स्वाद के साथ स्वास्थ्य का खजाना है 'उंधियू', पौष्टिकता से है भरपूर

उंधियू को खास अवसरों पर गुजराती घरों में बनाया जाता है. Image:ICCHAPURTI CATERERS/Instagram

उंधियू को खास अवसरों पर गुजराती घरों में बनाया जाता है. Image:ICCHAPURTI CATERERS/Instagram

उंधियू या उंधिया (Undhiyu) एक पारंपरिक गुजराती सब्जी है. यह एक शुद्ध शाकाहारी (Pure Vegetarian) खाना है जो इतना लजीज है (Tasty) कि मांसाहार करने वाले शौकीनों को भी अपनी ओर आकर्षित कर ही लेता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2021, 8:05 AM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

गुजरात की कई डिशेज (Dishes) के बारे में हमने चर्चा की है. जब भी गुजराती खाने का नाम आता है थोड़ी मिठास तो मन में घुल ही जाती है. लेकिन, आज मैं जिस खाने की बात करने जा रहा हूं वह बिल्कुल ही चटपटा है. खास बात यह है कि चटपटा होने के साथ ही इसमें स्वाद और स्वास्थ्य (Taste And Health) दोनों का ग्राफ बहुत ही ऊंचा है. जी हां आज हम चर्चा करने जा रहे हैं उंधियू या उंधिया (Undhiyu) की. यह एक पारंपरिक गुजराती सब्जी है.

नाम से ही शुरू होती है कहानी:
तो जैसा की मैंने पहले ही कहा कि यह शुद्ध गुजराती खाना है. यह एक शुद्ध शाकाहारी खाना है जो इतना लजीज है कि मांसाहार करने वाले शौकीनों को भी अपनी ओर आकर्षित कर ही लेता है. हालांकि, यह एक ऐसी सब्जी है जिसे बनाने में समय काफी लगता है. फिर भी गुजराती रेस्टोरेंट और घरों की यह शान है. असल में उंधिया नाम गुजराती के उंधु से आया है जिसका अर्थ होता है उल्टा.







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परंपरा बहुत खास है:असल में इसे 'माटी नू माटलु' नाम के मिट्टी के बर्तन में पारंपरिक ढंग से पकाया जाता है. इसे पकाने के लिए जमीन खोद कर उसमें उसमें धीमी आंच में पकाया जाता है. लेकिन, माटी के बर्तन को अच्छी तरह से सील कर के उल्टा रख दिया जाता है. धीमी आंच पर यह काफी समय तक पकता है. यही कारण है कि इसकी की सुगंध होती है उसका अलग ही अरोमा फैल जाता है. हालांकि, इस कठिन प्रकिया को थोड़ा बदल कर अब लोग प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करते हैं.

सर्दियों का है राजा:

इसे ज्यादातर सर्दी के दिनों में बनाया जाता है. इसका कारण यह है कि इसमें जिन सब्जियों का इस्तेमाल होता है वह सर्दियों में ही उपलब्ध होती हैं. कई विशेष अवसरों पर गुजराती घरों में इसे बनाया और खाया जाता है. इसमें मेथी की मुठिया, आलू, कच्चा केला, बैंगन, पापड़ी, सूरन(कच्चू), रतालू, हरी तूअर और मटर आदि डाला जाता है. वैसे तो आजकल यह सालभर मिल जाते हैं लेकिन, उनके स्वाद और क्वालिटी जाड़े के दिनों जैसा नहीं.

पौष्टिकता से भरपूर:

स्वाद का अंदाजा तो आपको लग ही गया होगा लेकिन इतनी सारी सीजनल सब्जियों के साथ इसकी पौष्टिकता भी कमाल ही हो जाती है. इसमें एनर्जी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, वसा और सोडियम पाया जाता है. साथ ही सर्दियों में इसे खाने से मौसम की मार से भी आप बच सकते हैं. इसमें बिल्कुल बेसिक मसाले डाले जाते हैं. इसलिए यह पेट के लिए बहुत ही बेहतर होता है.  इसे पूरी या चावल-दाल दोनों के साथ खाया जा सकता है.







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किसी भी गुजराती फंक्शन में बिना 'उंधियू' के जलसा पूरा ही नहीं होता है. तो...आप भी अपने शहर में कोई गुजराती रेस्टोरेंट खोजिए और जल्दी से इस सब्जी का मजा ले लीजिए क्योंकि मौसम जल्द ही गर्मी का आने वाला है ऐसे में आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.


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