अपना शहर चुनें

States

कोविड-19 के दौरान लोगों ने मिस किया 'हग' और 'टच' को

हमारे पास औसतन पांच दोस्त होते हैं, जिनका स्पर्श हम चाहते हैं और जिनके कंधे पर सर रखकर हम रो सकते हैं.
हमारे पास औसतन पांच दोस्त होते हैं, जिनका स्पर्श हम चाहते हैं और जिनके कंधे पर सर रखकर हम रो सकते हैं.

पिछले एक साल से कोविड-19 (Covid-19) के चलते लोगों को टच (Touch) से महरूम रहना पड़ा है, जिसने लोगों के दिल-दिमाग पर खासा असर डाला है. खासकर उन लोगों पर जिन्होंने कोविड के पीरियड में अकेलेपन को जिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 7:07 PM IST
  • Share this:
बहुत ज्यादा ख़ुशी (Happiness) का एहसास (Feeling) हो या गम का, एक बात का मन हर स्थिति में होता है, वो है गले लगना (Hugging). लेकिन किसी वजह से अगर लम्बे समय तक ऐसा न हो सके तो कैसा महसूस होगा? जाहिर है चिड़चिड़ापन बढ़ेगा और आप मानसिक रूप से खुद को फिट महसूस नहीं करेंगे. दरअसल टच यानी स्पर्श, एक ऐसा एहसास है, जिसको हर कोई फील करना चाहता है. फिर चाहे इंसान हो या जानवर. The Guardian की खबर के मुताबिक टच के इस एहसास की आदत इंसान को तब से ही लग जाती है, जब भ्रूण मां की कोख में होता है. लेकिन पिछले तकरीबन एक साल से कोविड-19 के चलते लोगों को इस टच से महरूम रहना पड़ा है, जिसने लोगों के दिल-दिमाग पर खासा असर डाला है. खासकर उन लोगों पर जिन्होंने कोविड के पीरियड में अकेलेपन को जिया है. इस पीरियड के दौरान अकेले रहने और टच के एहसास की कमी को महसूस करने वाले कुछ लोगों ने अपने अनुभवों को साझा किया है.

प्रोफेसर फ्रांसिस मैकग्लोन, जो लिवरपूल जॉन मूरेस विश्वविद्यालय में एक न्यूरोसाइंटिस्ट और स्नेह स्पर्श के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति हैं, कहते हैं- जब हम अकेले होते हैं, तो ये महसूस करते हैं कि हमारे जीवन में किसी चीज़ की कमी है, लेकिन ये महसूस नहीं कर पाते कि जिस चीज की कमी को हम महसूस कर रहे हैं वो टच है. हम सच्चाई को जानते हुए भी इस बात को नहीं मानते कि हमें जो चाहिए वो स्पर्श है.

इसे भी पढ़ेंः ये घरेलू उपाय बढ़ाएंगे आपकी भूख, खाने की तरफ दौड़ते हुए आएंगे आप



साउथ लंदन में अकेले रहने वाली 40 वर्षीय नीना स्मिथ बताती हैं- मुझे 2018 में रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी जिसके बाद मुझे काफी लम्बे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा था. दर्द इतना ज्यादा था की किसी का मुझे टच करना भी मुश्किल था, जिसके कारण मैं उनको हग नहीं कर सकी जो मुझसे मिलने आए. लेकिन कई महीनों बाद जैसे ही मैं ठीक होने लगी और मुझे लगा की मैं बाहर जा सकती हूं, लोगों से मिल सकती हूं, तभी लॉकडाउन लग गया. मैंने उस पीरियड को अकेले और बिना किसी को टच किए किस तरह से जिया है मैं बता नहीं सकती.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में मनोचिकित्सा तंत्रिका विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. कतेरीना फोटोपालु कहते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम शरीर की मुख्य जरूरतों को पूरा करने के लिए, देखभाल करने वाले पर पूरी तरह निर्भर हैं. इसी के चलते हम टच को बहुत महसूस करते हैं. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के विकासवादी मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर रॉबिन डनबर कहते हैं- स्पर्श का हमारे मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है. जब हम फैमिली या दोस्तों के साथ होते हैं तो हम जितना महसूस करते हैं उससे अधिक एक दूसरे को स्पर्श करते हैं.

इसे भी पढ़ेंः प्रेग्नेंट महिलाएं भूलकर भी न करें घर के ये काम, हो सकती है बड़ी परेशानी

वे कहते हैं- डनबार की रिसर्च में पाया गया है कि हमारे पास औसतन पांच दोस्त होते हैं, जिनका स्पर्श हम चाहते हैं और जिनके कंधे पर सर रखकर हम रो सकते हैं. यह भी चौंकाने वाली बात है कि 2020 में बीबीसी और वेलकम कलेक्शन सर्वे के दौरान 112 देशों के 40,000 लोगों ने स्पर्श का वर्णन करने के लिए जिन तीन शब्दों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया था वो शब्द आराम, गर्म और प्यार थे. जिसमें टच का फील साफ नजर आ रहा था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज