मिलिए, 5 साल की बेबी 'अर्जुन' से, तीरंदाजी में बनाया रिकॉर्ड

News18Hindi
Updated: September 15, 2017, 9:26 AM IST
मिलिए, 5 साल की बेबी 'अर्जुन' से, तीरंदाजी में बनाया रिकॉर्ड
तीरंदाजी में बनाए नए कीर्तिमान (image: twitter)
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Updated: September 15, 2017, 9:26 AM IST
रोटियों के छोटे-छोटे टुकड़े प्लेट में रखना ताकि बच्चा आसानी से खा सके. या फिर स्कूल से लौटने पर बस्ता सही जगह पर रख देना. पांच साल का बच्चा इतना ही कर ले तो पेरेंट्स राहत महसूस करते हैं. अब जरा एक बार डॉली शिवानी चेरुकुरी की ओर देखें. ये सबसे कम उम्र की तीरंदाज हैं, जिनका नाम  एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है.

सोशल मीडिया पर वाइस प्रेसिडेंट ने पांच साल की डॉली को बधाई दी, जो वायरल हो रही है. सभी डॉली की उपलब्धियों को सराह रहे हैं.



डॉली ने 10 मीटर की दूरी से 11 मिनट में 103 बार निशाना साधा. दूसरे राउंड में 20 मीटर की दूरी से 5 मिनट में 36 बार निशाना लगाया. ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इन्होंने 360 पॉइन्ट्स में से 290 पॉइंट लिए. जब वो तीन साल की भी नहीं हुई थीं, तब पांच और सात मीटर की दूरी से निशाना साधकर तीरंदाजी में नया रिकॉर्ड बनाया.

हालांकि शिवानी के लिए ये सफर आसान नहीं रहा.

परिवार में तीरंदाजी का ही प्रोफेशन रहा. पिता तीरंदाज हैं. शिवानी ने जब खड़े होना भी नहीं सीखा था, तब से तीर-कमान के लिए अपनी दिलचस्पी जाहिर करनी शुरू कर दी. पिता के सामने समस्या थी कि जो बच्ची ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही, वो धनुष कैसे संभालेंगी. उसका वजन भी कम था. यानी भारी तीर-कमान संभालना ही अपने में एक टास्क होता तो डॉली निशाने पर फोकस कैसे करती. माता-पिता ने मिलकर इसका एक हल निकाला.

उसके लिए कार्बन के तीर-कमान बनाए जो हल्के होते हैं ताकि उसके नन्हे हाथ इन्हें संभाल सकें.

निशाना लगाने की प्रैक्टिस भी बड़े लोगों की तरह लगातार नहीं करवाई जा सकती थी. तीरंदाजी की प्रैक्टिस के दौरान बड़े-बड़ों के कंधे, आंखें, पैर सब दर्द करते हैं, फिर ये तो न्नही बच्ची थी. यही सोचकर पिता ने दिनभर में कई ब्रेक्स के साथ केवल 2 घंटे प्रैक्टिस करवानी शुरू की लेकिन डॉली की लगन उन्हें हैरान करती रही. वो लगातार बिना रुके प्रैक्टिस करती.

डॉली अपनी उम्र के बच्चों से एकदम जुदा हैं. वे अभी से जानती हैं कि उन्हें भविष्य में क्या करना है. डॉली की इसी लगन ने उन्हें सबसे कम उम्र की तीरंदाज का खिताब दिया. आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा की वोल्गा आचर्री अकादमी में ये अभी से प्रशिक्षण ले रही हैं ताकि 2024 में होने वाले ओलंपिक में भाग ले सकें.
First published: September 14, 2017
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