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घर ही नहीं, दफ्तर में भी महिलाएं वे काम करती हैं, जिसकी उन्हें तनख्वाह नहीं मिलती

News18Hindi
Updated: December 3, 2017, 8:35 AM IST
घर ही नहीं, दफ्तर में भी महिलाएं वे काम करती हैं, जिसकी उन्हें तनख्वाह नहीं मिलती
दफ्तर में पुरुषों से ज्यादा वक्त देती है महिलाएं
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Updated: December 3, 2017, 8:35 AM IST
आप भी उन लोगों में हैं जो मानते हैं कि पुरुष अपने काम को ज्यादा गंभीरता से लेते हैं और दफ्तर में ज्यादा वक्त देते हैं तो वक्त है अपनी धारणा में बदलाव का. हाल ही में हुआ एक सर्वे कहता है कि कामकाजी महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुने से लेकर लगभग दस गुना वक्त दफ्तर में उस काम के लिए बिताती हैं, जिसकी उन्हें पगार तक नहीं मिलती है.

चूंकि ऐसे कामों का कहीं जिक्र भी नहीं होता है, लिहाजा इस स्टडी को नाम दिया गया- 'इनविजिबल वर्क, इनविजिबल वर्कर्स'. एक एनजीओ एक्शनएड इंडिया ने देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तराखंड में ये शोध किया. इसमें 1,560 महिलाओं को शामिल किया गया. ये महिलाएं शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों से और स्किल्ड और अनस्किल्ड दोनों ही तरह के काम करने वाली थीं.



शोध कहता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में न केवल अवैतनिक काम करती हैं, बल्कि इसे पूरा करने के लिए वे दफ्तर में पुरुषों से ज्यादा वक्त बिताने को बाध्य हैं. ये वक्त भी पुरुषों की तुलना में दोगुने से लेकर दस गुना तक है. इससे उनपर दोगुना बोझ पड़ता है. वहीं पुरुषों को क्वालिटी काम करने का मौका मिलता है और उन्हें अपने काम के अनुसार पर्याप्त वेतन भी मिलता है. इससे महिलाओं का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है.

हालांकि शोध ये नहीं कह रहा कि पुरुष कम काम करते हैं लेकिन इस बात की ओर साफ इशारा है कि काम के घंटे और उसके अनुसार वेतन दोनों ही के मामले में पुरुष महिलाओं से बेहतर स्थिति में हैं. यहां तक कि कामकाजी महिलाओं के हिस्से में घर और बाहर मिलाकर इतना काम रहता है कि लगभग 80% महिलाओं ने कहा कि उन्हें भरपूर नींद की सबसे ज्यादा जरूरत है लेकिन काम के कारण सोने का वक्त नहीं मिलता है.
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