Home /News /lifestyle /

स्टीम्ड कुलचे के साथ छोले-आलू हैं लाजवाब, करोल बाग में 'गणेश छोले-कुलचे' पर लें स्वाद

स्टीम्ड कुलचे के साथ छोले-आलू हैं लाजवाब, करोल बाग में 'गणेश छोले-कुलचे' पर लें स्वाद

इस दुकान का संचालन साल 1981 से किया जा रहा है.

इस दुकान का संचालन साल 1981 से किया जा रहा है.

Chole Kulche: दिल्ली के सबसे फेमस स्ट्रीट फूड्स में छोले और कुलचे भी शामिल हैं. किसी भी गली या चौराहे पर यह डिश आसानी से मिल जाती है. यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है.

    Chole Kulche: (डॉ. रामेश्वर दयाल) छोले-कुलचे एक ऐसी डिश है जो स्वास्थ्यकारी भी है, आम और खास दोनों में मशहूर है साथ ही जेब पर भारी नहीं पड़ती. दिल्ली के किसी भी इलाके में जाइए, वहां आपको छोले-कुलचे (Chole Kulche) की दुकान या ठीया जरूर दिख जाएगा. बेचने वाले भी अपने-अपने तरीके से ग्राहकों को रिझाने के लिए कवायद करते रहते हैं. किसी के कुलचे मक्खन में तर है तो किसी के देसी घी में, कोई अपने छोलों को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें प्याज का तड़का लगा रहा है तो कोई नींबू और खटाई उडेंल रहा है. सबका मकसद एक ही है कि ग्राहक उनके पास आए और वे तारीफ पाएं. आज हम आपको ऐसे ही छोले-कुलचे वाले के पास ले चल रहे हैं. इसका मसला यह है कि यह साहब मक्खन-घी का बिल्कूल भी प्रयोग नहीं करते हैं. इनके कुलचे अलग ही तरीके से गरम (फ्राई) होते हैं ओर छोलों और आलू का संगम ही स्वाद को लाजवाब बना रहा है.

    बिना मक्खन के आलू-कुलचे का लें मज़ा

    दिल्ली के पुराने बाजारों में से एक करोल बाग में आएंगे तो आर्य समाज रोड पर गफ्फार मार्केट की साइड पर (दुर्गा साईं मन्दिर के बगल में) छतरी ताने ठीया नजर आ जाएगा. इस ठीए को ‘गणेश छोले-कुलचे’
    के नाम से जाना जाता है. इनके दावे तो बहुत हैं लेकिन जिस तरह से यह अपनी डिश परोसते हैं, वह उसे अन्य छोले-कुलचे वालों से अलग बनाते हैं. इनके बड़े से पतीले में उबली मटर (आम भाषा में छोले) भरी
    होती है. बगल में एक बड़े से तवे पर बहुत कम ऑयल में आलू के ढेरों टुकड़े फ्राई होते रहते हैं. इन फ्राई हो रहे आलू के ऊपर ढेर से बिना मक्खन या देसी घी लगाए कुलचे छोड़ दिए जाते हैं. मतलब यह है कि आलू
    से निकल रही भाप (स्टीम) से कुलचे गरम हो रहे हैं.

    इस ठीए को ‘गणेश छोले-कुलचे’
    के नाम से जाना जाता है.

    छोलों का स्वाद है निराला

    छोलों को मसाले, खटाई आदि डालकर तैयार किया जाता है. दोने में डालने के बाद इन छोलों के साथ कई आलू के टुकड़े रखे जाते हैं. इनके ऊपर कटी हुई मोटी कतरी प्याज के टुकड़ों के साथ टमाटर का एक टुकड़ा
    सजाया जाता है. उसके ऊपर कटी हरी मिर्च, हरा धनिया व अदरक के लच्छे रखे जाते हैं. साथ में आधा नींबू काटकर पेश कर दिया जाता है. इनकी जो हरी मिर्च का अचार है, वह इन छोले-कुलचे के स्वाद को अलग ही टेस्ट देता है. न कोई घी, न मक्खन. बस इसी डिश के दीवाने हुए जा रहे हैं लोग. तीन कुलचों के साथ 70 रुपये में पेट भरा जा सकता है.

    यहां तीन कुलचों के साथ 70 रुपये में पेट भरा जा सकता है.

    रायता भी है ज़ायकेदार

    छोले-कुलचे की इस डिश को पसंद करने वालों का कहना है कि आलू-छोले के साथ स्टीम्ड कुलचे स्वाद को लाजवाब बना रहे हैं. आपके पास कटा हुआ आधा नींबू है, उसके हिसाब से स्वाद को मनचाहा बनाइए. इस
    डिश के साथ स्पेशल रायता भी लिया जा सकता है. रायता वाला भी साथ में है. उनका नाम अमरीश है. उनकी पूरे इलाके में रायते की सप्लाई है. वह रोजाना रोहतक से ताजी छाछ मंगाते हैं और काला नमक, बूंदी, पुदीने के टुकड़ों को मिलाकर रायता तैयार करते हैं. गाढ़ा रायते का यह बड़ा गिलास 20 रुपये का है. छोले-कुलचे खाकर रायते का गिलास लपेंटे और आपका खाना हजम होता दिखाई देगा.

    वर्ष 1981 से चल रहा है करोल बाग में यह ठीया

    इस ठीए को साल 1981 में गणेश ने शुरू किया था. उनका कहना है कि इस तरह के छोले-कुलचे बेचना उन्होंने दिल्ली में सबसे पहले शुरू किया. रोजाना कुलचों को ऑर्डर पर बनवाया जाता है. ये अलग इसलिए हैं कि इनमें मैदे के साथ सूजी भी मिली होती है. फ्राई होते आलू से निकली स्टीम पर कुलचों को गरम करते ही उसका स्वाद अलग ही बन पड़ता है.

    इस ठीए को साल 1981 में शुरू किया गया था.

    थोक किराना बाजार खारी बावली से साबुत मसाले लाकर उन्हें अपने हिसाब से पीसा और तैयार किया जाता है. आजकल इस काम में उनका बेटा विवेक भी ग्राहकों को यह मजेदार डिश खिला रहा है. सुबह 9 बजे काम शुरू हो जाता है और रात 8 बजे के बाद तक चलता रहता है. कोई अवकाश नहीं है.

    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: करोल बाग

    Tags: Food, Lifestyle

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर