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Book Review: एक ब्यूरोक्रेट की कसकभरी कविताएं ‘कह दो ना’ में

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 4:17 PM IST
Book Review: एक ब्यूरोक्रेट की कसकभरी कविताएं ‘कह दो ना’ में
'कह दो ना; किताब की समीक्षा

काव्य संकलन कह दो ना दरअसल चार हिस्सों में बंटी है. जिसमें नया दौर, सिलसिला, शेर ओ शायरी और सूफियाना अंदाज की कविताएं और शायरी हैं. यानि ये किताब तरह तरह काव्य के जायके से रू-ब-रू कराती है.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 4:17 PM IST
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मौजूद निगाहों में कोई सुर्ख सवेरा है,
कई दिन से बेचैनी गुम चांद अंधेरा है..

ये शायरी उस काव्य संकलन की है, जिसे एक ब्यूरोक्रेट ने लिखा है. वो आईएएस अधिकारी हैं लेकिन क्रिएटिव काव्यात्मकता लगातार उनकी किताब कह दो ना में झलकती है.
कह दो ना के लेखक का नाम नीतीश्वर कुमार है. वो केंद्र सरकार में सीनियर ब्यूरोक्रेट हैं. वो इस किताब के परिचय में खुद लिखते हैं कि कविताएं तो दिल से अपने आप बाहर आ जाती हैं. साहित्यिक अभिरुचि वाले नीतीश्वर कुमार ने एक भोजपुरी फिल्म का निर्देशन किया. उसमें उन्होंने गाने लिखे, कहानी और स्क्रीनप्ले भी. इस सफर के साथ उनकी काव्य यात्रा भी शुरू हो गई.

काव्य संकलन कह दो ना दरअसल चार हिस्सों में बंटी है. जिसमें नया दौर, सिलसिला, शेर ओ शायरी और सूफियाना अंदाज की कविताएं और शायरी हैं. यानि ये किताब तरह तरह काव्य के जायके से रू-ब-रू कराती है. कविताओं में बेचैनी भी है, एक तड़प भी, सुख और रोमानियत भी. ये भी कहना चाहिए ये एक नयापन भी लिये हुए हैं, जो खास फीलिंग का अहसास कराती हुई लगती हैं, मसलन एक कविता है, जिसका शीर्षक है “हवाओं में लिखता हूं”- हवाओं में लिखता हूं// तेरे तराने// मुहब्बत में होंगे इतने दीवाने//फिजा हमसे पूछे कि कातिल कहां है...

कविताओं के साथ जिंदगी के रास्ते
इसी तरह किताब के दूसरे भाग सिलसिला की एक कविता की पंक्तियां हैं-उड़ चलेंगे तुम्हारे हवाओं के संग// लूट आएंगे तेरे मयारों के रंग// आंधियों में उछलती बरसात है//... नीतीश्वर खुद अपनी भूमिका में लिखते हैं कि जिंदगी कई बार नए रास्ते आपके लिए अचानक खोल देती है. ऐसा लगता है कि उस रास्ते पर आपकी यात्रा पहले से नियत थी. ऐसा क्यों होता है, इस पर मतों में भिन्नता हो सकती है. लेखक की कविता की यात्रा करीब 14 सालों से चल रही है.
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चार भागों में किताब
किताब का पहला भाग अगर नई तरह की कविताओं और मुंबइया फिल्मों की तर्ज पर है तो दूसरा हिस्सा यानि सिलसिला जो कुछ पहले सुना है, उसे ही नए अंदाज में कहने की कोशिश है. तीसरा हिस्सा शेर ओ शायरी का है, यानि आज के शब्द और सोच में पिरोकर लिखी गईं गजलें. जो पढ़ने में स्पीड का भी अहसास कराएं. आखिरी हिस्सा सुफियाना है. सबसे बड़ी बात है कि किताब में आसान और नए शब्दों का इस्तेमाल है. इसका प्रवाह असरदार है. सबसे बड़ी ये भी है किताब की साजसज्जा बेहतर और अर्थपूर्ण रेखांकनों से युक्त है.

किताब -कह दो ना (काव्य संकलन)
प्रकाशक-नयी किताब प्रकाशन
नवीन शाहदरा दिल्ली
पेज-95
मूल्य 125 रुपए

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First published: October 23, 2019, 4:17 PM IST
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