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मुगलई ज़ायक़े से भरी मटन रान या कोरमा खाने का है मन? दरिया गंज में ‘ज़ायक़ा’ का लें स्वाद

दरियागंज में मुगलई जायके का स्वाद लेना हो तो एक बार 'जायका' जरूर पहुंचें.

दरियागंज में मुगलई जायके का स्वाद लेना हो तो एक बार 'जायका' जरूर पहुंचें.

Delhi Food Joints: नॉन वेज खाने का शौक रखने वाले लोगों के लिए दिल्ली के दरियागंज में मौजूद 'ज़ायका' में मुगलई स्वाद का एक बार जरूर लुत्फ उठाना चाहिए.

  • News18Hindi
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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)

    Food Joints of Delhi: नॉन वेज के शौकीनों को चिकन से जुड़ी डिश खासी पसंद आती हैं. तंदूरी चिकन और बटर चिकन (Butter Chicken) ऐसे आइटम हैं जो हर रेस्तरां पर आपको जरूर मिल जाएंगे. नॉन वेज की बात निकली है तो आपको बताते चलें कि असली नॉन वेज के शौकीन चिकन के बजाय मटन (बकरे के गोश्त) को प्राथमिकता देते हैं. उन्हें लगता है कि नॉन वेज का मतलब ही मटन है. आपको इस बात पर हंसी आ सकती है कि पुरानी दिल्ली के नॉन वेज के शौकीन चिकन से जुड़े आइटमों को आलू की श्रेणी में रखना पसंद करते हैं. वे अपने घरों में चिकन बनाकर खा तो लेते हैं लेकिन जब उन्हें नॉन वेज की तसल्ली चाहिए तो उन्हें मटन ही रास आता है.

    आज हम आपको ऐसे रेस्तरां के बारे में जानकारी देंगे, जिनके ऑनर सालों से पुरानी दिल्ली में रह रहे हैं और उनके यहां मटन से जुड़े व्यंजन आपको खासी तसल्ली दे सकते हैं. इनमें मटन रान, मटन बर्रा और कोरमा से जूड़े ऐसे आइटम हैं, जिनका स्वाद बेहतर व लाजवाब तो होगा ही साथ ही सभी का फ्लेवर भी अलग होगा. स्वाद और कारीगरी को लेकर यह रेस्तरां इतना गंभीर है कि अगर आपको मटन रान खानी है तो उसके लिए आपको एक दिन पहले ऑर्डर करना होगा.

    कई मसालों में लिपटी होती है मटन रान

    पुरानी दिल्ली से एकदम जुड़े दरिया गंज मेन रोड पर आप जाएंगे तो वहां पर नॉन वेज से जुड़े कई छोटे-बड़े और पुराने रेस्तरां हैं. इन्हीं में से एक रेस्तरां का नाम ’ज़ायका’ है, जो गोलचा के बगल में है. यह
    पुराना रेस्तरां हैं और नॉन वेज पसंद करने वाले इस रेस्तरां के खाने को वाकई जायकेदार मानते हैं. यूं तो इस रेस्तरां में मटन-चिकन के अलावा और भी आइटम मिलते हैं. लेकिन यह रेस्तरां पुराने वक्त से ही मटन डिशेज के लिए मशहूर है. उसका कारण यह है कि इनका स्वाद बिल्कुल मुगलई होता है, जो बहुत कम रेस्तरां में मिलता है.

    सबसे पहले मटन रान की बात करें तो अगर आपको इसे खाना है तो एक दिन पहले फोन कर बुक कराना होगा. उसका कारण यह है कि इस रान को पूरे एक दिन मसालों से मेरिनेट किया जाता है. जब अगले दिन इसे तंदूर में भूना जाता है, तब ही इसका स्वाद उभरकर आता है. इसकी कीमत 1450 रुपये है और चार लोग इसे खा सकते हो सकते हैं.

    इसकी कीमत 1450 रुपये है और चार लोग इसे खा सकते हो सकते हैं.

    कबाब, मटन कोरमे का अनूठा स्वाद

    इस दुकान का मटन बर्रा और सींख कबाब भी खासे ज़ायकेदार है. इनके कबाब की खासियत यह है कि गोश्त को लाकर उसे खुद ही मशीन से पीसते समय उसमें खास मसाले मिलाए जाते हैं. इससे वह हाइजेनिक तो रहता है, स्वाद भी ऐसा कि मुंह में रखते ही घुलता सा महसूस हो. इनके प्रमुख मटन आइटम की बात करें तो मटन कोरमा, मटन नाहरी, मटन रारा को खाकर जरूर चेक करें. इन तीनों की खुशबू भी एकदम अलग होगी और स्वाद भी डिफरेंट. यानी आप असली मुगलई खाने का आनंद उठा रहे हैं.

    इनके साथ खाने के लिए कई तरह की रोटी और पराठें मौजूद हैं, लेकिन इनका असली मजा रूमाली, मोटी खमीरी रोटी और तंदूरी लच्छा पराठा से उठाया जा सकता है. हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि इस रेस्तरां के मटन आइटम खासे मशहूर हैं. मटन की कीमत भी बहुत अधिक है. इसलिए डिश भी चिकन आइटमों से खासी महंगी होगी. लेकिन मटन खाना आपको तसल्ली देता है तो इस रेस्तरां पर आकर आप वाह-वाह जरूर करेंगे. इस दुकान पर मुगलई खानपान के कई अन्य आइटमों का आप मजा उठा सकते हैं.

    यहां खाने के लिए कई तरह की रोटी और पराठें मौजूद हैं.

    2001 में शुरू हुआ था रेस्तरां

    आपको यह पढ़कर अच्छा लगेगा कि इस रेस्तरां के मालिकान मिर्जा ग़ालिब के घर के बल्लीमारान के रहने वाले हैं. मिर्जा साहब के घर के बगल में ही इनकी कई पीढ़ियां बीत चुकी हैं. इसलिए स्वाद तो पक्के तौर पर मुगलई और शाहजहांनाबाद (पुरानी दिल्ली) वाला ही होगा. इस रेस्तरां को मेहताब अहमद ने वर्ष 2001 में शुरू किया. वह ज़ायक़ेदार खाने के शौकीन थे और घर में खुद बनाते भी थे. घर के आसपास ही मुगलई खाना बनाने वाले कई खानसामा थे, जो अपनी दुकानों में इन्हें बनाकर फंक्शन वगैरह में भेजते थे. उन्होंने इन खानसामों से प्रेरणा लेकर शुरू में टेक-अवे सिस्टम रखा, बाद में रेस्तरां खोल लिया.

    अब इस रेस्तरां को उनके बेटे दानिश, साजिद और आदिल संभाल रहे हैं. उनका कहना है कि हमारा मकसद लोगों को सालों पुराना दिल्ली का मुगलई स्वाद खिलाना है और हम इसमें कामयाब हैं. डिश बनाने के लिए पुरानी दिल्ली के खानदानी खानसामों की सेवाएं ली जा रही हैं. परिवार का कोई सदस्य जामा मस्जिद इलाके से मटन खरीदता है तो दूसरा आसपास व खारी बावली से मसाले लाकर उन्हें अपने ही सामने कूटवाता है. यह सब कुछ मिलकर ही इसे ज़ायक़ेदार बना रहे हैं.

    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: दिल्ली गेट

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