Book Review: एना बर्न्स की पुस्तक ग्वाला- बहता हुआ गद्य जिसे समझने के लिए इसमें डूबना होगा

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Updated: September 10, 2019, 3:52 PM IST
Book Review: एना बर्न्स की पुस्तक ग्वाला- बहता हुआ गद्य जिसे समझने के लिए इसमें डूबना होगा
एना बर्न्स की पुस्तक ग्वाला की समीक्षा

Milkman by Anna Burns's Hindi translated book review: वह बीच से कहीं शुरू हुई ऐसी कहानी लगती है जो जितना कुछ कहती है, उससे ज्यादा आपकी छठी ज्ञानेंद्री पर इसे बुनने के लिए छोड़ देती है.. समझने, भांपने और आंकने के लिए.

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ग्वाला (मूल रूप में Milkman) एना बर्न्स (Anna Burns) का तीसरा नॉवेल है. लेकिन एक इंटरव्यू में वह कहती हैं कि अभी तीसरे नॉवेल पर काम करना बाकी है! वह फिर से अपने 'उस' तीसरे नॉवल पर काम करना शुरू करेंगी. दरअसल, जब उन्होंने मिल्कमैन पर काम करना शुरू किया था तब वह काफी बीमार थीं. असहनीय पीठ दर्द से परेशान एना के लिए दैनिक जीवनचर्या तक चलाना बेहद मुश्किल था. मिल्कमैन किसी तरह से पूरा हुआ, छपा और फिर आई एक ऐसी सूचना जो एना के लिए किसी शानदार सरप्राइज से कम नहीं थी. उन्हें इस नॉवल के लिए 2018 का मैन बुकर प्राइज (Man Booker Prize) दिया जा रहा था.

56 साल की आयरलैंड निवासी एना कहती हैं कि जिस उपन्यास पर वह काम करना चाहती थीं उस पर वह एक्स्ट्रीम पेन के चलते काम नहीं कर पाई थीं. सोचिए, कैसा लगता होगा दुनिया से एक ऐसी कृति पर सराहना पाना जो ऐसे खराब तबीयत के सबसे दर्दनाक दौर में लिखी गई हो! एना बर्न्स आयरलैंड की पहली लेखक हैं जिन्हें यह अवॉर्ड मिला है. मिल्कमैन को हिन्दी में अनूदित किया है अनुपमा ऋतु और उपमा ऋचा ने. इसे प्रकाशित किया है संवाद प्रकाशन ने. इसकी कीमत रखी गई है 300 रुपये.

एना, बीच वाली बहन (तीन बहनों में नंबर दो पर जो पैदा हुई) के जरिए फर्स्ट पर्सन में इस पूरी कहानी को कहती हैं. कहानी क्या है, आयरलैंड के एक टाउन की अनवरत बहती कहानी है... या यूं कहें कि कहानियों का समुच्चय... यौन शोषण, तत्कालीन सामाजिक परंपराएं, विदेष की कहानी है. नॉवेल की शैली एकदम जुदा है. वह बीच से कहीं शुरू हुई ऐसी कहानी लगती है जो जितना कुछ कहती है, उससे ज्यादा आपकी छठी ज्ञानेंद्री पर इसे बुनने के लिए छोड़ देती है.. समझने, भांपने और आंकने के लिए. क्रूरता और शोषण की कहानी को अन्ना ने जिस किरदार के मार्फत कहा है, उसका उपन्यास में कोई नाम नहीं है. यहां तक कि किताब में किसी का कोई नाम नहीं दिया गया है. संभवत: इसी वजह से इसकी शैली एकदम अलहदा तरीके से उभर कर आई है. यह अपने समय का समाज का खाका पेश करती है. वहां की राजनीतिक उठापटक और डरे सहमे और कुछ क्रूर हो चुके समाज को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकालती, बस प्रस्तुत करती जाती है.

लगभग 50 लाख रुपए का बुकर पुरस्कार मिलने से बेहद खुश एना बर्न्स के मीडिया में छपे इंटरव्यूज के मुताबिक, वह कहती हैं कि उनके लिए यह धनराशि बहुत मायने रखती है. वह इससे कुछ कर्जे चुकाने के साथ ही अपने कुछ अधूरे कामों को पूरा कर सकती हैं.

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First published: September 10, 2019, 2:01 PM IST
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