14 साल की लड़की ने कहा, 'शादी नहीं, अपना बिजनेस करूंगी'

Farha Fatima | News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 3:35 PM IST
14 साल की लड़की ने कहा, 'शादी नहीं, अपना बिजनेस करूंगी'
शेषकलो पांडे (image: facebook)
Farha Fatima | News18Hindi
Updated: November 15, 2017, 3:35 PM IST
शेषकलो पांडे से 14 साल की कमसिन उम्र में उनके मता-पिता ने शादी करने के लिए कहा. लेकिन उनके मन में उजले भविष्य के ख़्वाब पल रहे थे. नेपाल की राजधानी काठमांडू की रहने वाली शेषकलो की क्लास की दो और लड़कियों ने उसी उम्र में शादी करने के लिए स्कूल छोड़ा था. इसलिए उनके माता-पिता को लगा कि अब उन्हें भी छोड़ देना चाहिए.

उनका कहना था कि स्कूल जाना बेहद मंहगा (ज्यादा फीस) और ख़तरे से ख़ाली नहीं है. उन्हें डर था कि स्कूल के रास्ते में बलात्कार जैसी घटना भी हो सकती है. उन्हें लग रहा था कि वह शादी करके ख़ुश रहेंगी.

14 साल की शेषकलो शादी से इनकार के लिए मां-बाप के सामने ज़ारो-क़तार राईं और चार दिन तक खाना नहीं खाया. उन्हें मनाने के लिए उनकी मां ने घर का बना दही (उनके लिए शाही खाना था) दिया तो उन्होंने उसे फेंक दिया. उस उम्र में शादी के ख़्याल से भी ये लगता कि उन्हें अंधेरे में धकेला जा रहा है.

उन्होंने बहुत सी औरतों को हैंडिक्राफ्ट सामान बनाते और बेचते हुए देखा था. उन्होंने उस बारे में ख़ूब सोचा और माता-पिता के सामने वही बिजनेस आइडिया रखा. क्योंकि उनके माता पिता हर महीने 300 रुपए स्कूल फीस भरने के योग्य नहीं थे. उन्होंने अपने बड़े भाई से काम शुरू करने के लिए रंगीन पेपर और ग्लू (glue) खरीदने लिए पैसे मांगे. साथ ही स्कूल पूरा करने के लिए यूनिवर्सिटी जाने की इजाजत भी ली. अपने हक के लिए खुद खड़े होने पर भाई ने उनका साथ दिया.

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भाई के साथ से माता-पिता की ज़िद खामोश हो गई और उन्होंने स्कूल की 6 महीने की फीस भर दी. अगर वे फेल होतीं तो उनके पास शादी करने के अलावा दूसरा ऑप्शन नहीं था. उनके बिजनेज आइडिया पर मां ने हामी भरी लेकिन पिता खामोश रहे. लेकिन वे अगले दिन घर में एक ज़ंग खाई हुई साइकिल के साथ आए. जिसे ख़रीदने में उन्होंने अपनी सारी बचत ख़र्च दी थी. उन्होंने साइकिल देते हुए कहा कि जब तुम कमाने लगो तो मुझे इसके पैसे लौटा देना.

उन्होंने दो हफ्ते बाद ही कर्ज चुका दिया था. उसके बाद से गांव की लड़कियां उनसे मदद मांगने आतीं और वे बेझिझक सबकी मदद करतीं. दूसरी लड़कियों की माएं उनसे आग्रह करतीं कि वे उनकी बेटियों को भी पैसा कमाना सिखाएं ताकि वे भी स्कूल में पढ़ाई पूरी कर सकें. उसके बाद उनकी दोस्तों ने भी छोटी उम्र में शादी से इनकार करना शुरू कर दिया.

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बाल विवाह के खात्मे से धीरे-धीरे ही सही लेकिन विकास होगा. जिस समय (14 साल की उम्र के बाद) शेषकलो ने स्कूल जाना चालू रखा, उस उम्र के बाद उनके स्कूल में क्लास में लड़कियां नहीं हुई करती थीं. उनकी प्रिंसिपल लाल चंद्रा पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 14 साल के बाद स्कूल में पढ़ रहीं वो पहली ऐसी लड़की थीं जिसके लिए हमें प्राइमरी क्लास से कुर्सी लेनी पड़ी थी.

17 साल की शेषकालो स्कूल जाने से पहले 4 बजे उठतीं हैं. अल-सुबह रंगीन कागजों से हैंडमेड चीज़ें बनाती हैं. वे अपने दृढ़ निश्चय को भटकने देना नहीं चाहतीं. वे कहती हैं कि स्कूल उनकी ज़िंदगी है. मैं यहां आने के लिए बेहद मेहनत करती हूं.

First published: November 15, 2017
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