.

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साफ-सफाई का रखें खास ख्याल
प्रीमेच्योर शिशुओं में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है. इसलिए उनके आसपास का वातावरण पूरी तरह से साफ रखें. बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं की बोतल को हर बार गर्म पानी से अच्छी तरह धोएं. बच्चें को गोद में लेने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं. शिशु वाले कमरें में झाड़ू की जगह गीले कपड़े से साफ करें.

सही ढंग से सुलाएं
अस्पताल में बच्चे को संभालने की ज्यादा जिम्मेदारी नर्स की होती है. लेकिन घर आने के बाद यह सारी जिम्मेदारी आप पर आ जाती है. कोशिश करें कि आप अपने बच्चे की समय-समय पर करवटें बदलते रहें ताकि उनकी गर्दन की माशपेशियां मजबूत हो सके. उनके सोने के समय का भी ध्यान रखें.

नर्स की मदद लें
यह बात तो सभी जानते हैं की सामान्य बच्चों की तुलना में प्रीमेच्योर बच्चों की देखभाल करना ज्यादा जरूरी होता है. इसमें आप अस्पताल की नर्स से भी सलाह ले सकती हैं कि कैसे बच्चों को उठाना, सुलाना और उनका डायपर बदलना चाहिए. बच्चें को उठाते समय उनकी गर्दन पर हाथ जरूर लगाएं. क्योंकि ऐसा न करने से शिशु की गर्दन की हड्डी को चोट पहुंच सकती है.

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कमरे के तापमान पर ध्यान दें
शिशु वाले कमरे का तापमान न तो ज्यादा ठंडा होना चाहिए और न ही ज्यादा गर्म. साथ ही आप अपने शिशु को अच्छे से ड्रेसअप करें ताकि उसे ठंड न लगे. आप सर्दी में शिशु को कंबल में अच्छे से रखें. गर्मी में उन्हें पंखे की सीधी हवा से दूर रखें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें सांस लेने में तकलीफ होगी.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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