जन्माष्टमी से पहले बेहद खूबसूरत हो जाती है भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका, परिवार के साथ जा सकते हैं घूमने

ऐसी मान्यता है कि यह द्वारका भारत के सबसे पुराने व्यवस्थित शहरों में से एक है. यहां की प्राचीन धरोहर देखकर आपको भी इसके गौरवशाली इतिहास का अहसास होगा

ऐसी मान्यता है कि यह द्वारका भारत के सबसे पुराने व्यवस्थित शहरों में से एक है. यहां की प्राचीन धरोहर देखकर आपको भी इसके गौरवशाली इतिहास का अहसास होगा

ऐसी मान्यता है कि यह द्वारका भारत के सबसे पुराने व्यवस्थित शहरों में से एक है. यहां की प्राचीन धरोहर देखकर आपको भी इसके गौरवशाली इतिहास का अहसास होगा

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यूं तो भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका हमेशा ही भक्तों के आकर्षण का केंद्र होती है. लेकिन जब जन्माष्टमी करीब हो तब इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. मॉनसून के सीजन में द्वारका अद्भुत हो जाती है. इस समय यहां का तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस के बीच ही होती है. मॉनसून के मौसम में ऐसा लगता है कि अभी-अभी पूरे शहर को पानी से धोया गया हो. अगर आप द्वारका घूमने और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो बेहतर है कि आप पहले वहां का महत्व समझ लें.

द्वारका क्यों है महत्वपूर्ण

द्वारका की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने की थी. ऐसी मान्यता है कि यह द्वारका भारत के सबसे पुराने व्यवस्थित शहरों में से एक है. यहां की प्राचीन धरोहर देखकर आपको भी इसके गौरवशाली इतिहास का अहसास होगा. प्राचीन द्वारका का बड़ा हिस्सा समुद्र में समा गया था लेकिन कुछ अंश बाकी रह गया था. यहां आज भी कुछ अवशेष देखने को मिलते हैं.



वैसे कहा जाता है कि द्वारका में भी दो हिस्से हैं. एक वो द्वारका है जो जमीन पर है जिसके बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपनी प्रजा से यहीं मिलते थे जिसे बेट द्वारका कहते हैं और दूसरी द्वारका वहीं से कुछ दूरी पर है जो पानी के अंदर है. समंदर के अंदर, जहां भगवान श्रीकृष्ण निवास करते थे.
समुंद में डूब गई थी द्वारका 

डूबी हुई द्वारका की खोज सालों से हो रही है. पहले हो चुके शोध में यह तो सामने आया कि समुद्र में एक पुरातन शहर के अवशेष हैं. क्योंकि वहां दिखने वाली संरचनाएं प्राकृतिक नहीं थीं बल्कि मानव निर्मित थी. समुद्र की गहराई से स्कूबा डाइविंग के जरिए वैज्ञानिकों ने कई पत्थर और संचरचनाओं के नमूने एकत्र किए हैं. जिन पर शोध जारी है.

कहां-कहां घूम सकते हैं

अगर आप द्वारका जा रहे हैं तो आप द्वारकाधीश मंदिर, गोमती तालाब, निष्पाप कुंड, रणछोड़ मंदिर, दुर्वासा मंदिर, कुशेश्वर मंदिर, शारदा मठ, चक्र तीर्थ , हनुमान टीला, बेट द्वारका घूम सकते हैं.

कैसे पहुंचे द्वारका 

द्वारका आप सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जा सकते हैं. द्वारका देश के बड़े राजमार्गों से जुड़ा हुआ है. अगर आप रेल मार्ग से जाना चाहते हैं तो आपको अहमदाबाद से सीधी ट्रेन मिल जाएगी. अगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं तो यहां से नजदीकी हवाई अड्डा जामनगर में है जो द्वारका से 135 किमी दूर है.
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