लाइफ कोच: क्या पता फ़िजी में मिलने वाले फलों की तस्वीर उनके मुर्दा सपनों में रस भर दे !

किसी मशहूर आयरिश बिल्डिंग की बजाए उसने कब्रगाह के फूलों की तस्वीर वाला ये पोस्टकार्ड चुना. जिस पोस्टकार्ड को देखकर मेरे साथ की कई भौंहें सिकुड़ गई थीं, उसी को देखकर अक्सर जाने कितने 'हवाई' थैंक्यू दोस्त को भेजती हूं.

Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: December 29, 2017, 9:15 PM IST
लाइफ कोच:  क्या पता फ़िजी में मिलने वाले फलों की तस्वीर उनके मुर्दा सपनों में रस भर दे !
वे पोस्टकार्ड पर अपने किसी आत्मीय को संदेश लिख रहे होते हैं
Mridulika Jha | News18Hindi
Updated: December 29, 2017, 9:15 PM IST
जब भी फ्रिज खोलने जाती हूं, सबसे पहले उस पोस्टकार्ड पर नजर जाती है जो एक दोस्त ने आयरलैंड से भेजी थी. कब्र पर फूलते वे पीले फूल मेरे किसी बेजान दिन में एकदम से पीले रंग की तितलियां भर देते हैं.

किसी मशहूर आयरिश बिल्डिंग की बजाए उसने कब्रगाह के फूलों की तस्वीर वाला ये पोस्टकार्ड चुना. जिस पोस्टकार्ड को देखकर मेरे साथ की कई भौंहें सिकुड़ गई थीं, उसी को देखकर अक्सर जाने कितने 'हवाई' थैंक्यू दोस्त को भेजती हूं.

घूमने जाने पर पोस्टकार्ड भेजना आज से लगभग तीन दशक पहले काफी लोकप्रिय हुआ करता था. यूरोपियन देश इसमें काफी आगे रहे. आज भी वहां सैलानी अपने हाथों में पोस्टकार्ड लिए दिख जाते हैं. आप सूरज की गुनगुनाहट में आईफोन लेकर लेटे रहने में सुकून पाते हैं, वहीं वे पोस्टकार्ड पर मोटी-किरची लिखावट में किसी आत्मीय को संदेश लिख रहे होते हैं.



सर्द-सफेद पहाड़, घने जंगलों का वहशीपन, सिर-से-सिर जुड़ाए धूसर पत्थर या सदियों की गर्द समेटे खंडहर- हर जगह पर लिखा पोस्टकार्ड एक अलग ही संदेश देता है.

जब भी कोई आपको कार्ड भेजता है तो कहीं बेहद धीरे लेकिन बेहद हसीन अंदाज में वो जता रहा होता है कि सैकड़ों मील दूर बैठकर भी आप उसकी यादों में हैं. मैं इस मामले में खुशकिस्मत रही.  लगभग गांव  से हूं तो 'शहर की हवा' नहीं के बराबर छू गई थी, लेकिन ननिहाल के कुछ सदस्य सौंदर्यबोध के मामले में काफी जहीन रहे. वे जहां भी घूमने जाते, वहां से पोस्टकार्ड भेजते. हालांकि तब बड़े ही पारंपरिक पोस्टकार्ड मुझे मिले लेकिन अरसे तक वे अलमारी के मेरे वाले कोने में सहेजकर रखे गए.

बाद में मौका मिलने पर मैंने भी उऋण होने की कोशिश की. जहां भी जाती, वहीं से कोई पोस्टकार्ड चुनती. सैलानियों को पसंद आने वाली जगहों और चीजों से अलग थोड़े हटकर पोस्टकार्ड.



एक बार किसी को एक कंकाल की तस्वीर पर 'कल' लिखकर भेजा तो कभी एक संग्रहालय में ऊंघते हुए कर्मचारी की तस्वीर पर 'बादशाहत' लिख भेजा. एक दोस्त के घर जाने पर उसके घर के एक कोने में मेरा एक पोस्टकार्ड भी फ्रेम में जड़ा देखा. न उसने कुछ कहा, न मैंने पूछा लेकिन खुद ही पक्का कर लिया कि अपनी इस आदत को छेड़ने-छोड़ने की कोई कोशिश नहीं करनी.

पोस्टकार्ड भेजते हुए आप कहीं न कहीं उस किसी और को भी अपने सफर में शामिल कर रहे होते हैं, जो घर पर है. अगर आप भी नए साल पर कहीं जाने की तैयारियां कर रहे हों तो जगह की यादगार बतौर
पोस्टकार्ड लेना न भूलें. ये किसी के लिए भी ले सकते हैं. पार्क में डगर-मगर चलने वाले उस झुर्रीदार चेहरे से लेकर उस काकी के लिए जो कभी अपने शहर से बाहर नहीं गई. या वो चेहरा, जिसके घर पर सभी ठसकदार मुंशी हैं लेकिन जो ट्रैवल ब्लॉग लिखकर जिंदगी बिताना चाहता हो.

हो सकता है कि फ़िजी में मिलने वाले रसीले फलों की तस्वीर राशन स्पेस में जिए जा रहे सपनों का सिर उठा दे और तमाम मजबूरियों को थैले में डालकर वे दुनिया की सैर को निकल पड़ें. 

आपके लिए भी एक अनजान देश या शहर में पोस्टकार्ड पोस्ट करने के लिए मेलबॉक्स तक जाना एक अलग सैर होगी. कांपते हाथों से अटपटी भाषा में लिखा कोई संदेश भले ही सौंदर्य की पहली कसौटी को पार न कर सके लेकिन उससे मीठा और सपने जगाने वाला संदेश शायद ही आपने कभी किसी को दिया हो!
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