World Environment Day 2019: पर्यावरण बचाने के लिए ये शख्स साइकिल से घूमा 28 देश, जमीन तक बेची

World Environment Day 2019: साइकिल बाबा ने साल 2016 में साइकिल से ही कई देशों में जाकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाई और पेड़-पौधों के महत्व के बारे में लोगों को समझाया...

Bhagya Shri Singh | News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 4:58 PM IST
World Environment Day 2019: पर्यावरण बचाने के लिए ये शख्स साइकिल से घूमा 28 देश, जमीन तक बेची
World Environment Day 2019: पर्यावरण को बचाने के लिए साइकिल से घूमे 28 देश, जमीन तक बेच डाली
Bhagya Shri Singh | News18Hindi
Updated: June 5, 2019, 4:58 PM IST
World Environment Day 2019: आज विश्व पर्यावरण दिवस है. इसके तहत जगह-जगह प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. प्रतिदिन तेजी से बढ़ते प्रदूषण का हाल ये हैं कि अब तो मानो सांसें भी कम पड़ने लगी हैं. भूकंप, बाढ़, सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को जिम्मेदार ठहराया है. उनका मानना है कि अगर हालात में बदलाव नहीं हुआ तो साल 2030 तक इंसान को रहने के लिए पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रह की तलाश करनी पड़ेगी.

तेजी से बिगड़ते मौसम और पर्यावरण के मिजाज के बीच कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपनी छोटी सी पहल से इन हालातों को बदलने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं. आज की कहानी है 'साइकिल बाबा' के नाम से मशहूर डॉक्टर राज की जिन्होंने अब तक पर्यावरण बचाने के लिए साइकिल से 28 देशों की यात्रा की है. आइए जानते हैं उनका दिलचस्प सफ़र..

'साइकिल बाबा' उर्फ़ डॉक्टर राज ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएमएस किया है. उन्होंने न्यूज़ 18 से हुई ख़ास बातचीत में बताया कि उन्हें बचपन से ही पर्यावरण और पेड़-पौधों से काफी लगाव था. प्रकृति से इस कदर लगाव का श्रेय उन्होंने अपने पिताजी को दिया, जो कि बैंक में जॉब करते थे. उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने अपने पिता को पेड़-पौधों की देखभाल करते और खेतों की देखरेख करते देखा था बस तभी से उनके मन में पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा हुआ. अमूमन वो यूं ही कई पेड़ पौधे लगाया करते थे, लेकिन 2016 में पर्यावरण के प्रति इस लगाव को उन्होंने अपना जूनून और मिशन बनाने की ठानी.

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ऐसे शुरू हुआ सफ़र
साइकिल बाबा ने 2016 में साइकिल से ही कई देशों की यात्रा कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाई और पेड़-पौधों के महत्व के बारे में लोगों को समझाया. पर्यावरण को सुधारने के लिए अब तक वो साइकिल से ही करीब 28 देशों की यात्रा कर चुके हैं. उन्होंने अब तक भारत, सिंगापुर, भूटान, कंबोडिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की यात्राएं की हैं. उन्होंने ये भी बताया कि जिन देशों में साइकिल से जाना संभव नहीं था ऐसी जगहों पर जाने के लिए उन्हें फ्लाइट का सहारा लेना पड़ा.


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जूनून के लिए बेची जमीन
दुनिया में बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जो अपने सपनों को आसमान में उड़ान देने के लिए जमीन तक बेच डालें. लेकिन डॉक्टर राज उर्फ़ साइकिल बाबा ने अपने इस जूनून को पूरा करने के लिए गांव की एक पैतृक जमीन को भी बेच डाला. अपनी इस मुहिम को पूरा करने के लिए उन्होंने अब तक साइकिल से करीब 41 हजार किलोमीटर तक का सफ़र तय कर लिया है. उनका अपना एक Youtube चैनल भी है जिसके करीब 60 हजार सस्क्राइबर हैं. फिलहाल वो वीसा के लिए दिल्ली में हैं. उनका अगला पड़ाव होगा यूरोप और अमेरिका. वहां जाकर भी वो लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे और उन्हें पेड़-पौधों की उपयोगिता समझाएंगे.



ऐसे फैलाते हैं जागरूकता
पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की इस मुहिम को साइकिल बाबा बड़े ही दिलचस्प तरीके से चला रहे हैं. लोगों को इसकी उपयोगिता बताने के लिए वो स्कूल और कॉलेज में जाकर प्लांटेशन कैंप आयोजित करते हैं जिसमें पेड़-पौधों के महत्व, उनकी देखभाल और उनसे जुड़ी कई अहम जानकारियां दी जाती हैं. इसमें पर्यावरण को बचाने में जुटे कई NGO (गैरसरकारी संस्थाएं) भी उनकी मदद कर रहे हैं.

साइकिल बाबा का संदेश
'साइकिल बाबा' का कहना है कि आज में जियो कल की सोचो. अगर पर्यावरण नहीं होगा तो कुछ भी नहीं होगा. हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा. जिन तरीके से इंसान प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है उसका कहर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है. जापान का ही उदाहरण ले लें. इस बार वहां गर्मी कहर बरसा रही है जबकि पहले वहां का तापमान सामान्य होता था. उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य प्रदूषण कम करना और पर्यावरण को सहेजना है.

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साइकिल बाबा के टिप्स
उनका कहना है कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशों से ही काफी बदलाव आ सकता है. इसके लिए आपको ज्यादा कुछ करने की भी जरूरत नहीं हैं बस थोड़ा सा पुरानी जीवनशैली को आत्मसात करना होगा. आज के समय में हम फल खाने के बाद इसके बीज को कूड़े में डाल देते हैं जबकि पहले हम इसे कटोरी में रखकर अंकुरित कर इसे जमीन में रोप देते थे. फल खाने के बाद बीज फेंकें नहीं बल्कि जमीन में रोप दें. धरती इतनी उपजाऊ तो है ही कि हजार में से 10 तो अंकुरित हो ही जाएंगे जो बड़े होकर पेड़ का रूप लेंगे. इस तरह आप पर्यावरण को बिना मेहनत किए ही फिर से बेहतर बना पाएंगे. इस बदलाव के बाद एक बार फिर आंगन गौरैया और गिलहरी की आहट से गुलज़ार होंगे.

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First published: June 5, 2019, 2:51 PM IST
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