जर्मन चित्रकार एलन को क्यों इतना प्यार है हिंदुस्तानी साइकिल से?

भारत में साइकिलिंग को क्लास से जोड़ के देखा जाता है. जिसके पास कुछ पैसे आए उसे बस मोटर साइकिल और कार भाए.

News18Hindi
Updated: November 25, 2017, 8:24 AM IST
जर्मन चित्रकार एलन को क्यों इतना प्यार है हिंदुस्तानी साइकिल से?
साइकिल वाली लड़की (image- instagram) एलेन शॉ
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Updated: November 25, 2017, 8:24 AM IST
भारत में साइकिलिंग को क्लास से जोड़ के देखा जाता है. जिसके पास कुछ पैसे आए उसे बस बाइक और कार भाए. साइकिल से कमाने वाले नहीं चलते. बस निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के लोग साइकिल की सवारी करते हैं. सीधे तौर पर कहें तो साइकिल लोग मजबूरी में चलाते हैं, जिनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वे बाइक या कार खरीद सकें.

एलेन शॉ की उम्र यही कोई पांच-छह बरस की रही होगी जब उनकी साइकिल चोरी हो गई. नाम से चौंकिए मत उनका जन्म बिहार के जमालपुर गांव में हुआ था. परिवार तो बड़ा था लेकिन साइकिल एक.

एलन के पिता पुजारी थे, घर की इकलौती साइकिल खरीदने के लिए उन्हें तीन साल तक पैसे बचाने पड़े और एक दिन उनकी साइकिल चोरी हो गई. कई हफ्ते तक बेचारे घर के बाहर आने-जाने वाले लोगों की साइकिलों में अपनी साइकिल खोजा करते थे.

एलन बड़े हुए तो कार, बाइक, प्लेन सबकी सवारी की. 2008 में जब जर्मनी में गए तो वहां उन्हें अलग ही नजारा देखने को मिला. उन्होंने देखा कि यूरोप में तो हर आय वर्ग के लोग साइकिल चलाते हैं.

एलन को ये बात बहुत पसंद आई. उन्हें एहसास हुआ कि पहले वे गलत सोचते थे कि साइकिल गरीबों की सवारी है. 2012 में एलन देश में वापस आए और उन्होंने दिल्ली से नौ सौ किलोमीटर की दूरी तय करते हुए उदयपुर राजस्थान पहुंचे. ऐसा उन्होंने खुद का बचपन जीने के लिए किया.

उन्होंने अपनी ट्रिप के दौरान वॉटर स्केच बनाए जिसकी प्रदर्शनी अब देश भर में लगाई जाएगी. बाइसकिल स्टोरीज फ्रॉम इंडिया नाम से होने जा रही एक प्रदर्शनी में एलन के पिता जूलियस अशोक शॉ की कविताओं के साथ उनकी पेंटिंग्स लगाई जाएंगी. देखिए उनकी कुछ बेहतरीन पेंटिंग्स-




(डाकिया हो, दूध वाला हो, हॉकर या जिसे फ़िटनेस पसंद हो उसे साइकिल सबकी ज़रूरत है.)

 




मेरी साइकिल सिर्फ मेरी है, हाथ मत लगाना.




जन्नत का तो पता नहीं पर मेरी साइकिल मुझे मेरे घर तक तो पहुंचा ही देती है.




साथ तुम्हारा मुझे मिले तो फिर ये क़दम कहीं भी जाएं.



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ग्रामीण भारत में ऐसे सीन अक्सर देखने को मिल जाते हैं.



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मैं और मेरी परछाईं.



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शुक्रिया एलेन. इतनी ख़ूबसूरत तस्वीरें बनाने के लिए. आपकी तस्वीरों में भारत झांकता है.
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