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अपर लिप्‍स के लिए वैक्सिंग बेहतर है या थ्रेडिंग? जानें दोनों के फायदे और नुकसान

अगर आप बार बार वैक्सिंग करा रहे हैं तो होंठ के पास की त्वचा ढीली हो सकती है. (Image : Canva)

अगर आप बार बार वैक्सिंग करा रहे हैं तो होंठ के पास की त्वचा ढीली हो सकती है. (Image : Canva)

लड़कियां अपर लिप्‍स के हेयर को रिमूव कराने के लिए या तो थ्रेडिंग कराती हैं या वैक्सिंग. लेकिन इन दोनों में से उनकी स्किन के लिए कौन सा तरीका सेफ है, इसकी जानकारी कम ही लोगों को होती है. यहां बता रहे हैं कि कौन सा तरीका ज्यादा सेफ हो सकता है.

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Upper Lip Hair Removing Method: चेहरे की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए लड़कियां अपर लिप्स यानी होंठ के ऊपर के बाल को हटाना पसंद करती हैं. इसके लिए दो तरीके काफी कॉमन हैं. पहला तरीका थ्रेडिंग और दूसरा तरीका वैक्सिंग है. थ्रेडिंग के लिए धागे की मदद से बालों को निकाला जाता है जबकि वैक्सिंग में गर्म वैक्‍स को स्किन पर चिपकाकर बालों को उखाड़कर रिमूव किया जाता है. कई लोग थ्रेडिंग को स्किन के लिए बेहतर तरीका मानते हैं तो कई वैक्सिंग को. लड़कियों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर इन दोनों तरीकों में कौन सा तरीका अधिक सेफ है. आज आपको इन दोनों तकनीक के बारे में बता रहे हैं.

अपर लिप्स हेयर रिमूव करने का कौन सा तरीका बेहतर?

थ्रेडिंग
थ्रेडिंग में धागे की मदद से अपर लिप्‍स एरिया के बालों को हटाया जाता है. थ्रेडिंग के दौरान अपर लिप्स के छोटे-छोटे हिस्से को कवर करते हुए बाल हटाए जाते हैं. इस दौरान स्किन को खीचकर टाइट रखना होता है. अगर इसके फायदों की बात करें तो ये हर टाइप के स्किन के लिए सबसे सही तरीका कहा जा सकता है जिसमें स्किन के ऊपरी लेयर को नुकसान नहीं पहुंचता.  इससे इनग्रोन हेयर की समस्या भी नहीं होती. लेकिन अगर नुकसान की बात की जाए तो थ्रेडिंग प्रोसेस दर्द भरा होता है और इसके कराने के कुछ ही दिनों बाद बाल दोबारा ग्रो कर जाते हैं. अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो स्किन को टाइट न रखने पर कट जाना, जलन आदि की समस्‍या हो सकती है. इसे करने में अधिक समय लगता है.

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वैक्सिंग
दरअसल जब वैक्स के लिए लिप्स की स्किन को टाइट किया जाता है तो ऐसा करने से स्किन को नुकसान हो सकता है. इससे स्किन जल सकती है और रैशेस और रेडनेस भी आ सकती है. थ्रेडिंग की तुलना में वैक्सिंग करने पर ये स्किन के अंदर तक समा जाता है और स्किन अधिक सेंसिटिव हो जाती है. अगर इसके फायदे और नुकसान की बात करें तो वैक्स गर्म होने की वजह से स्किन बर्न होने का चांस अधिक होता है. वैक्सिंग से स्किन की ऊपरी लेयर भी स्ट्रिप के साथ निकलती है जिससे स्किन डैमेज होती है और बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है.  यही वजह है कि अधिक वैक्सिंग कराने से स्किन ब्‍लैक हो जाती है.  अगर आप बार-बार वैक्सिंग करा रहे हैं तो होंठ के पास की त्वचा ढीली होने लगती है और झुर्रियां होने लगती हैं.

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कौन सी तकनीक बेहतर?
दोनों के प्रोसेस को देखते हुए कहा जा सकता है कि थ्रेडिंग भले ही वैक्सिंग के मुकाबले स्लो प्रोसेस है लेकिन स्किन को ये कम डैमेज करता है. अगर केयर के साथ थ्रेडिंग की जाए तो स्किन को इससे कोई नुकसान नहीं होगा.  इसलिए बेहतर है कि आप अपर लिप्स हेयर रिमूवल के लिए थ्रेडिंग का अधिक इस्‍तेमाल करें.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Tags: Beauty Tips, Lifestyle, Skin care

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