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अमेरिकी राष्ट्रपति भी 'पांडेज पान' का ले चुके हैं स्वाद, नॉर्थ एवेन्यू के न्यू एमपीज़ मार्केट जाकर आप भी करें ट्राई

अमेरिकी राष्ट्रपति भी 'पांडेज पान' का ले चुके हैं स्वाद, नॉर्थ एवेन्यू के न्यू एमपीज़ मार्केट जाकर आप भी करें ट्राई

इस दुकान पर 70 वैराइटीज़ के पान मिलते हैं. यहां कई बड़े लोग पान का लुत्फ उठाने आते हैं.

इस दुकान पर 70 वैराइटीज़ के पान मिलते हैं. यहां कई बड़े लोग पान का लुत्फ उठाने आते हैं.

Food Joints of Delhi: इस दुकान पर 70 वैराइटी के पान मिलते हैं. देश की राजधानी के वीवीआईपी इलाके में दुकान के स्थित होने की वजह से यहां कई बड़े नेता भी आकर पान का स्वाद ले चुके हैं.

  • News18Hindi
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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)

    Food Joints of Delhi: Delhi Food Joints में आज हम आपको पान की ऐसी दुकान पर लेकर चलेंगे, जिसके पान का स्वाद देश के कई राष्ट्रपतियों, नेताओं ने तो लिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति भी इनकी दुकान का पान चख चुके हैं. अब जब बात पान की हो रही है तो पहले हम इसके बारे में थोड़ी सी जानकारी आपको दे दें ताकि आपको लगे कि पान वाकई बहुत कुछ है. पान को संस्कृत में ताम्बूल कहा जाता है और भारत की संस्कृति व हिंदू धर्म-कर्म में इसका बहुत महत्व है. ‘ताम्बूल समर्पयामी’ कहकर धूप, दीप और नैवेद्य के साथ इसे देवताओं को चढ़ाया जाता है, वहीं श्रृंगार और प्रसाधन में भी इसे उपयोगी माना गया है. पान औषधीय गुणों से भी भरपूर है, इसीलिए पुराणों, संस्कृत साहित्य के ग्रंथों, स्त्रोतों आदि में इसका वर्णन है.

    आयुर्वेद के ग्रंथ सुश्रुत संहिता में पान के गुणों का लंबा वर्णन है. साहित्यकारों, लेखकों और शायरों का तो पान प्रिय रहा ही है. आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिशचंद्र हमेशा चांदी की डिबिया में पान का बीड़ा रखते थे तो हिंदी के मशहूर उपन्यास ‘नाच्यौ बहुत गोपाल’, ‘बूंद और समुद्र’ आदि के लेखक अमृतलाल नागर लगातार पान का सेवन करते थे. हिंदी फिल्मों में भी पान चर्चा में रहा है. ‘तीसरी कसम’ फिल्म का गीत ‘पान खाए सैंया हमार’ और ‘डॉन’ फिल्म का गाना ‘खाइके पान बनारस वाला’ आज भी लोगों को लुभाता है.

    70 वैरायटी के मिलते हैं पान

    पान जैसी ही मशहूर है ‘पांडेज पान’ की दुकान. राजधानी के वीवीआई इलाके नॉर्थ एवेन्यू की न्यू एमपीज़ मार्केट में यह स्थित है. आसपास पार्लियामेंट के अलावा केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों के निवास भी हैं तो इसी इलाके में देश के नौकरशाह भी निवास करते हैं. इस दुकान पर करीब 70 वैरायटी के शानदार पान बेचे जाते हैं, जिन्हें अलग-अलग कैटिगरी में बांटा गया हे, इनमें फूट पान, स्वीट्स नट्स, चॉकलेट, चोकोलेयर फ्रूट नट्स, सादा और हर्बल आदि पान शामिल है. इन पानों के नाम सुनेंगे तो तबियत पान की तरह ही रंगीन होने लगेगी.

    इस दुकान पर करीब 70 वैरायटी के शानदार पान बेचे जाते हैं

    यहां सिने तारिका माधुरी दीक्षित के नाम पर माधुरी हनी स्वीट पान तो है ही साथ ही बटर स्कॉच पान, इडियट स्वीट पान, मेंगो डिप्प्ड पान, स्ट्राबेरी स्वीट पान, अंजीर पान, ब्लैक फोरेस्ट स्वीट पान, मघई पत्ता सादा, मीठा पान, चॉकलेट स्वीट पान आदि शामिल हैं. इन सभी पानों की कीमत 30 रुपये से लेकर 100 के बीच है. आप मान लें कि जिस फल का पान आपको खाना है, आपको उसी के स्वाद में हाजिर कर दिया जाएगा.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा, ट्रम्प भी चख चुके स्वाद
    दुकान के मालिक बताते हैं उनके खास पानों में न तो केमिकल का इस्तेमाल होता है और न ही किसी तंबाकू का. इसी के चलते बच्चों को भी इस दुकान के पान भाते हैं. इस पान की दुकान की प्रसिद्धि का आलम यह है कि देश के राष्ट्रपति और बड़े नेता इनकी दुकान के पान का स्वाद आत्मसात कर चुके हैं. जब नई दिल्ली में संसद चल रही होती है तो इस दुकान पर सभी दलों के सांसदों की आवाजाही लगी रहती है. इतना ही नहीं अमेरिका के दो राष्ट्रपति बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप जब सरकारी दौरे पर भारत आए थे तो उन्हें इसी दुकान का पान पेश किया गया था. जब अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की हैदराबाद हाउस में मीटिंग होती है तो भोजन के बाद उन्हें इसी दुकान का पान परोसा जाता है.

    तीन पीढ़ियां संभाल रही हैं काम

    इस इलाके में पान की यह दुकान वर्ष 1960 में खुली थी. लेकिन इससे बहुत पहले कनॉट प्लेस में यह दुकान चल रही थी. वर्ष 1943 में जी ब्लॉक में शिवनारायण पांडे ने पनवाड़ी की दुकान खोली. कनॉट प्लेस के जी ब्लॉक में इनकी एक दुकान है. इन दुकानों को पांडे जी के बाद उनके बेटे देवीप्रसाद पांडे ने जिम्मेदारी संभाली. आज इन दुकानों का उनके बेटे हरिओम पांडे और हरीशंकर पांडे संभाल रहे हैं. दुकान और पान को लेकर हमने देवीप्रसाद पांडे जी बात की. उन्होंने कुछ रोचक बातें बताईं. उनका कहना है कि पुराने वक्त में श्रीमती इंदिरा गांधी ने उनके पिताजी शिवनारायण जी को लोकसभा का चुनाव लड़ने की पेशकश की थी तो पिताजी ने यह कहकर हाथ जोड़ लिए थे कि “हम पान में चूना लगा सकते हैं, राजनीति में नहीं.”

    इस इलाके में पान की यह दुकान वर्ष 1960 में खुली थी.

    देवीप्रसाद के अनुसार हमारे पान इतने शुद्ध और फिल्टर्ड हैं कि उन्हें पांच साल के बच्चे से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग भी खा सकते हैं. स्वच्छता को हम प्राथमिकता देते हैं. पान की पत्तियों को फ़िल्टर्ड पानी से धोया जाता है और पान लगाते वक्त हम विशेष ध्यान रखते हैं. हमारे ये स्पेशल पान 30 सेकंड के अंदर मुंह में घुलना शुरू हो जाते हैं और अपने नाम के अनुरूप स्वाद छोड़ते हैं. दुकान सुबह 10 बजे खुल जाती है रात 11 बजे तक पान खाया जा सकता है. पास में कोई मेट्रो स्टेशन नहीं है. फिर भी पटेल चौक व दिल्ली सचिवालय मेट्रो स्टेशन से ऑटो लेकर इस दुकान तक पहुंचा जा सकता है.

    Tags: Food

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